Developed India-2047
जयपुर ( कासं ) । राज्यपाल कलराज मिश्र ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का आह्वान किया है कि 'विकसित भारत - 2047 (Developed India-2047) के लिए शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न अन्य क्षेत्रों में 8 से 9 क्षेत्रों की प्राथमिकताएं तय कर प्रतिशत तक की विकास दर से उन पर अभी से कार्य प्रारंभ देश को आगे बढ़ाने की किया जाए। राज्यपाल मिश्र ने आवश्यकता है। इसके लिए सोमवार को राजभवन में उन्होंने समावेशी विकास, अंतिम छोर तक विकास की पहुंच, बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुए निवेश प्रोत्साहन और कौशल विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण में युवा शक्ति की अधिकाधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत की वैश्विक भूमिका के लिए विभिन्न क्षेत्रों की प्राथमिकताएं तय कर उन पर अभी से कार्य प्रारंभ किया जाए। राज्यपाल मिश्र ने सोमवार को राजभवन में 'विकसित भारत 2047' में सहभागिता की समूह चर्चा और 'वॉयस ऑफ यूथ' कार्यशाला में संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को उच्च शिक्षा क्षेत्र को सुदृढ़ करते हुए सशक्त और संपन्न भारत के लिए कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवा वर्ग ही देश के विकास के रथ के असली सारथी होते हैं।
उन्हें विकसित भारत की सोच से अधिकाधिक जोड़ा जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ऐसे पाठ्यक्रम निर्मित करने की आवश्यकता जताई जिससे युवाओं को कौशल संपन्न करने के साथ ही उनकी भविष्य की दृष्टि को विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमे हमारे यहां ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए जिससे दूसरे देशों के विद्यार्थी भी भारत आकर पढ़ने के लिए प्रेरित हों। मिश्र ने आजादी के सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 2047 तक शिक्षा व्यवस्था का पुनर्निर्माण करने, विदेश के अधिक से अधिक युवाओं को भारतीय विश्वविद्यालयों में पढ़ने आने के लिए प्रेरित करने और उच्च शिक्षा में शोध और अनुसंधान की मौलिक दृष्टि के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने अमेरिका, यूके, जापान, जर्मनी, सिंगापुर, साउथ कोरिया आदि देशों की शिक्षा प्रणालियों का अध्ययन कर 2047 में विकसित भारत में युवाओं की प्रत्यक्ष भूमिका सुनिश्चित करने के लिए भी सभी स्तरों पर कार्य करने का भी आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2027 तक भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इसकी पूर्ति में शिक्षा क्षेत्र की बहुत बड़ी भूमिका है।
Editorial

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