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मुंबई। आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के दादर प्रवास के दूसरे दिन दिगम्बर सम्प्रदाय के आचार्य प्रणाम सागर महाराज की उपस्थिति में कार्यक्रम हुआ। मुख्य कार्यक्रम में दोनों आचार्यों ने उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रेरणा प्रदान की व जैन (jain) एकता का संदेश दिया। आचार्य महाश्रमण ने कहा कि मानव की स्वयं की आत्मा ही उसकी सबसे अच्छी मित्र होती है और आत्मा ही शत्रु भी हो सकती है। अच्छी प्रवृत्ति में लगी हुई आत्मा उस व्यक्ति की मित्र होती है और बुरी प्रवृत्ति में लगी हुई आत्मा उस व्यक्ति की शत्रु होती है। अहंकार, क्रोध, लोभ व माया में लिप्त आत्मा आदमी की शत्रु व निरहंकार, संतोषी, सरल, धर्म परायण आत्मा मित्र होती है। मानव अपनी आत्मा को मित्र बनाने का प्रयास करे। क्रोध, मान, माया और लोभ रूपी कषायों से आत्मा को मुक्त रखने का प्रयास हो। जैन शासन के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के 2500 वर्ष के उपलक्ष में दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था, जिसमें गुरुदेव तुलसी भी उपस्थित थे। उस दौरान जैन एकता के एक प्रतीक, एक ध्वज और एक ग्रन्थ की बात भी सामने आई थी।

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दिगम्बर जैनाचार्य प्रणाम सागर महाराज (Jainacharya Pranam Sagar Maharaj) ने कहा कि नवकार महामंत्र ( Navkar Mahamantra) के द्वारा हम सभी जैन हैं। संतों की वाणी से आदमी सौभाग्यशाली बनता है। शासन वोट के द्वारा चलता है और जिन शासन नवकार मंत्र से चलता है। आचार्य महाश्रमण जैसे संतों के साथ समागन बहुत ही सुखद फल देने वाला है। हम सभी को जैन एकता का ध्यान रखना है। इस दौरान उन्होंने स्वरचित अनेक पुस्तकें आचार्यश्री को भेंट की। आचार्यश्री ने भी उन्हें एक पुस्तक उपहृत की।

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दो दिवसीय प्रवास में तेरापंथ युवक परिषद एवं महिला मंडल दादर ने गीत का संगान किया। डालचंद कोठारी, गणपतलाल मारू, स्वागताध्यक्ष नवरतनमल, शैलेश कोठारी, अरविंद धाकड़, अशोक मेहता, छोटूलाल सुराणा, निर्मल भंसाली, इंदु धाकड़, विमला कोठारी ने विचार रखे। कन्या मण्डल ने गीत का संगान किया। तुलसी मानस स्कूल एवं जूनियर कॉलेज के विद्यार्थियों को आचार्यश्री ने ड्रग्स सेवन न करने का संकल्प कराया।

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तेरापंथ समाज दादर के अध्यक्ष गणपत मारू, महामंत्री छोटूलाल सुराणा, कोषाध्यक्ष नीलेश चंडालिया, युवक परिषद अध्यक्ष अरविंद धाकड़, मन्त्री पीयूष खंड़ोर, कोषाध्यक्ष कल्पेश कोठारी, महिला मण्डल संयोजिका इंदु धाकड़, सह संयोजिका सोनू मेहता, कोषाध्यक्ष पूनम कोठारी, दिनेश कोठारी, राजेंद्र कोठारी, निर्मल भंसाली, नितिन बोहरा, ख्यालीलाल कोठारी, पंकज कोठारी, विनोद सियाल, बाबूलाल मांडोत, दिनेश सिसोदिया, इन्द्रमल कोठारी, भूपेंद्र धाकड़, महेंद्र चपलोत, रजत मारू, राकेश लोढ़ा, सुनील मेहता, नितेश भंसाली, मयंक कोठारी, गौरव कोठारी, पंकज चोपड़ा, लोकेश पामेचा, कमलेश भंसाली, विकेश धोका, किशोर मंडल के आगम कोठारी, नीव धाकड़, तत्व भंसाली, भाविन मेहता, स्नेह खंडोर, दीपेश धाकड़, ध्रुव मेहता, कन्या मंडल संयोजिका निशिता धाकड़, सह संयोजिका युक्ता कोठारी, ज्ञानशाला की मीना मेहता, पुष्पा कोठारी, वनिता धाकड़, लता बोहरा, रिंकू भंसाली, ज्योति चपलोत, आशा डूंगरवाल आदि कई कार्यकर्ता प्रवास सफल बनाने में सहयोगी बने।
यह जानकारी सभा के प्रचार मंत्री पंकज कोठारी ने दी।

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आयोजन सहयोगी, राजेंद्र कुमार अशोक कोठारी, स्वागताध्यक्ष परिवार के ममता-नवरत्न, हेमा-शैलेष, पूर्वा-लवीश, मिताली, मिमिक्षा, धनंजय कोठारी परिवार, भोजनशाला प्रायोजक सुशीलादेवी-अर्जुनलाल, केशरदेवी भंवरलाल, पुष्पादेवी-गणपतलाल, कुसुम-सुरेशकुमार धाकड़ परिवार, भोजनशाला प्रायोजक अनीता–नीलेश, युक्ता–यश,अंकुश चंडालिया, विशेष सहयोगी इंद्रचंद, सरोज बैद, गणपतलाल रजत अरहम मारू, विज्ञापन लाभार्थी तेरापंथ महिला मंडल सहित विभिन सहयोगी भूपेंद्र धाकड़, अशोक मेहता, धनपत नाहटा, निर्मल भंसाली, सुरेंद्र चौपड़ा, पंकज चौपड़ा, इंदरमल कोठारी, अशोक चोपड़ा, भरत भंडारी, दिनेश कोठारी, अंतिम कोठारी, बसन्ती मांडोत, बंसीलाल कोठारी, लोकेश पामेचा, दिनेश सिसोदिया, विनोद सियाल, अरविंद सांखला, नितिन बोहरा, रोशन धाकड, डालचन्द कोठारी, राजेन्द्र कोठारी, ख्यालीलाल कोठारी, प्रकाश कोठारी, कमलेश लोढ़ा, सुनील मेहता, अरूण माडोत, निलेश चंडालिया, महेन्द्र चपलोत, राकेश बोहरा, पंकज कोठारी, छोटुलाल सुराणा, संदीप मेहता, अर्जुनलाल धाकड़, भवरलाल धाकड़, गणपत धाकड़, सुरेश धाकड़, सुरेश सांखला, प्रदीप नागौरी, नवरत्न कोठारी, शैलेश कोठारी, ललित बोहरा, दिलीप डागलिया, पीयूष खंडोर, बाबूलाल गांधी, सुभाष चपलोत, धनपत बैद, जयंतीलाल चपलोत,विजय कुमार, चेतन खंडोर, आनंद खंडोर का सम्मान किया गया।
Editorial

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