Pratahkal-Honesty Center for Spiritual Healing-Acharya Mahashraman
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सानिध्य में एलिवेट कार्यक्रम का आयोजन बिरला मातुश्री सभागार में हुआ। इसमें बॉम्बे हॉस्पिटल (Bombay Hospital) के चेयरमेन बीके तापड़िया, एलआईसी के चेयरमेन सिद्धार्थ मोहंती, ज्वाइंट सीपी सत्यनारायण चौधरी, बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल, एमएमआरडीए कमिश्नर संजय मुखर्जी, अभिनेता सुनील शेट्टी, संगीतकार अन्नु मलिक, डॉक्टर फारुख सी उदवाडिया आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का शुभारम्भ आचार्यश्री के मंगल महा मंत्रोच्चार के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजक डॉ. गौतम भंसाली ने स्वागत किया।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि दुनिया में सुख है तो दुःख भी है। दुःख से आदमी को अच्छी प्रेरणा प्राप्त हो सकती है। जीवन में कष्ट, कठिनाई आती है तो आदमी संभलता है, कठिनाइयों से पार पाने प्रयास कर सकता है और इससे वह मजबूत बनता है। जीवन में कभी शारीरिक, मानसिक दुःख होता है। सभी दुःखों के मूल में राग-द्वेष ही होते हैं। राग-द्वेष की कर्म के बीज भी हैं। इस कर्मों के बीज राग-द्वेष का उन्मूलन कर दिया जाए तो आदमी दुःखों से मुक्त हो सकता है। शारीरिक कष्ट को एक बार तो डॉक्टर दवा आदि के द्वारा ठीक भी कर दे, किन्तु मानसिक कष्ट को दूर कर पाना उनके वश की बात नहीं होती। राग-द्वेष को अध्यात्म के द्वारा दूर किया जा सकता है। ईमानदारी मानों आध्यात्मिक चिकित्सा का केन्द्र है। आदमी को ईमानदारी रखने का प्रयास करना चाहिए। मानव जीवन में संयम भी होना चाहिए। जीवन संयमित हो, अहिंसा की चेतना हो, जीवन में ईमानदारी हो। जीवन नशा मुक्त रहे। आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि मननकुमार, मुनि अभिजितकुमार, मुनि जागृतकुमार ने भी अभिव्यक्ति दी। संचालन मुनि कुमारश्रमण ने किया।
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