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वेन्कूवर 08 : विसलर - उत्तरी अमेरिका का सबसे बड़ा स्किंग रिसोर्ट
By EditorialPublished on
वेन्कूवर Vancouver : अगले दिन 23 अग, हो गया था। वेनकूवर में हमारा यह तीसरा दिन था। सुबह जल्दी ही हम विसर के लिये निकलने वाले थे इसलिये जितेन्दर ने हमारे उठने से पहले ही नाश्ता तैयार कर लिया था। उसने मीठे चावल बनाये थे। ये एकदम केसरिया भात जैसे थे। बसन्त पंचमी पर हमारे घरों में केसरिया भात बनता ही है, इसके अलावा शादी के बाद जब बहू घर में आती है तब भी यह बनाया जाता है। जितेन्दर ने मीठे चावलों का रंग बजाय केसरिया के गुलाबी कर दिया था, स्वाद इनका बिल्कुल केसरिया भात जैसे ही था। मेवाड़ के पवित्र धाम चारभुजाजी मे

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वेन्कूवर Vancouver : अगले दिन 23 अग, हो गया था। वेनकूवर में हमारा यह तीसरा दिन था। सुबह जल्दी ही हम विसर के लिये निकलने वाले थे इसलिये जितेन्दर ने हमारे उठने से पहले ही नाश्ता तैयार कर लिया था। उसने मीठे चावल बनाये थे। ये एकदम केसरिया भात जैसे थे। बसन्त पंचमी पर हमारे घरों में केसरिया भात बनता ही है, इसके अलावा शादी के बाद जब बहू घर में आती है तब भी यह बनाया जाता है। जितेन्दर ने मीठे चावलों का रंग बजाय केसरिया के गुलाबी कर दिया था, स्वाद इनका बिल्कुल केसरिया भात जैसे ही था। मेवाड़ के पवित्र धाम चारभुजाजी में भी केसरिया भात का ही भोग चढ़ता है। गुलाबी चांवल अपना अलग ही आकर्षण बना रहे थे। स्वाद चिर परिचित था।
विसलर वेनकूवर से 120 कि.मी. दूर स्थित है। यह समूचे अमेरिका और कनाडा का सबसे बड़ा स्किंग रिसोर्ट है। अक्सर टी वी पर बर्फ के पहाड़ों में स्किंग के खतरनाक करतब व प्रतियोगिताएं देखते रहते हैं, उनमें से कई यहीं आयोजित होती है। 2010 के विन्टर ओलम्पिक्स यहीं आयोजित हुए थे। स्किंग के अलावा स्नो बोर्डिंग, स्नो होइंग, टोबोगेगिंग व स्की जम्पिंग जैसी प्रतियोगिताओं के लिये यहां का ओलम्पिक पार्क प्रसिद्ध है।
मुझे तो पता भी नहीं था कि इतनी महत्वपूर्ण जगह जा रहे हैं। फोन पर भारत में महीप को बताया तो उसने कहा कि यह तो गजब की जगह है। कोई वेनकूवर में आये और विसलर नहीं जाये तो उसका आना नहीं आना बराबर ही है। विसलर के लिये नियमित शटल चलती है मगर कुलवन्त ने कहा कि अपन गाड़ी लेकर ही चलेंगे, रास्ते में जहां मर्जी आये रूक तो सकेंगे।
जितेन्दर ने सबको भरपेट नाश्ता करा दिया और साथ बांधने भी लगी मगर राजा ने मना कर दिया कि वहां किसी बढिया रेस्टोरेन्ट में खायेंगे। कुलवन्त ने अपनी एस.यू.बी. निकाली और हम चल पड़े। सुबह का वक्त था इसलिये सड़कें सुनसान ही थी। जल्द ही हम शहरी क्षेत्र से निकल कर वन क्षेत्र में आ गये। दोनों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़ों के बीच से गुजरती हाईवे पर चलते हुए घर जैसी अनुभूति हो रही थी। हाईवे पर एक साथ कई कि.मी. तक सड़क का निर्माण चल रहा था फिर भी ट्राफिक किसी तरह बाधित नहीं हो रहा था। विसलर पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है इसलिये ट्राफिक भरपूर था। फोर वे सड़क थी, जाने वाली सड़क निर्बाध थी मगर आने वाली सड़क के आधे हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा था। कुलवन्त ने निर्माण की तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि किस तरह सड़क खोदने से लेकर, पुनर्निर्माण और कारपेंटिंग तक समूचा कार्य एक साथ हो रहा था। मैं यह देख कर दंग रह गया। वाकई एक मशीन सड़क खोदे जा रही थी, दूसरी मशीन इस मलबे को साफ कर वापस उसे डामर के साथ सड़क में दबाए जा रही थी, इसके बाद कारपेंटिंग और फिर रौलर हाथों हाथ सड़क बनती जा रही थी। देखते देखते हम आगे बढ़े तो मीलों तक नई सड़क बनी हुई नजर आई। ये मशीनें सड़क को बनाते हुए ही आगे बढ़ रही थी। सड़क निर्माण का एसा त्वरित कार्य देख कर लगा कि हमारे यहां भी इस स्तर पर काम होने शुरू हो जाए तो काफी पता आ सकती है।
