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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। कांग्रेस (congress) के राष्ट्रीय नेतृत्व (national leadership) ने राजस्थान (rajasthan) के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) को राष्ट्रीय गठबंधन समिति का सदस्य बनाया है। यानी गहलोत अब कांग्रेस के केंद्रीय संगठन में रहते हुए राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रहेंगे। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों (opposition party) ने मिलकर इंडियन नेशनल डेवलपमेंट इंक्लूसिव अलायंस का गठन किया था। ताकि वर्ष 2024 में होने वाले आम चुनावों में भाजपा और एनडीए के खिलाफ मजबूती से चुनाव मैदान में उतर सके। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को 5 सदस्यीय राष्ट्रीय गठबंधन समिति बनाई जिसमें मुकुल वासनिक
(Mukul Wasnik)
, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel), सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) और मोहन प्रकाश ( Mohan Prakash) को शामिल किया गया है। मुकुल वासनिक को समिति का संयोजक भी बनाया गया है।
प्रदेश में युवा नेतृत्व को मिल सकता है मौका
अशोक गहलोत के केंद्रीय टीम में शामिल होने से सियासी गलियारों में नई चर्चाएं छिड़ गई है। राजनैतिक जानकारों का कहना है गहलोत अब केंद्र में ही सक्रिय रहेंगे। ऐसे में प्रदेश में अब युवा नेतृत्व को मौका मिल सकता है। राहुल गांधी (rahul gandhi) पूर्व में ही कई बार युवाओं को अवसर देने की पैरवी कर चुके हैं। कांग्रेस के कुछ सीनियर विधायकों ने भी विधानसभा चुनाव के ठीक पहले युवाओं को अवसर देने की मांग करते हुए टिकट नहीं लेने की बात कही थी। कांग्रेस नेता हेमाराम चौधरी और भरतसिंह कुंदनपुर के साथ अमीन खान, महादेव सिंह खंडेला और दीपेंद्र सिंह शेखावत ने युवाओं को अवसर देने की बात कही थी। हालांकि खान, खंडेला और शेखावत ने अपने बेटों के लिए टिकट की मांग की थी।
इसलिए जगी युवा नेतृत्व की आस
हाल ही में कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने मध्यप्रदेश में जीतू पटवारी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया। विधानसभा चुनाव में जीतू पटवारी चुनाव हार चुके थे। इसके बावजूद भी उन्हें प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंपी। राजस्थान में कांग्रेस की हार के बाद अब प्रदेश नेतृत्व बदलने जाने की संभावना है। पीसीसी चीफ के पद पर गोविंद डोटासरा के बजाय सचिन पायलट (sachin pilot), हरीश चौधरी, दिव्या मदेरणा सहित अन्य नेताओं के नाम पर विचार किया जा रहा है। यह भी चर्चाएं हैं कि इस बार पार्टी किसी ब्राह्मण समाज के युवा नेता को प्रदेशाध्यक्ष की कमान सौंप सकती है।
गहलोत पहले ही कर चुके इनकार
विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पार्टी के प्रदेश नेतृत्व का बचाव किया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व बदले जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि हार के बावजूद कांग्रेस ने सम्मानजनक प्रदर्शन किया है। प्रदेशाध्यक्ष बदले जाने की चर्चाओं के बीच अशोक गहलोत साफ तौर में इनकार कर चुके हैं कि वे प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि वे तीन बार अध्यक्ष रह चुके हैं। अब पार्टी के निष्ठावान और संघर्षशील नेता को काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए। हालांकि प्रदेशाध्यक्ष बदले जाने का अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है ।
Editorial

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