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बाजारों में चल रहा तेजी का तूफान
By EditorialPublished on
आलोक जोशी: ऐसा अक्सर नहीं होता है, मगर अब अक्सर होने लगा है। एक-दो दिन या एक-दो हफ्ते की ऊंच-नीच को किनारे रख दें, तो आंकड़े चौंकाने वाले ही नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को ध्वस्त करते हुए भी दिख रहे हैं।

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आलोक जोशी: ऐसा अक्सर नहीं होता है, मगर अब अक्सर होने लगा है। एक-दो दिन या एक-दो हफ्ते की ऊंच-नीच को किनारे रख दें, तो आंकड़े चौंकाने वाले ही नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही धारणाओं को ध्वस्त करते हुए भी दिख रहे हैं। बुजुर्गवार बताते थे कि जब शेयर बाजार तेज होता है, तो सोना गिरता है, और जब सोना गिरता है, तब बाजार भागता है। कुछ- कुछ ऐसे ही रिश्ते प्रॉपर्टी बाजार, शेयर बाजार, बॉन्ड बाजार, कच्चे तेल जैसी चीजों के कारोबार के बीच भी जोड़े जाते रहे हैं, लेकिन जब निफ्टी 21,000 पर दस्तक दे रहा था, उसी वक्त सोना 60,000 रूपये के पार पहुंच गया। भारत के अलग- अलग हिस्सों में प्रॉपर्टी के दाम में तो जबर्दस्त उछाल दिख रहा है। कोरोना काल में अचानक गिरावट के बाद से प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी शुरू हुई और अब इसकी रफ्तार बढ़ती ही जा रही है। इस साल की पहली तिमाही में पिछले साल के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत घर ज्यादा बिके हैं, लेकिन जितना बड़ा घर, उतनी ज्यादा मांग।
बेहद महंगे, यानी सुपर लग्जरी फ्लैटों और घरों के सौदों का आंकड़ा बताता है कि देश के सात बड़े शहरों में जनवरी से मार्च के बीच ऐसे घरों के सौदे पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले करीब 150 प्रतिशत ज्यादा हुए हैं। नेशनल हाउसिंग बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वर्ष में जुलाई से सितंबर के बीच देश के 41 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत में तेज उछाल देखने को मिली है।
शेयर बाजार एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ रहा है और सोना भी उसके साथ कदमताल करता दिखा है। इन दामों में कुछ नरमी आ सकती है, लेकिन जिस दौर में हम यह चर्चा कर रहे हैं, वह मामूली वक्त नहीं है। आज दिल्ली या मुंबई में किसी पांच सितारा होटल के लग्जरी या प्रीमियम कमरे में एक रात गुजारने के लिए एक लाख से दस लाख रूपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे सस्ते कमरे भी हैं, पर किसी भी दिन अचानक पूरे शहर में किसी भी होटल में कमरा मिलना असंभव हो जाता है। अभी क्रिकेट विश्व कप के दौरान अहमदाबाद में होटल का किराया तीन से चार लाख रूपये तक पहुंच गया और सयाने लोगों ने चिकित्सा जांच के नाम पर अस्पतालों में कमरे बुक करवा डाले ।
होटल के किराये पर एक पुरानी मिसाल अभी हाल में किसी ने याद दिलाई। पिछली सदी की शुरूआत में जब टाटा ने ताज होटल बनाया, तो उसके कमरे का किराया 20 रू. रोज था । तब 19 रूपये में 32 ग्राम सोना मिल जाता था। लगभग 120 साल बाद अब अगर दस ग्राम सोने का दाम 60 हजार रूपये तक पहुंच गया है, तो उसी कमरे का किराया दो लाख रूपये तक जाने पर हैरानी नहीं होनी चाहिए, पर इस बात पर आगे बढ़ने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर चल क्या रहा है?
इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए भारत से बाहर, सात समुंदर पार, अमेरिका का हाल समझना जरूरी है, क्योंकि इस पूरी गुत्थी की कुंजी तो वहीं है। हर बाजार में नकदी की जो बाढ़ दिख रही है, उसका स्त्रोत अमेरिका में ही है, और अभी तो यह अंगड़ाई है... मतलब कोरोना के दौर में जिस तरह अमेरिका ने नोट छाप छापकर पूरी दुनिया में पैसा बहा रखा था, वे दिन फिर याद आ सकते हैं। इस बात की प्रबल संभावना है कि अमेरिका एक बार फिर नकदी का नल खोल सकता है।
इस किस्से की एक महत्वपूर्ण तारीख थी 19 अक्तूबर । यह अमेरिकी बॉन्ड बाजार के लिए एक बड़ा दिन था, लेकिन ऐसा बड़ा दिन, जिसके बाद दिन छोटे होने शुरू हो जाते हैं। अमेरिकी सरकार बाजार से कर्ज उठाने के लिए जो बॉन्ड या ट्रेजरी बिल जारी करती है, उन पर मिलने वाले ब्याज की दर काफी तेजी से बढ़कर उसी दिन दो दशक के नए शिखर पर पहुंची थी। अमेरिकी सरकार का दस साल का बॉन्ड बाजार में किस भाव पर जाता है, इससे न सिर्फ वहां की ब्याज दरों का हाल दिखता है, बल्कि उसी के आधार पर दुनिया भर में तमाम तरह के निवेश के फैसले भी होते हैं। इस बॉन्ड को दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसीलिए अगर इस पर अच्छा ब्याज मिलने लगे, तो फिर शेयर बाजार, सोने या दूसरे किसी भी बाजार से पैसा निकलकर बॉन्ड की तरफ भागने लगता है। यही वजह है कि इसकी दर बढ़ने से न सिर्फ अमेरिका, बल्कि दुनिया भर के बाजार में हाहाकार मच गया। जाहिर है, सबसे सुरक्षित निवेश में अच्छा रिटर्न मिलेगा, तो फिर जोखिम वाले बाजार में कोई क्यों पैसा लगाएगा?
हालांकि, उस तगड़े झटके के बाद से हालात फिर तेजी से बदल गए। अमेरिका के सरकारी बॉन्ड पर ब्याज की दर में तेज गिरावट आई और एक बार फिर जोखिम वाले बाजारों की लॉटरी लग गई। अमेरिका में ब्याज दरें घटने की उम्मीद भर से शेयर बाजारों की दिवाली हो जाती है। यों क्रिसमस के पहले बाजार ठंडा होने लगता है, लेकिन इस बार तो क्रिसमस के काफी पहले ही जश्न गया और इसी का फायदा भारत के शेयर बाजार, सोने-चांदी के भाव और प्रॉपर्टी तक के भाव में दिख रहा है।
अब दूसरा सवाल है कि क्या भारत के तमाम बाजारों में तेज उछाल के साथ-साथ होटल और हवाई उड़ानों के किराये भी बढ़ने की वजह सिर्फ अमेरिकी पैसा है? इसका जवाब दो आंकड़ों में मिल सकता है। नीति आयोग एक 'विजन डॉक्यूमेंट' बना रहा है, जिसका शुरूआती निष्कर्ष है कि अगले 25 साल में, यानी 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 30 लाख करोड़ डॉलर, यानी अभी के मुकाबले करीब दस गुना हो सकता है। हर भारतीय के हिस्से में आने वाली रकम भी इसी अनुपात में दस गुना हो जाएगी।
बस अब जरा सोचिए, अगर आपकी आमदनी या आपके आसपास सभी की आमदनी 25 साल में दस गुना होने वाली है, तब तक क्या-क्या हो जाएगा ! भारत के अनेक बाजार में जो तेजी का तूफान दिख रहा है, उसमें हवा भरने का काम शायद यही भरोसा कर रहा है, लेकिन तब एक बहुत बड़ी चुनौती भी सामने खड़ी हो रही है। यहां बहुत कुछ सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा । सरकारों को सोचना चाहिए कि क्या अमीर और गरीब की आमदनी एक ही अनुपात में बढ़ने वाली है?

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