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समवशरण से हुई मुनि श्री की दिव्य देशना
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अतिशय क्षेत्र अडिंदा पार्श्वनाथ (atishay kshetra adinda parshvanath) में दिगंबर जैन मुनि (Digambar Jain monk) आदित्य सागर महाराज, मुनि अमित सागर महाराज मुनि सहज सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में सोधर्म इंद्र पवन - अलका कोठारी, धनपति कुबेर अपूर्व नेहा भावित श्रेया कोठारी परिवार भीलवाड़ा की ओर से आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव (Panchkalyanak Pratistha Mahotsav) में सोमवार को ज्ञान कल्याणक मनाया गया।
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खेरोदा ( प्रातःकाल संवाददाता) । अतिशय क्षेत्र अडिंदा पार्श्वनाथ (atishay kshetra adinda parshvanath) में दिगंबर जैन मुनि (Digambar Jain monk) आदित्य सागर महाराज, मुनि अमित सागर महाराज मुनि सहज सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में सोधर्म इंद्र पवन - अलका कोठारी, धनपति कुबेर अपूर्व नेहा भावित श्रेया कोठारी परिवार भीलवाड़ा की ओर से आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव (Panchkalyanak Pratistha Mahotsav) में सोमवार को ज्ञान कल्याणक मनाया गया।
प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी अक्षय भैया , पीयूष भैया के निर्देशन में जाप्य अनुष्ठान, श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा, नित्यपूजन, तप कल्याणक विधान हुआ । धर्म सभा में मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा कि संसार में कोई व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसका कोई शत्रु नहीं हो। इसलिए व्यक्ति को विकल्प को छोड़कर गुरु सेवा, जिनवाणी प्रकाशन, दान धर्म आदि में सलग्न रहकर कल्याण करना चाहिए। मुनि आदित्य सागर महाराज ने कहा कि मोक्ष मार्ग बड़ा कठिन है जीवन में सुख दुख के कई निम्मित आएंगे लेकिन प्रभावित नहीं होना। अनिल स्वर्णकार ने बताया कि धर्मसभा के बाद राजा श्रेयांस के यहा तीर्थंकर मुनिराज की आहारचर्या हुई । दोपहर में समवशरण (Samavashran) पट्ट का उदघाटन, समवशरण से मुनिश्री की दिव्य देशना चतुर्निकाय देवों का आगमन और मुनि श्री द्वारा आगम सम्मत जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

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