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संस्कारों का बीजारोपण करेगा दिलीप नाबेड़ा मेवाड़ होस्टल
By EditorialPublished on
अंबेश सौभाग्य मेवाड़ चेरिटेबल ट्रस्ट गोरेगांव द्वारा अंधेरी पूर्व स्थित दिलीप नाबेड़ा मेवाड़ होस्टल (Dilip Nabeda Mewad Hostel) में उच्च शिक्षा के लिए मुंबई आने वाले छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया साक्षात्कार के माध्यम से शुरू हुई। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। विभिन्न क्षेत्र से आए छात्रों का ट्रस्ट अध्यक्ष दिलीप नाबेड़ा, महामंत्री सुरेश आंचलिया, कोषाध्यक्ष बसन्ती चपलोत, शिक्षा समिति सदस्य नवरत्न सोनी, महेश डागलिया, रमेश कुकडा व पारस बाफना ने अमृत जैन तथा योगेन्द्र खैरानी के नेतृत्व में साक्षात

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मुंबई । अंबेश सौभाग्य मेवाड़ चेरिटेबल ट्रस्ट गोरेगांव द्वारा अंधेरी पूर्व स्थित दिलीप नाबेड़ा मेवाड़ होस्टल (Dilip Nabeda Mewad Hostel) में उच्च शिक्षा के लिए मुंबई आने वाले छात्रों को प्रवेश देने की प्रक्रिया साक्षात्कार के माध्यम से शुरू हुई। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण से हुई। विभिन्न क्षेत्र से आए छात्रों का ट्रस्ट अध्यक्ष दिलीप नाबेड़ा, महामंत्री सुरेश आंचलिया, कोषाध्यक्ष बसन्ती चपलोत, शिक्षा समिति सदस्य नवरत्न सोनी, महेश डागलिया, रमेश कुकडा व पारस बाफना ने अमृत जैन तथा योगेन्द्र खैरानी के नेतृत्व में साक्षात्कार लिया। पहले चरण में 39 छात्रों का साक्षात्कार लिया जिसमें से 34 छात्रों को प्रवेश दिया गया। छात्रावास की क्षमता आने वाले समय में 180 हो जायेगी।
श्रमण संघीय महामंत्री सौभाग्य मुनि मसा की 87वीं जन्म जयंती 10 दिसंबर से शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया में ट्रस्ट मंडल सदस्यों सहित दानदाताओ व लाभार्थियों की उपस्थिति रही। सभी ने होस्टल सुविधाओं का अवलोकन करते हुए संचालक मंडल के कार्यों की प्रशंसा की। प्रवेश कार्यक्रम के साथ ही भोजनशाला की भी शुरुआत विधि विधान के साथ की गई। ट्रस्ट मंडल अध्यक्ष दिलीप नाबेड़ा ने कहा कि आज का दिन समाज के लिए गौरवशाली दिन है। जो सपना हम सभी ने 5 वर्ष पूर्व देखा था वह आज पूरा हुआ है। नाबेड़ा ने सभी ट्रस्टियों, दानदाताओ के साथ छात्रों का स्वागत करते हुए कहा कि यह होस्टल घर से दूर एक घर है, जहां पर घर जैसा ही माहौल मिलेगा तथा अनुशासन में रहते हुए छात्रों को सभी नियम कानूनों का पालन पूरी ईमानदारी से करना होगा। यह आवासीय हॉस्टल लौकिक शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का भी बीजारोपण करेगा। यह जानकारी उपाध्यक्ष भगवती पोखरणा ने दी।

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