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हार की समीक्षा करने इकट्ठे हुए कांग्रेसी नेताओं ने निकाली भड़ास
By EditorialPublished on
शहर विधानसभा से 33 हजार वोटों से चुनाव हारने के बाद आयोजित कांग्रेस समीक्षा बैठक (congress review meeting) में हार के कारणों की समीक्षा ना होकर नेताओं ने अपनी भड़ास निकाली। इस दौरान चुनाव लड़ने वाले गौरव वल्लभ (Gaurav Vallabh) के बारे में भी इस बैठक में पूछा। इसके साथ ही अपने ही कांग्रेस नेताओं ने नेताओं पर ही अपनी कई तीर चलाए। इस दौरान लोगों ने पूछा कि चुनाव लड़कर गए प्रत्याशी कहां पर है। साथ ही किसी ने अल्पसंख्यक को मौका नहीं देने पर तीर चलाए तो किसी ने एक ही नेता के 10-10 पद लेने पर टिप्पणी की।

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बातों ही बातों में नेताओं ने नेताओं पर चलाए कई तीर
किसी ने अल्पसंख्यक तो किसी ने 10-10 पद लेने पर की टिप्पणी
उदयपुर ( प्रा.सं.)। शहर विधानसभा से 33 हजार वोटों से चुनाव हारने के बाद आयोजित कांग्रेस समीक्षा बैठक (congress review meeting) में हार के कारणों की समीक्षा ना होकर नेताओं ने अपनी भड़ास निकाली। इस दौरान चुनाव लड़ने वाले गौरव वल्लभ (Gaurav Vallabh) के बारे में भी इस बैठक में पूछा। इसके साथ ही अपने ही कांग्रेस नेताओं ने नेताओं पर ही अपनी कई तीर चलाए। इस दौरान लोगों ने पूछा कि चुनाव लड़कर गए प्रत्याशी कहां पर है। साथ ही किसी ने अल्पसंख्यक को मौका नहीं देने पर तीर चलाए तो किसी ने एक ही नेता के 10-10 पद लेने पर टिप्पणी की।
उदयपुर (udaipur) शहर में कांग्रेस प्रत्याशी की करारी हार के बाद शहर कांग्रेस (congress) की ओर से हार की समीक्षा के लिए बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कांग्रेस नेताओं ने हार की समीक्षा तो नहीं की पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। बैठक में वरिष्ठ नेता शराफत खान ने कहा कि अशोक गहलोत (Ashok gehlot) की नीतियों से चुनाव हारें है, जो बाहर का है उसे भी टिकट दे दिया। कार्यकर्ताओं को तवज्जों नहीं दी और उनके दुख-सुख में भागीदार नहीं बनेगा तो कार्यकर्ता घर ही बैठ जाएगा। खान ने कहा कि जो 2-3 बार चुनाव हार चुके है उन्हें टिकट दे दिया तो उसे कांग्रेस कार्यकर्ता और आम वोटर कैसे स्वीकार करेगा। सरकार होने के बाद भी ना तो यूआईटी का अध्यक्ष बनाया और ना ही किसी कार्यकर्ता को ट्रस्टी बनाया। शराफत ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि काम करने वाले कार्यकर्ता को पद नहीं दिया गया और 3-4 ऐसे लोग है जिनके पास 10-12 पद है। जिनको काम करना था उसने काम नहीं किया।
सरकार भी कार्यकर्ताओं के माध्यम से काम नहीं करवा रही थी वो तो अधिकारियों से काम करवा रही थी। कार्यकर्ता दर्शक बना देखता रहा। मुख्यमंत्री से मिलने के लिए जा रहे कार्यकर्ता को पुलिस धक्के दे रही है और मुख्यमंत्री देख रहे है। जन सुनवाई में खुद सीएम बात तक नहीं कर रहे थे। ऐसे में वोट कैसे मिलेगा। कार्यकर्ता की तो सुनवाई तक नहीं थी । इधर रियाज हुसैन ने अल्पसंख्यकों की पैरवी करते हुए कहा कि जो भी वोट कांग्रेस प्रत्याशी को मिले है वो सिर्फ अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्र से ही मिले थे। बड़े-बड़े कांग्रेस नेताओं के वार्ड से कांग्रेस को करारी हार मिली है, इसके बाद भी अल्पसंख्यकों को कुछ नही दिया गया। वहीं पूर्व जिलाध्यक्ष गोपाल शर्मा ने कहा कि सरकार हमारी पर हमारी बात तक नहीं सुनी जाती थी । स्थिति यह थी कि किसको कहें और कौन सुनवाई करे। जयपुर में भी सुनवाई नही होती थी। प्रदेश प्रवक्ता पंकज शर्मा ने कहा कि आम जनता के बीच में जाकर पूर्ववती कांग्रेस सरकार की योजनाओं को गिनाना होगा और लोकसभा में चुनाव जिताना होगा। साथ ही कहा कि हर शहरवासी के सुख दुख में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भागीदार होना होगा। इस तरह से सभी कांग्रेस नेताओं ने जमकर भड़ास निकाली और एक-दूसरे पर छींटाकशी की । वहीं शहर जिलाध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ ने कहा कि जो होना था वो हो गया।
संगठन लोकसभा चुनाव (loksabha election) की तैयारियां कर रहा है और संगठन मजबूत होगा तो हार को जीत में बदलेंगे। लोकसभा चुनाव में अच्छी परफार्मेस करेंगे। इस मौके पर पूर्व विधायक त्रिलोक पूर्बिया, ए ब्लॉक संगठन महामंत्री धर्मेंद्र राजोरा एवं बी ब्लॉक अध्यक्ष अजय सिंह जी महिला अध्यक्ष नजमा मेवाफरोश ने भी संबोधित किया। इस दौरान कई कांग्रेस नेता उपस्थित थे ।
प्रत्याशी से चिपके रहने वाले पर माहौल गर्माया सम्बोधन के दौरान एक कांग्रेसी नेता ने कहा कि कहां गए चुनाव लड़ने वाले और लड़वाने वाले । वो दोनों कहा है जो कैंडिडेट के चिपके रहते थे। इस पर एक नेता ने विरोध करते हुए कहा कि हम यहां पर बैठे है।
इस दौरान थोड़ा सा माहौल गर्मा गया। गौरतलब है कि कांग्रेस प्रत्याशी से कुछ कांग्रेस ने ऐसे चिपके कि किसी को नजदीक नहीं आने दिया गया। जिसमें लम्बे समय से शहर से टिकट का दावेदार का खास भी था जो बाद में टिकट की घोषणा होने से पहले प्रत्याशी के साथ हो गया था और बाद में उसका एक साथी भी उसके साथ हो गया। एक नेता जो अपने आप को आईटी और आंकड़ों का एक्सपर्ट समझता है उसके जाने के बाद तो प्रत्याशी से सीधा बात करना भी मुश्किल हो गया था।

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