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ऐतिहासिक गोल देवल मंदिर परिसर का होगा कायाकल्प !
By EditorialPublished on
मुंबई (Mumbai) में भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के सबसे प्राचीन मंदिर के तौर पर विख्यात नागेश्वर मंदिर के ईर्द-गिर्द यातायात की भारी भीड़ और समस्या को दूर करने के लिये अब इस पूरे इलाके का कायाकल्प होने जा रहा है। खेतवाडी में सरदार वल्लभभाई पटेल रोड पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर गोल देवल (Gol Deval Temple) के नाम से सुप्रसिद्ध है।

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मुंबई । मुंबई (Mumbai) में भगवान शिव (Bhagwan Shiv) के सबसे प्राचीन मंदिर के तौर पर विख्यात नागेश्वर मंदिर के ईर्द-गिर्द यातायात की भारी भीड़ और समस्या को दूर करने के लिये अब इस पूरे इलाके का कायाकल्प होने जा रहा है। खेतवाडी में सरदार वल्लभभाई पटेल रोड पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर गोल देवल (Gol Deval Temple) के नाम से सुप्रसिद्ध है।
मिली जानकारी के मुताबिक, मनपा (Municipal Corporation) ने इस इस मंदिर और आसपास के परिसर को पूरी तरह से बदलने की योजना बनाई है। इसके तहत यहां पार्किंग एरियाज बनाये जायेंगे। बैसाल्ट स्टोन फुटपाथों का निर्माण किया जायेगा और इलेक्ट्रिक पोल्स को भी विंटेज लुक प्रदान किया जायेगा। हालांकि इस पूरे कायाकल्प में मंदिर संरचना से बिलकुल भी छेड़छाड़ नहीं की जायेगी।
मनपा अधिकारियों के मुताबिक, यह मंदिर सरदार वल्लभभाई पटेल रोड पर केंद्र में स्थित है और इसके आसपास बिल्डिंगों का एक जाल खड़ा हो गया है। इसी के साथ यहां फेरीवालों के अतिक्रमण और भारी वाहनों और पैदल यात्रियों की भारी भीड़ का नजारा ऐसा हो गया है कि इस पूरे इलाके की पहचान यह मंदिर ही अब इन सबके बीच कहीं खो गया है। लिहाजा इसकी पहचान को फिर एक बार स्थापित करना आवश्यक है।
अधिकारियों के मुताबिक, यहां पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है और लोग बेतरतीब और मनमाने तरीके से अपने वाहन पार्क करते हैं जिससे यातायात की भारी समस्या होती है। मंदिर के दोनों तरफ वाहनों की पार्किंग से मंदिर परिसर में हमेशा यातायात जाम लगा रहता है।
यहां लोगों की सुगम आवाजाही और भक्तगणों की सुविधा को ध्यान में रखते हुये इस पूरे मंदिर परिसर को नवनिर्मित किया जायेगा। मंदिर के मूल स्वरूप को यथावत रखा जायेगा केवल इर्द-गिर्द के परिसर का ही कायापलट किया जायेगा। मंदिर के आसपास सुशोभिकरण के लिये एक गैरसरकारी संगठन की सहायता ली जा सकती है। इस पूरी योजना से मंदिर ट्रस्ट को अवगत कराया गया है। परिसर में वृक्षों को संरक्षित किया जायेगा और उन्हें सुरक्षा के लिये कवच प्रदान किये जायेंगे। फूटपाथों पर कूडेदान की व्यवस्था की जायेगी ताकि कचरा यहां वहां न फैले और मंदिर परिसर की स्वच्छता और पवित्रता बरकरार रखी जा सके। फेरीवालों को भी यहां एक निर्धारित स्थान के दायरे में ही व्यवसाय करने की इजाजत दी जायेगी।

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