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मुंबई। कालबादेवी (Kalbadevi) के आचार्य महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल (Acharya Mahapragya Public School) में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सम्मुख पूरे दिन भीड़ उमड़ रही है। रविवार रात आठ बजे जब उनके चरणस्पर्श का समय हुआ तो लोग पंक्तिबद्ध रूप में खड़े थे। यह व्यापारिक क्षेत्र पूरी तरह से आध्यात्मिक क्षेत्र बना था।
सोमवार को आचार्य महाश्रमण ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में आत्मा के साथ-साथ तीन चीजों का भी संयोग है। शरीर, वाणी और मन। आत्मा मूल तत्त्व है, दूसरा तत्त्व शरीर। इसके साथ जुड़ी हुई चीजें हैं वाणी और मन। शरीर से आदमी कोई भी कार्य करता है। मन से आदमी विचार व चिंतन करता है। वाणी से अपने विचारों का आदान-प्रदान करता है।
मनुष्य अपने मन का कैसे अच्छा उपयोग कर सके, इसका प्रयास करना चाहिए। मन में अति चंचलता, मन में मलीनता हो तो वह आदमी का नुक्सान कराने वाला होता है। आदमी को अपने मन को स्थिर, दुर्गुणों से दूर, बुरे विचारों से दूर रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए योग, ध्यान और साधना का अभ्यास करने का प्रयास करना चाहिए।
मन में बुरे विचार न आएं, इसके लिए आदमी को आध्यात्मिक-धार्मिक कार्यों में समय का नियोजन करने का प्रयास करना चाहिए। इस प्रकार आदमी को अपने मन को सुमन बनाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों का मन भी एकाग्र हो, पढ़ाई में मन रमे, ज्ञान का विकास हो, इसके साथ सद्विचार भी आएं तो उनका जीवन भी अच्छा बन सकता है।
मुनि जयेशकुमार ने अभिव्यक्ति दी। आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउण्डेशन (Acharya Mahapragya Vidyanidhi Foundation) के अध्यक्ष किशनलाल डागलिया, महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल के चेयरमेन एस.के. जैन, डायरेक्टर वनिता मनसुखानी, दक्षिण मुम्बई के तेरापंथ युवक परिषद (Terapanth Youth Council) के अध्यक्ष नितेश धाकड़ व विद्यार्थी महक जैन ने अपनी अभिव्यक्ति दी।
Editorial

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