✕
कनाडा आतंकवाद का केंद्र बन रहा
By EditorialPublished on
मैंने कई बार देखा है कि जो देश आतंकवाद (terrorism) को बढ़ावा देता है या उसे सहन करता है, वह संकट में फंस जाता है । उदाहरण के लिए सूडान (sudan), लीबिया (Libya), पाकिस्तान (Pakistan), अफगानिस्तान (Afghanistan), सोमालिया (Somalia), नेपाल (Nepal) आदि को देखा जा सकता है। इसका सबसे नवीनतम उदाहरण कनाडा (Canada) है, जहां का नस्लीय नियंत्रण गैर-श्वेत प्रवासियों को पूर्ण लाभ लेने से वंचित करता है। हमें उम्मीद थी कि कनाडा अलगाव की किसी भी बात के प्रति बहुत संवेदनशील होगा, खासकर 1995 के क्यूबेक स्वतंत्रता से संबंधित जन

x
दीपक वोहरा: मैंने कई बार देखा है कि जो देश आतंकवाद (terrorism) को बढ़ावा देता है या उसे सहन करता है, वह संकट में फंस जाता है । उदाहरण के लिए सूडान (sudan), लीबिया (Libya), पाकिस्तान (Pakistan), अफगानिस्तान (Afghanistan), सोमालिया (Somalia), नेपाल (Nepal) आदि को देखा जा सकता है। इसका सबसे नवीनतम उदाहरण कनाडा (Canada) है, जहां का नस्लीय नियंत्रण गैर-श्वेत प्रवासियों को पूर्ण लाभ लेने से वंचित करता है। हमें उम्मीद थी कि कनाडा अलगाव की किसी भी बात के प्रति बहुत संवेदनशील होगा, खासकर 1995 के क्यूबेक स्वतंत्रता से संबंधित जनमत संग्रह पारित होने के बाद, लेकिन उसके दोहरे मानदंड लगातार दिख रहे हैं। वह कानून के शासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपदेश देता है, फिर भी 1970 में मौजूदा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Prime Minister Justin Trudeau) के पिता सीनियर ट्रूडो ने युद्ध उपाय अधिनियम लागू किया और क्यूबेक अलगाववादी आंदोलन को कुचलने के लिए टैंक भेजे ।
हाल के वर्षों में कनाडाई नागरिकों द्वारा अंजाम दी जा रही भारत विरोधी घटनाओं के प्रति वहां की सरकार की सहनशीलता हमारे द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित करती है। कनाडा ने 1974 में हमारे परमाणु परीक्षण के कुछ ही दिनों बाद हमारी परमाणु इकाइयों को सहायता देना रद्द कर दिया था। उसके बाद हमारे रिश्ते ठंडे पड़ गए।
चालीस साल पहले जब कनाडाई आतंकवादियों ने एअर इंडिया के एक विमान को उड़ा दिया था, जिसमें सैंकड़ों लोग मारे गए थे, तो हमने दोषियों के नाम बताकर कनाडा से उन्हें पकड़वाने में मदद करने की अपील की थी। उस समय मौजूदा प्रधानमंत्री के पिता सत्ता में थे और उन्होंने जांच को विफल करना सुनिश्चित किया । और सिर्फ एक व्यक्ति को कथित रूप से कुछ साल की जेल की सजा दी गई। यह महसूस करते हुए कि कनाडा आतंकवाद के प्रति नरम है, वहां हर धर्म के कट्टरपंथी इकट्ठा होने लगे । इस तरह कनाडा आतंकवाद का प्रमुख केंद्र बन गया।
भारत ने जब आर्थिक उदारीकरण लागू किया, तो वर्ष 1996 में कनाडाई प्रधानमंत्री व्यापार की तलाश में 300 व्यवसायियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए भारत आए । लेकिन वह दौरा विफल हो गया। भारत ने आतंकवाद विरोधी एक कार्यसमूह की स्थापना की, जिसे कनाडा ने भुला दिया। 2012 में भारत दौरे पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री को खालिस्तान के प्रति सहानुभूति के कारण आधिकारिक रात्रिभोज पर नहीं बुलाया गया ।
वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा का दौरा किया था, जो 42 वर्षों में इस तरह का पहला दौरा था और कनाडा हमें यूरेनियम बेचने पर सहमत हुआ था । इससे जिन लोगों को उम्मीद थी कि अतीत के गिले-शिकवे दूर हो जाएंगे, उन्हें जल्दी ही निराश होना पड़ा। कनाडा में जब जस्टिन ट्रूडो प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने एक कट्टरपंथी सिख पार्टी के समर्थन से अल्पमत की सरकार बनाई, जिसके चलते उन्हें एक सिख आतंकवादी और नशे के कारोबारी को रक्षामंत्री बनाना पड़ा। इसी साल वहां के प्रधानमंत्री ने अपनी संसद को अपने प्रिय आतंकवादी की हत्या में भारतीय संलिप्तता का आरोप लगाकर द्विपक्षीय रिश्ते को नुकसान पहुंचाया है। हालांकि इस पर कनाडा ने अब तक कोई सबूत पेश नहीं किया है, लेकिन भारत से सहयोग की अपेक्षा करता है।
