Pratahkal-Acharya Mahashraman
मुंबई। आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने बुधवार को अपनी धवल सेना के साथ बान्द्रा पश्चिम से प्रस्थान कर बान्द्रा ईस्ट में एल.एस. राहेजा स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर पहुंचे। यहाँ उन्होंने कहा कि यह पुरुष अनेक चित्तों वाला होता है। मानव का मन घोड़े के समान तीव्र वेग से दौड़ने वाला है। गलत विचारों के कारण चित्त रूपी अश्व उत्पथ में भी चला जाता है। एक ही मानव के चित्त में कभी बड़ा वात्सल्य, करुणा के भाव उमड़ते हैं, तो कभी गुस्से का भाव भी आ जाता है। कभी प्रेम तो कभी द्वेष के भाव आ जाते हैं। उसी आदमी के मन में कभी अच्छे और नेक विचार भी आते हैं तो वही आदमी किसी का अहित, बुरा करने, दूसरे के नुक्सान करने का प्रयास भी कर लेता है। मनुष्य को शुभ भावों में रहने का प्रयास करना चाहिए। मनुष्य का मन ही बन्धन और मन ही मोक्ष का कारण बनता है। इसलिए आदमी को अपने मन के भावों को शुद्ध रखने का प्रयास करना चाहिए। कई बार आदमी बाहर से बड़ा स्नेह, आदर का प्रदर्शन करता है, किन्तु भीतर में छल, कपट, नुक्सान और बुरा करने की भाव होती है। ऐसे बुरे विचारों का त्याग कर आदमी को अपनी कथनी और करनी को समान बनाने का प्रयास करना चाहिए। मन निर्मल हो, भावधारा शुभ हो तो जीवन का कल्याण हो सकता है।
स्थानीय तेरापंथी सभाध्यक्ष मदनलाल चपलोत, स्वागताध्यक्ष जितेन्द्र परमार, युवक परिषद् अध्यक्ष महेश चपलोत व मुकेश नौलखा ने विचार रखे। महिला मण्डल ने गीत का संगान किया। किशोर मण्डल व कन्या मंडल ने ‘मेमोरी ऑफ मुम्बई चतुर्मास’ को प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में तारक मेहता का उल्टा चश्मा धारावाहिक में कार्य करने वाली टप्पू सेना के कलाकार भी उपस्थित हुए।
Editorial

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