Pratahkal-Provided useful inspiration to the business class-Acharya Mahashraman
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) इन दिनों दक्षिण मुम्बई (Mumbai) के कालबादेवी में पंचदिवसीय प्रवास कर रहे हैं। प्रवास के तीसरे दिन उनके सम्मुख कालबादेवी क्षेत्र के व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित हुए। व्यापारी वर्ग को उन्होंने जीवनोपयोगी प्रेरणा प्रदान की। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि जीवन में शांति का बड़ा महत्त्व है। जिसके जीवन में शांति का अभाव हो, उसका जीवन कष्टों से भरा हो सकता है। दो बात बताई गई- एक सुविधा और दूसरी शांति। सुविधा साधनों से प्राप्त होती है और शांति साधना से प्राप्त होती है। भौतिक रूप में प्राप्त साधन, जैसे-घर, कार, मोबाइल, कपड़े आदि से सुविधा हो सकती है, किन्तु शांति की प्राप्ति तो साधना से ही हो सकती है। गुस्सा शांति का सबसे बाधक तत्त्व है। भय व लोभ भी आदमी की शांति में बाधक बनते हैं। इसलिए आदमी को साधना के माध्यम से गुस्से को नियंत्रित, संतोष भाव का विकास और अभय की बात हो तो शांति की प्राप्ति संभव हो सकती है।
उन्होंने व्यापारी वर्ग को विशेष उद्बोधन देते हुए कहा कि अर्थार्जन का साधन व्यापार होता है। जनता के आवश्यकता के सामान की पूर्ति व्यापारी द्वारा की जाती है। इससे जनता को सहयोग मिलता है तो जनता से प्राप्त धन से व्यापारी का व्यवसाय चलता है। व्यापार में ईमानदारी रखने का प्रयास करना चाहिए। न्याय, नीति से प्राप्त धन अर्थ और अन्याय, अनीति से प्राप्त धन अर्थाभास होता है। इसलिए व्यवसाय में शुद्धता रखने का प्रयास करना चाहिए। व्यापार में ईमानदारी, नैतिकता व प्रमाणिकता हो तो शुद्धता बनी रह सकती है। दुकानदारी में ईमानदारी और दुकानदार ईमानदार हो तो अर्थ में शुद्धता रह सकती है। इस प्रकार यह व्यापार का कार्य भी निर्मल बन सकता है।
आयोजन में इण्डिया बुलियन ज्वेलरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि आपका यहां आगमन सभी के लिए परम सौभाग्य की बात है। आपके दर्शन दुर्लभ होते हैं और हम लोग तो इतने भाग्यशाली हैं कि आपके दर्शन, प्रवचन के उपरान्त आपके समक्ष बोलने का सौभाग्य भी प्राप्त हो गया। स्थानीय तेरापंथ कन्या मण्डल व किशोर मण्डल ने गीतों का संगान किया।
Editorial

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