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आचार्य महाश्रमण ने बहाई अध्यात्म की गंगा
By EditorialPublished on
मुम्बई (Mumbai) महानगर की उपनगरीय यात्रा में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने सायन कोलीवाड़ा प्रवास किया। वे मुम्बई के जिस क्षेत्र में प्रवास करते हैं, श्रद्धालुओं का पहुंचने का क्रम बना रहता है। प्रातःकाल का बृहद् मंगलपाठ हो, दर्शन, सेवा, उपासना हो अथवा सायंकाल गुरु के चरणस्पर्श का लाभ। इसे प्राप्त करने के लिए मुम्बईवासी खिंचे चले आ रहे हैं।

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मुंबई । मुम्बई (Mumbai) महानगर की उपनगरीय यात्रा में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने सायन कोलीवाड़ा प्रवास किया। वे मुम्बई के जिस क्षेत्र में प्रवास करते हैं, श्रद्धालुओं का पहुंचने का क्रम बना रहता है। प्रातःकाल का बृहद् मंगलपाठ हो, दर्शन, सेवा, उपासना हो अथवा सायंकाल गुरु के चरणस्पर्श का लाभ। इसे प्राप्त करने के लिए मुम्बईवासी खिंचे चले आ रहे हैं।
शनिवार को एमएमआरडीए ग्राउण्ड में महावीर समवसरण में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि जैन धर्म (Jainism) में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव व वर्तमान अवसर्पिणी के अंतिम व चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर हुए। मानव जगत में सबसे उच्च व्यक्तित्व अर्हत होते हैं। ये अर्हत अथवा तीर्थंकर अध्यात्मवेत्ता होते हैं। वे अध्यात्म के अधिकृत प्रवक्ता होते हैं। मंत्रों में इन चौबीस तीर्थंकरों को, सिद्धों को, आचार्यों को, उपाध्यायों को व साधु-साध्वियों को नमस्कार किया जाता है। नमस्कार करना, किसी के चरणों में झुक जाना, नमन करना व पैर में मस्तक लगा देना कितनी भक्ति की बात होती है। आदमी किसी के प्रति भी भक्ति कर सकता है। किसी आदर्श के प्रति, किसी वाणी के प्रति, किसी व्यक्ति के प्रति, किसी सिद्धांत व आदर्श के प्रति भी भक्ति हो सकती है। देश के जवानों में देश के प्रति भक्ति होती है तो देश की सुरक्षा में वे अपने प्राणों की आहूति भी दे देते हैं। बच्चों में ऐसे संस्कारों का विकास होना चाहिए। शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में ऐसे संस्कार भी आएं कि वे अपनी भक्ति की भावना के प्रति अडिग बन सकें।
कार्यक्रम में साध्वी सिद्धप्रभा ने सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। स्वागताध्यक्ष नवरत्न गन्ना तेरापंथी सभा सायन माटुंगा धारावी के अध्यक्ष अशोक धाकड़ आचार्य महाप्रज्ञ चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रकाश धाकड युवक परिषद सायन कोलीवाडा के अध्यक्ष हिम्मत सोलंकी मंत्री भरत मेहता महिला मंडल संयोजिका अनिता डांगी ने विचार रखे। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने प्रस्तुति दी तथा प्रशिक्षिकाओं ने गीत का संगान किया। सभा व युवक परिषद ने स्वागत गीत का संगान किया। सायन कोलीवाडा माटुंगा धारावी वडाला सायन महिला मण्डल ने गीत का संगान किया। प्रेमा धाकड ने विचार रखे। कन्या मण्डल ने प्रस्तुति दी। रात्रि में अभिलाषा बांठिया ने भक्ति रस की धारा बहाई।
कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष नवरत्न कमलादेवी, विकास शिल्पा, जिनेश प्रियंका, निवेध्य, तनुष्का, दिव्यम गन्ना परिवार का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने तेरापंथ समाज सायन कोलीवाडा, माटुंगा, धारावी, वडाला, सायन तेरापंथी सभा माटुंगा धारावी सायन वडाला के पदाधिकारी युवक परिषद सायन कोलीवाडा की टीम सभी क्षेत्रीय महिला मंडल आचार्य महाप्रज्ञ चेरिटेबल ट्रस्ट ज्ञानशाला परिवार अणुव्रत उपसमिति सायन-कोलीवाडा के साथ किशोर मंडल कन्या मंडल सहित समस्त समाज के कार्यकर्ता लगे हुए थे। वडाला तेरापंथ समाज का भी सहयोग रहा। प्रवास व्यवस्था समिति मुंबई का भी सहयोग रहा।

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