Telangana Assembly Elections
नई दिल्ली (एजेंसी)। तेलंगाना विधानसभा चुनाव (Telangana Assembly Elections) के नामांकन (Enrollment) की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही सूबे का चुनावी परिदृश्य (Election Scenario) अब राजनीतिक गोलबंदी (Political Mobilization) के दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। अलग तेलंगाना राज्य के गठन के सबसे बड़े चेहरे बीआरएस नेता मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (Chief Minister K. Chandrashekhar Rao) की सियासी पूंजी में कांग्रेस (Congress) ने सेंध लगा दी है। लंबे समय तक बीआरएस के साथ रहीं तेलंगाना आंदोलन से जुड़ी पार्टियां ही नहीं, कई संगठन भी इस चुनाव में केसीआर को छोड़कर कांग्रेस (Congress) का समर्थन करने का एलान कर रहे हैं। तेलंगाना जन समिति का कांग्रेस (Congress) के समर्थन में चुनाव न लड़ने के एलान से लेकर अलग राज्य की मांग करने वाले सबसे बड़े आंदोलनकारी चेहरों में रहे चर्चित लोक गायक दिवंगत गदर की वेटी का कांग्रेस (Congress) के टिकट पर चुनाव लड़ने का फैसला वीआरएस की इस सियासी पूंजी के दरकने का साफ संकेत माना जा रहा है।
तेलंगाना आंदोलन के सूत्रधार होने के नाते वेशक केसीआर को अलग राज्य के निर्माण का सबसे बड़ा श्रेय मिला और पिछले दो विधानसभा चुनावों में वीआरएस की जीत की मुख्य वजह यही रही। लेकिन, राज्य के तीसरे आम चुनाव में सत्ता विमर्श की तेज हुई हवाओं ने तेलंगाना आंदोलन में केसीआर के साथ रहे लोगों को विपक्षी विकल्प की धुरी बनी कांग्रेस (Congress) की ओर मुखातिब कर दिया है। तेलंगाना जन समिति के अध्यक्ष कोदंडराम ने पिछले दिनों चुनाव न लड़ने और कांग्रेस का खुला समर्थन करने की घोषणा कर दी। कोदंडराम अलग तेलंगाना राज्य के लिए सभी पार्टियों की ओर से गठित संयुक्त एक्शन कमेटी के अध्यक्ष रहे। इसी तरह नए राज्य के निर्माण की गूंज पूरे सूबे में जन- जन तक पहुंचाने वाले लोक कवि जी विठ्ठल राव उर्फ गदर का भी केसीआर से मोह भंग हो गया था और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी मुलाकात भी हुई थी। हालांकि, चुनाव से कुछ महीने पहले गदर का निधन हो गया, लेकिन कांग्रेस ने उनकी बेटी जीवी वेनेला को सिकंदराबाद कैंट से उम्मीदवार बनाकर तेलंगाना आंदोलन की एक मुखर आवाज के समर्थकों को साधने का बड़ा दांव चल दिया है। तेलंगाना में हो रही यह गोलबंदी इसलिए भी दिलचस्प होती जा रही है कि कई छोटी पार्टियों ने पिछले एक हफ्ते के दौरान कांग्रेस का समर्थन करने और चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है।
Editorial

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