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कांग्रेस को 15 सीटों का प्रस्ताव दे सकती सपा
By EditorialPublished on
नई दिल्ली (एजेंसी)। विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए की हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में सीटों के बंटवारे के लिए राज्य स्तर पर साथी दलों ने होमवर्क शुरू कर दिया।

नई दिल्ली (एजेंसी)। विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए की हाल ही में दिल्ली में हुई बैठक में सीटों के बंटवारे के लिए राज्य स्तर पर साथी दलों ने होमवर्क शुरू कर दिया। जिस तरह बिहार में राजद और जदयू के बीच सहमति लगभग तय है, उसी तरह उत्तर प्रदेश में क्षमता आंकते हुए गठबंधन के प्रमुख घटक दल समाजवादी पार्टी ने खाका खींच लिया है। सपा वहां कांग्रेस को 15 सीटों पर लड़ने का प्रस्ताव दे सकती है। पांच या छह सीटें राष्ट्रीय लोकदल और एक सीट भीम आर्मी के लिए छोड़ते हुए सपा लगभग 58 सीटों पर अपना दावा ठोंक सकती है।
कुछ सपा प्रत्याशी लगभग तय
सूत्रों ने बताया कि सपा ने कुछ सीटों पर प्रत्याशी लगभग तय कर लिए हैं। सीट बंटवारे पर अंतिम मुहर लगते ही इनकी घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन जिन्हें चुनाव लड़ना है, उन्हें तैयारी के लिए इशारा कर दिया गया है।
कन्नौज डिंपल यादव
मैनपुरी अखिलेश यादव
आजमगढ़ शिवपाल यादव
बदायूं धर्मेंद्र यादव
फिरोजाबाद अक्षय यादव
अंबेडकरनगर लालजी वर्मा
फैजाबाद अवधेश प्रसाद
लोकसभा चुनाव में भाजपा को तीसरी बार सत्ता में आने से रोकने को देश के प्रमुख विपक्षी दलों ने हाथ मिलाया है। यूँ तो इनके बीच सीटों के बंटवारे को सबसे बड़ी चुनौती शुरूआत से ही माना जा रहा था, लेकिन जिस तरह से मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस और सपा के बीच तालमेल गड़बड़ाया और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने बयानों से प्रतिशोध का संकेत दिया, उसके बाद लग रहा था कि पिछले लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर वह कांग्रेस को शायद संतोषजनक सीटें न दे। मगर, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार ने जैसे अखिलेश के अंदर जल रही प्रतिशोध की आग को कुछ ठंडा कर दिया। अब वह बड़ा दिल दिखाने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
सपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस को कितनी सीटों का प्रस्ताव दिया जाए इस पर पार्टी में आंतरिक सहमति बन चुकी है। अखिलेश जल्द ही कांग्रेस और रालोद के नेताओं के साथ बैठक कर 15 सीटें कांग्रेस को देने का प्रस्ताव रखेंगे। रालोद के जयंत चौधरी को 5 सीटों का प्रस्ताव दिया जा सकता है। आपसी सहमति के आधार पर नगीना लोकसभा सीट आइएनडीआइए में शामिल नहीं होने के बावजूद भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर के लिए दलित समीकरण साधने के उद्देश्य से छोड़ी जा सकती है।
यूपी में कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी 2014 में 7.53 प्रतिशत रह गया था, जो 2019 में घटकर 6.36 पर सिमट गया।

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