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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान (rajasthan) विधानसभा चुनाव (vidhansabha election) के दौरान तीन राज्यों में मिली हार के बाद कांग्रेस (congress) अब | लोकसभा चुनाव (loksabha election) की तैयारियों में जुट गई है। लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने संगठन में व्यापक बदलाव किया है। कई राज्यों के प्रभारी बदले गए हैं और कुछ को हटाया गया है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले दिनों विपक्षी अलायंस कमेटी के सदस्य बनाए जा चुके हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गहलोत के | विरोधी रहे सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ का प्रभारी महासचिव बनाया है। संगठन में हुए बदलाव से राजस्थान कांग्रेस में अशोक गहलोत
(ashok gehlot)
का ही दबदबा नजर आ रहा। गहलोत दिल्ली में रहकर राजस्थान सहित अन्य राज्यों में कांग्रेस की रणनीति तय करेंगे जबकि पायलट (pilot) आगामी पांच महीनों तक केवल छत्तीसगढ़ में व्यस्त रहेंगे।
राजस्थान में गहलोत समर्थकों को तवज्जो
विधानसभा चुनाव के बाद मिली हार के बावजूद प्रदेश संगठन में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया गया है। अशोक गहलोत के कट्टर समर्थक गोविंद सिंह डोटासरा प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर कायम है और प्रदेश प्रभारी के तौर पर सुखजिंदर सिंह रंधावा को बरकरार रखा गया है। 25 सितंबर 2022 को कांग्रेस में हुए बवंडर के दौरान गहलोत खेमे के विधायकों ने तत्कालीन प्रदेश प्रभारी अजय माकन पर पायलट की तरफदारी करने के आरोप लगाए थे जिसके बाद माकन को पद छोड़ना पड़ा। अजय माकन के बाद दिसंबर 2022 में सुखजिंदर सिंह रंधावा प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बावजूद रंधावा को लोकसभा चुनाव तक प्रभारी बनाए रखा है।
कांग्रेस हाईकमान का गहलोत पर विश्वास कायम
भले ही विधानसभा चुनाव में गहलोत को राजस्थान की सत्ता गंवानी पड़ी लेकिन कांग्रेस हाईकमान को गहलोत पर विश्वास कायम है। यही वजह है कि राजस्थान में संगठनात्मक बदलाव नहीं किया गया है। विधानसभा चुनाव की हार को कांग्रेस हाईकमान गहलोत की विफलता नहीं मान रहे हैं। सचिन पायलट को छत्तीसगढ़ का प्रभारी बनाकर प्रदेश में उनकी सक्रियता कम कर दी है। इसके पीछे बड़ी वजह पायलट का गहलोत के खिलाफ मुखर होकर आंदोलन करना है। चुनाव से पहले पायलट की ओर से उठाया गया हर कदम पर हाईकमान कभी भूल नहीं पाएगा।
गहलोत के चहेते ही बनेंगे नेता प्रतिपक्ष
राजस्थान विधानसभा में अब नेता प्रतिपक्ष का चुनाव होना है। साफ तौर पर माना जा रहा है कि कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त इस पद पर गहलोत खेमे के नेता को ही मौका मिलने वाला है। चूंकि सचिन पायलट
(sachin pilot)
को छत्तीसगढ़ का प्रभारी महासचिव बनाया जा चुका है। ऐसे में वे नेता प्रतिपक्ष की दौड़ से बाहर हो गए हैं। डोटासरा को भी पीसीसी चीफ पद रहते हुए दो बड़े पद दिए जाने की संभावना नहीं है। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष के लिए शांति धारीवाल और राजेंद्र पारीक के नाम आगे माने जा रहे हैं। धारीवाल गहलोत के कट्टर समर्थकों में माने जाते हैं लेकिन वे सत्ता पक्ष पर हमला करने में सबसे माहिर भी माने जा रहे। अगर सामान्य वर्ग के बजाय कांग्रेस किसी आदिवासी नेता को अवसर देती है तो महेंद्रजीत सिंह मालवीय को नेता प्रतिपक्ष बनाया जा सकता है।
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Editorial

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