भारतीय मूल के कनाडाई भारतीय राजनयिक परिसरों, हिंदू पूजा स्थलों और हिंदी फिल्म दिखाने वाले सिनेमाघरों पर हमले करते हैं। चूंकि हमारे राजनयिक सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे थे, इसलिए भारत ने कनाडा के लोगों के लिए वीजा निलंबित कर दिया। जब जस्टिन ट्रूडो ने भारत की शिकायत की, तो भारत के विदेश मंत्री या विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उसका जवाब दिया। भारत की तीखी प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने कनाडा के भारत (india) के साथ सक्रिय जुड़ाव बनाए रखने के महत्व पर जोर देना शुरू किया। फिर बीते नवंबर में अमेरिकियों ने कहा कि वे अपने एक नागरिक (एक कनाडाई नागरिक, वांछित आतंकवादी और स्पष्ट रूप से सीआईए एजेंट) की लक्षित हत्या को रोकने में कामयाब रहे। बस फिर क्या था, ट्रूडो खुशी से नाचने लगे। कनाडाई और अमेरिकी उस आतंकवादी से इतना प्यार करते हैं कि वे आतंकवाद के उसके खुले वादे का स्वागत करते हैं । जस्टिन भूल रहे हैं कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज वाणिज्य और सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक क्षेत्र है, जिसका आधार भारत है। इसलिए कोई भी देश दूसरे की खातिर भारत के साथ अपने संबंध खराब नहीं करना चाहेगा। सीमित द्विपक्षीय व्यापार में कनाडा के पास हमारी प्राथमिकता के क्षेत्र में देने के लिए बहुत ज्यादा चीजें नहीं हैं।
कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों में निवेशक, उद्योगपति और व्यवसायी अत्यधिक कुशल 'शिक्षक' से लेकर कम- कुशल 'सेवाकर्मी' और छात्र शामिल हैं। दोनों देशों के रिश्तों में खटास आने के बाद भारतीय शैक्षणिक सलाहकार 3 लाख 20 हजार से ज्यादा छात्रों को कहीं और जाकर शिक्षा लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, क्योंकि यह निश्चित नहीं है कि स्नातक करने के बाद उन्हें वहां वर्क परमिट मिल जाएगा। सोशल मीडिया पर ऐसे भयावह पोस्ट आ रहे हैं कि भारतीय छात्र वहां गहरे संकट में हैं । छात्राओं को अवांछनीय गतिविधियों में धकेला जा रहा है और आत्महत्याएं भी हो रही हैं। भारतीय छात्र मुख्य रूप से मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों से हैं, जो नस्ली भेदभाव के कारण हाशिये पर चले जाते हैं, इसलिए आतंकवादियों के लिए आसान शिकार होते हैं।
भारत ने कनाडाई नागरिकों के लिए वीजा निलंबित करने के साथ-साथ ओटावा को नई दिल्ली में अपने मिशन का आकार सही करने के लिए मजबूर किया है। इसके अलावा खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। चाहे वे कहीं भी हों, उनकी संपत्ति जब्त कर ली गई है, उनके ओसीआई कार्ड रद्द कर दिए गए हैं और उनके बैंक खातों को सील कर उनका नाम दुनिया को बता दिया गया है।
भारत और कनाडा के रिश्तों में आतंकवाद एक प्रमुख विषय रहा है। जब 2018 में जस्टिन ट्रूडो भारत दौरे पर आए थे, तो पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उन्हें पंजाब में आतंकी गतिविधियों में लिप्त कनाडाई आतंकवादियों की एक सूची सौंपी थी। लेकिन उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया। कनाडा पश्चिमी देशों का पिछलग्गू है, न कि वैश्विक ताकत। कनाडा इस्लामी और सिख कट्टरपंथ के साथ खेल रहा है, पर उसे अंदाजा नहीं है कि शीघ्र ही इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा ।

Editorial
Next Story
Related News
X
