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उदयनिधि पर ऐक्शन क्यों नहीं?
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उदयनिधि (Udayanidhi) द्वारा सनातन धर्म (sanatan dharma) को खत्म करने वाले बयान पर मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने टिप्पणी की है। कोर्ट ने इस मामले में ऐक्शन न लेने को लेकर पुलिस को आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (mk stalin) के बेटे और दो सितंबर को स्टेज पर मौजूद रहे सेकर बाबू पर पुलिस द्वारा कार्रवाई न करना ड्यूटी में लापरवाही है। वहीं, एक शख्स ने कोर्ट में याचिका दायर कर सम्मेलन आयोजित करने और उसमें द्रविड़ सभ्यता को खत्म करने का बयान जारी करने की इजाजत मां

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चेन्नई (एजेंसी)। उदयनिधि (Udayanidhi) द्वारा सनातन धर्म (sanatan dharma) को खत्म करने वाले बयान पर मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने टिप्पणी की है। कोर्ट ने इस मामले में ऐक्शन न लेने को लेकर पुलिस को आड़े हाथों लिया है। कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (mk stalin) के बेटे और दो सितंबर को स्टेज पर मौजूद रहे सेकर बाबू पर पुलिस द्वारा कार्रवाई न करना ड्यूटी में लापरवाही है। वहीं, एक शख्स ने कोर्ट में याचिका दायर कर सम्मेलन आयोजित करने और उसमें द्रविड़ सभ्यता को खत्म करने का बयान जारी करने की इजाजत मांगी है।
हालांकि जस्टिस जी जयचंद्रयन ने इस याचिका को खारिज कर दिया है और कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन को इजाजत नहीं दी जा सकती। इन सबके बीच उदयनिधि, जो कि तमिलनाडु सरकार में खेल मंत्री हैं, अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया और जो भी कानूनी कार्रवाई होगी उसका सामना करूंगा।
कोर्ट में आई याचिका
याचिका करने वाले शख्स का नाम मागेश कार्तिकेयन है, जो चेन्नई का रहने वाला है। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि इस तरह मीटिंग का आयोजन उसका फंडामेंटल राइट है। इस पर मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी जयचंद्रन ( Justice G Jayachandran) ने कहा कि देश में किसी को भी बांटने वाले विचार को आगे बढ़ाने की इजाजत नहीं है। इसके अलावा किसी भी विचारधारा को मिटाने या खत्म करने के लिए किसी मीटिंग की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा विभिन्न और अलग-अलग विचारधाराओं का सह-अस्तित्व ही इस देश की पहचान है। यह आदेश 31 अक्टूबर को जारी किया गया। जस्टिस ने कहा कि अगर याचिका की मांग स्वीकार कर ली जाती है तो आने वाले वक्त में यह आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनेगी। उन्होंने कहा कि पहले ही कुछ लोग संविधान की मूल भावना की रक्षा की शपथ लेकर भी इसकी धज्जियां उड़ा रहे हैं।

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