Pratahkal-Increase in Online Fraud cases
मुंबई । अपने चाचा का बैंक खाता साइबर ठगों (Cyber Thugs) को इस्तेमाल के लिये देने के आरोप में पुलिस ने 21 साल के संजय पवार बिस्वास को गिरफ्तार किया है। बिस्वास कोलकाता में एक ट्रैवल कारोबारी है। खास बात यह है कि बिस्वास ने अपने चाचा के बैंक खाते के दस्तावेजों की गुमशुदगी की पुलिस में झूठी शिकायत भी दर्ज करा रखी थी। इसी तरह की ऑनलाइन ठगी (Online Fraud ) के दो और मामले उजागर हुये हैं जिसमें राजस्थान से एक आरोपी समेत दो आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, मालाड के बिल्डर के बैंक खाते से ठगों ने 12.19 लाख रुपये की रकम उडा ली और इसमें से 50 हजार की रकम जिस खाते में जमा की गई, वह खाता नालासोपारा के एक शख्स का था जो मछली का कारोबार करता है। उसका आईसीआईसीआई बैंक में अंजली फिश नाम से बैंक खाता था। इस खाते को जब्त कर खाताधारक से जब पूछताछ की गई तो उसने बताया कि यह खाता उसका भतीजा इस्तेमाल किया करता था। 21 साल के भतीजे सिद्धार्थ बिस्वास ने इस बैंक खाते के दस्तावेज गुम होने की शिकायत भी दर्ज करा रखी थी। बिस्वास से जब ज्यादा पूछताछ की गई तो पता चला कि उसने स्वेच्छा से यह खाता आरोपियों को इस्तेमाल के लिये दिया था। बिस्वास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
इस बीच साइबर ठगी के एक और मामले में सायन कोलीवाडा में रहनेवाले 29 साल के एक युवक और उसके साथी ने बोरीवली के कारोबारी से 15.85 लाख रुपये की ठगी की है। इस मामले में भी ठगी की रकम श्रीवास्तव नामक शख्स के बैंक खाते में पहुंची थी। श्रीवास्तव से जब पूछा गया तो उसने बताया कि वह केवल अपने दोस्त की मदद कर रहा था। श्रीवास्तव को हिरासत में लिया गया है और पुलिस उसके साथी की तलाश कर रही है।
ठगी के एक और मामले में, पुलिस ने एक सोशल मीडिया फ्रॉड का भंडाफोड किया है। इसमें दक्षिण मुंबई के एक सेवानिवृत्त प्रबंधक को 18.30 लाख रुपये की रकम गंवानी पड़ी थी। इस मामले में भी आरोपियों की मदद के आरोप में राजस्थान से मंगल सिंह राठोड नामक शख्स को गिरफ्तार किया गया। राठोड़ मनी ट्रांसफर बिजनेस चलाता है। राठोड़ को दो लोगों ने मोटे कमीशन का लालच देकर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल करने देने के लिये राजी किया था। एक दिन के भीतर ही राठोड़ के बैंक खाते में एक करोड़ रुपये जमा हुये थे। इसमें से ढाई लाख रुपये सेवानिवृत्त प्रबंधक के थे।
Editorial

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