Acharya Mahashraman-Maharashtra-Uddhav Thackeray
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुंबई (Mumbai) के उपनगरों की अपनी यात्रा के दौरान कुर्ला में दो दिवसीय प्रवास किया। प्रवास के दूसरे दिन उनकी मंगल सन्निधि में महाराष्ट्र (Maharashtra) के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पहुंचे। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम के दौरान पहुंचे ठाकरे ने आचार्यश्री को वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि मेरे लिए परम सौभाग्य की बात है कि आज मुझे आपके दर्शन हुए हैं। मैं आपके दर्शन और आशीर्वाद के लिए आया हूं। आपके आशीर्वाद की ऊर्जा से मैं अपने कार्यों को और गति दे सकूंगा।

Acharya Mahashraman-Jain
आचार्य महाश्रमण ने न्यू मिल ग्राउण्ड में आयोजित प्रवचन में कहा कि दुनिया में जय-पराजय की बात होती है। एक की जीत होती है तो दूसरे की पराजय होती है। शास्त्र में बताया गया है कि एक युद्ध में दस लाख सैनिकों पर विजय प्राप्त करने वाला विजयी कहलाता है, किन्तु जिसने एक अपनी आत्मा पर विजय प्राप्त कर ली वह परमजयी कहलाता है। किसी दूसरे पर विजय प्राप्त कोई बड़ी बात नहीं, अपनी आत्मा पर विजय प्राप्त कर लेना बहुत बड़ी बात होती है। यदि आत्मा पर विजय प्राप्त हो जाए तो मोक्षश्री का वरण किया जा सकता है। अब प्रश्न हो सकता है कि आदमी अपनी आत्मा पर कैसे विजय प्राप्त कर सकता है? समाधान प्रदान करते हुए बताया गया कि आदमी अपने शरीर, वाणी और मन के साथ अपनी पांच इन्द्रियों पर नियंत्रण कर ले तो मानना चाहिए कि उसने अपनी आत्मा पर विजय प्राप्त कर ली। आदमी अपने शरीर से कोई अनावश्यक कार्य न करे, वाणी से कोई गलत बात का प्रयोग न करे, झूठ बोले, मन से किसी का बुरा न सोचे और पांचों इंद्रियों का संयम कर ले तो उसके लिए परम विजय की बात हो सकती है। इसलिए कहा गया कि मन के जीते जीत है, मन के हारे हार।
इसके उपरान्त अलग-अलग क्षेत्रों में चातुर्मास पूरे कर गुरुदर्शन करने वाली साध्वियों में से साध्वी उज्वलप्रभा ने अभिव्यक्ति दी तथा सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। साध्वी पुण्ययशा व साध्वी पावनप्रभा ने भी गुरुदर्शन से प्राप्त हर्ष को अभिव्यक्ति देते हुए सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया।

Acharya Mahashraman-Jainism
आचार्य महाश्रमण के कुर्ला प्रवेश पर ऐतिहासिक पदयात्रा का आयोजन किया गया। कुर्ला के प्राचीन सर्वेश्वर महादेव देवालय से प्रारंभ हुई प्रवेश यात्रा अनूठी रही। समाज के विभिन्न संप्रदाय व घटकों ने स्वागत रैली में उपस्थिति दर्ज करवाते हुए उनका स्वागत किया। रैली का समापन प्रवास स्थल पर पहुंच कर हुआ। मार्ग पर पड़ने वाले सभी श्रद्धालुओ के निवेदन पर आचार्य श्री ने उन्हें आशीर्वचन प्रदान किया।दो दिवसीय प्रवास में समाज व राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उनके दर्शन व आशीर्वाद प्राप्त किया। प्रवास के प्रथम दिवस चिकित्सकीय जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुफ्त चश्मा वितरण कार्यक्रम भी रखा गया। द्वितीय दिवस महिलाओं के लिए विशेष जांच शिविर रखा गया।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि हर प्राणी सुख चाहता है, कोई दुखी बनना नहीं चाहता, लेकिन सुख मिले कैसे? युद्ध भी चलता है, वह युद्ध व्यापक रूप से भी चलता है व युद्ध विराम भी होता है लेकिन हम यहाँ ऐसे युद्ध की बात कर रहे हैं वह न व्यक्ति का, न परिवार का, न समाज का, न राष्ट्र का युद्ध है, बल्कि यह खुद के साथ खुद का युद्ध है, आत्म-युद्ध है। अपनी आत्मा को जीत लेने वाले की परम जीत होती है। जो दिखाई नहीं देती उसे परास्त कैसे किया जाए? आत्मा तो दिखाई नहीं देती, वाणी से हम सुनते है, मन से कल्पना करते हैं व इन्द्रियां भी हमारे सामने हैं | यदि हम इन चारों को जीत लेते है तो वह है आत्म-विजय। कषायों के भावों को जीत लेना भी एक उपलब्धि है। एक मोह का मार्ग व दूसरा मोक्ष का मार्ग। हमें मोह से मोक्ष की ओर प्रस्थान करना है व अज्ञान व मोह के अन्धकार को कम करना है। बढती उम्र के साथ हमारी आत्म विजय की साधना पुष्ट बनती जाय व सामायिक तथा स्वाध्याय में हमारे समय का नियोजन बढ़ें।

Acharya Mahashraman
कुर्ला में आचार्यश्री के प्रवास में सांसद मनोज कोटक, पूर्व मंत्री नसीम खान, पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह, तरुण जैन, अनुराग त्रिपाठी, डा राजेंद्र सिंह, महेश पेंडेकर, अनुराधा पेंडेकर, पुलिस अधिकारी अशोक खोत, नितेश सिंह, अनिल गलगली, राजकुमार सिंह, डा वहीदा खान, आदित्य दुबे, हाजी अराफत शेख, विजय सिंह, बृजमोहन पांडे, मनोज नाथानी, उदय प्रताप सिंह, राजकुमार सिंह, किशनलाल डागलिया, गणपत डागलिया, मदनलाल तातेड़, रमेश सुतरिया, सुरेन्द्र कोठारी, भूपेश कोठारी, रोशन मेहता, ख्यालीलाल तातेड आदि की उपस्थिति रही। आयोजन सफल बनाने तेरापंथी सभा कुर्ला, युवक परिषद कुर्ला, तेरापंथ ट्रस्ट कुर्ला, महिला मंडल कुर्ला का सहयोग रहा।
Editorial

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