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भारत ऋषि और कृषि संस्कृति से ओतप्रोत राष्ट्र
By EditorialPublished on
कुलाधिपति (chancellor) एवं प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) ने कहा कि भारत ऋषि एवं कृषि संस्कृति (Indian sages and agricultural culture) से ओतप्रोत राष्ट्र है। ऋषिका अर्थ है कि जो भूत, भविष्य और वर्तमान की दृष्टि रखता है और उसी के अनुरूप अपने शिष्यों में ज्ञान की ज्योति प्रज्जवलित करते हो। इसी प्रकार कृषि संस्कृति के अंतर्गत धरती-धन उगाने और परिश्रम के साथ जीवन यापन पर सदैव हमारी संस्कृति में जोर दिया गया है।

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उदयपुर. नगर संवाददाता | कुलाधिपति (chancellor) एवं प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र (Governor Kalraj Mishra) ने कहा कि भारत ऋषि एवं कृषि संस्कृति (Indian sages and agricultural culture) से ओतप्रोत राष्ट्र है। ऋषिका अर्थ है कि जो भूत, भविष्य और वर्तमान की दृष्टि रखता है और उसी के अनुरूप अपने शिष्यों में ज्ञान की ज्योति प्रज्जवलित करते हो। इसी प्रकार कृषि संस्कृति के अंतर्गत धरती-धन उगाने और परिश्रम के साथ जीवन यापन पर सदैव हमारी संस्कृति में जोर दिया गया है।
राज्यपाल मिश्र (Governor Mishra) बुधवार को यहां विवेकानंद सभागार में आयोजित महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सत्रहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में 864 स्नातक (बीएससी), 201 स्नातकोत्तर (एमएससी) व 74 विद्या वाचस्पति छात्र-छात्राओं को दीक्षा प्रदान करने के साथ ही उपाधियां 42 स्वर्ण पदक से नवाजा। राज्यपाल ने इस वर्ष का कुलाधिपति स्वर्ण पदक दीक्षा शर्मा एमएससी कृषि (सत्य विज्ञान) को प्रदान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और कृषि पर विशेष ध्यान देकर ही हम सही मायने में राष्ट्र को समृद्ध बना सकते हैं। राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार खाद्य और पोषण सुरक्षा ही है। हरित क्रांति और दुग्ध क्रांति के बाद देश खाद्य व पोषण सुरक्षा में आज आत्मनिर्भर जरूर बन गया है, लेकिन यह अंत नहीं है। हमें अभी विकसित भारत के स्वप्न को साकार करना है। इसके लिए हमें कृषि निर्यात को बढ़ाना होगा। यह भी ध्यान रखना होगा कि भूमि की उर्वर शक्ति और जैव विविधता पर खतरा न मंडराए। राज्यपाल ने कहा कि महाराणा प्रताप के एक दरवानी पंडित थे चक्रपाणि मिश्र। उन्होंने प्रताप के कहने पर ही पौधों और फसलों से जुड़े ज्ञान पर महत्वपूर्ण शोधपरक लेखन किया। मेवाड़ की जल संरक्षण परम्परा है, यहां के औषधीय पौधों के बारे में दुर्लभ जानकारियां चक्रपाणि मिन ने अपने ग्रंथ 'विश्ववल्लम' में निरूपित किया है। एशियन एग्री हिस्ट्री फाउण्डेशन ने इस ग्रंथ को प्रकाशित किया है। उन्होंने आह्वान किया कि इस ग्रंथ में खेती से जुड़े परम्परागत ज्ञान को विश्वविद्यालय आगे बढ़ाए ।
दुग्ध उत्पादन में हम अव्वल
डॉ आर. सी. अग्रवाल उपमहानिदेशक (कृषि शिक्षा) भारतीय क्षि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली ने दीक्षांत उद्बोधन देते हुए कहा कि भारतीय कृषि विविधतापूर्ण है। इसमें जलवायु, मृदा, भूगर्भीय पारिस्थितिकी व वनस्पति तंत्र सम्मिलित है जो सहस्त्राब्दियों से विकसित प्राकृतिक आवास, फसलों व पशुधन की विविधता तय करता है। भारत फसली पौधों की उत्पत्ति के विश्व के 8 केन्द्रों में से एक है। लगभग 166 फसल प्रजातियां व फसलों की 320 जंगली प्रजातियों की उत्पत्ति यहां हुई। देश में इस समय 76 विश्वविद्यालय और 732 केवीके हैं। आठ वर्ष पूर्व तक 23 प्रतिशत छात्राएँ कृषि शिक्षा ग्रहण कर रही थी जो आज बढ़कर 50 प्रतिशत हो चुकी है जो कृषि में महिलाओं की भागीदारी के अच्छे संकेत है। वर्ष 2040 तक 9.50 लाख कृषि स्नातकों की आवश्यकता होगी जो आज 50 फीसदी ही है।
उपलब्धियों में शीर्ष पर विश्वविद्यालय
कुलपति अजीत कुमार कर्नाटक ने कहा कि विगत एक वर्ष में विश्वविद्यालय ने अनुसंधान के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में अनेक उपलब्धियां हासिल की है। विराट परिसर श्रेष्ठ अकादमिक स्तर व शैक्षणिक गुणवश्रा के कारण आज यह
अभिन्न तकनीक विकसित कर विगत एक वर्ष में 12 भारतीय व विदेशी पेटेन्ट हासिल किए। इनमें प्रमुख है बायोचार निर्माण, सौर ऊर्जा चलित आइसक्रीम गाड़ी का निमार्ण, कृषि अवशेषों से हाइड्रोजन युक्त सिनगैस का निमार्ण व स्वचालित सब्जी पौध रोपण तकनीक आदि । विश्वविद्यालय कृषि में ड्रोन के उपयोग में राज्य का प्रथम विश्वविद्यालय है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् द्वारा एपलब्ध विश्र से दो ड्रोन क्रय कर किसानों के खेतों पर छिड़काव हेतु सर्वप्रथम उपयोग में लाना शुरू किया। मिलेट्स पर सचित्र मार्गदर्शन, जागरूकता, रैलियां व कार्यशालाएं आयोजित की गई। विधार्थियों द्वारा मिलेट केक ने तो राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की । वर्ष भर मिलेट को भोजन में शामिल में करने व मिलेट् पर किए गए कार्यों के संबंध में एक कॉफी टेबल बुक भी तैयार की गई । यह जानकारी जनसंपर्क अधिकारी डॉ. लतिका व्यास ने दी।
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