हम जिस क्षेत्र से गुजर रहे थे वह घना जंगल था और यहां अक्सर आग लगने की संभावनाएं रहती है। जगह जगह बोर्ड लगे हुए थे जिसमें लोगों को आग नहीं जगाने की चेतावनी दी गई थी। यहां एक बोर्ड पर चिन्हित था कि इस क्षेत्र में आग लगने की अत्यधिक संभावनाएं हैं। बोर्ड पर, कम, साधारण, उच्च व अत्यधिक सभावनाएं अंकित थी। इनमें से अत्यधिक पर टिक लगा हुआ था। पूरे वी.सी. में हर साल औसतन दो हजार दावानल लगते हैं। राज्य का अग्निशमन विभाग इतना कुशल है कि 24 घन्टे के अन्दर आग पर काबू पा लिया जाता है। शुष्क मौसम में अब पेड़ों के पत्ते सूख जाते हैं और तेज हवाएं चलती है तब सुक्ष्म से सूक्ष्म चिनगारी भी दावानल का विकराल रूप धारण कर सकती है। अग्निशमन विभाग के पास सैंकड़ों की संख्या में फायर ब्रिगेड़ें तो होती ही है, दर्जनों हेलीकोप्टर भी तैयार रहते हैं। इसका मुकाबला हमारे यहां से करें तो हंसी छूट जाती है।
थोड़ा आगे बढ़े तो सड़क की एक तरफ चौड़ा सा मैदान नजर आया। यहां कई वाहन खड़े थे। मैं समझा कोई मिड वे जैसा होगा मगर यह एक ट्रेकिंग रोक थी। सड़क के किनारे एक सीधा ऊंचा पहाड़ था। कई लोग हुकों व रस्सीयों के सहारे इस पहाड़ पर चढने की कोशिश कर रहे थे। यह कोई नियोजित क्लाईम्बिंग स्थल नहीं था। यहां एक भारतीय परिवार नजर आया। एक बड़ी सी वेन से फोल्डिंग कुर्सियां व टेबल निकाल कर अपनी वेन के बाहर ही बैठ गये और बास्केट से नाश्ता निकाल कर खाने लगे। घर से इतना नाश्ता ठूस कर आये थे फिर भी इन्हें खाते देख कर भूख लग आई। यह हाल मेरा ही नहीं सब का था। वैसे भी घर से सफर में निकलते ही बीच रास्ते में खाने का आनन्द ही अलग है। यहां एक छोटा सा लकड़ी का स्टाल था जिसमें खाने पीने की चीजें मिल रही थी। राजा सबके लिये सेण्डविच बनवा लाया। हमारे पास तो बैठने की कोई व्यवस्था नहीं थी इसलिये खड़े खड़े ही खाते रहे और सामने पहाड़ पर लोगों को चढ़ते-उतरते तो गिरते पड़ते देखते रहे। इनमें कई साइकलिस्ट भी थे जिनकी साइकिलें एक तरफ रखी हुई थी। देनकूवर- विसलर का इलाका साइकलिंग के लिये बहुत मशहूर है। कुलवन्त का जीता जागता उदाहरण हमारे साथ था।
थोड़ी देर यहां रुक कर हम आगे बढ़े। अब धीरे धीरे हिमाच्छादित पहाड़ियां सड़क की दोनों तरफ नजर आने लगी। घुमावदार पहाड़ी रास्ते के कारण कभी ये ओझल हो जाती तो कभी ये एकदम सामने आ जाती। राजा तो इनके चित्र ले ले कर ही परेशान हो गया। एक शानदार धवल चोटि नजर आती, ज्यूही वह फोटो लेने लगता गाड़ी घूम जाती और पहाड़ी ओझल हो जाती, इसी तरह अचानक प्रगट हो जाती तो फोटो ले ही नहीं पाता।
पहाड़ों की इस आंख मिचौली को भेदते हुए हम विसलर पहाड़ों की तलहटी में पहुँच गये। यह एक छोटा सा कस्बा बन गया है, पर्यटकों तथा स्कींग प्रतियोगियों के ही कारण। यह विसलर तथा ब्लेक कोम्ब पहाड़ क्षेत्र है जो लगभग 8 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां प्रतिवर्ष औसतन 40 फीट हिमपात होता है। पहाड़ों पर जाने के लिये यहां 37 लिफ्टें लगी हुई हैं जो प्रति घन्टे साठ से सत्तर हजार पर्यटकों को उपर ले जा सकती है। प्रति वर्ष 20 लाख से भी अधिक पर्यटक यहां आते हैं। जिनके लिये कई रेस्टोरेन्ट व होटलें बनी हुई हैं।
विसलर पहाड़ लगभग 7 हजार तथा ब्लेक कोम्ब पहाड़ 7500 फुट ऊंचा है। दोनों पहाड़ों पर 11-11 कि.मी. रास्ते हैं। विसलर पर 19 लिफ्टें हैं, 2 हाई स्पीड गोण्डोला रोप वे, 7 हाई स्पीड केबल कारें, 8 सरफेस लिफ्टें और 2 ट्रिपल चेयरे हैं। कमोबेश इतनी ही ये चीजें ब्लेक कोम्ब पहाड़ हेतु भी उपलब्ध हैं। इनके अलावा इन दोनों पहाड़ों की चोटियों को जोड़ने वाली एक गोण्डोला अलग से है।
इतनी लिफ्टें और केबल कारों का सुनकर मेरे अचरज का ठिकाना नहीं था। हमारे यहां तो सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल पर भी एक या ज्यादा से ज्यादा दो केबल कारें होंगी। कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर तो किसी केबल कार या रोप वे के भी लाले पड़े हुए हैं। उदयपुर का सज्जनगढ़ आदर्श पर्यटन स्थल है। यहां के महाराणा जो बना गये वो बना गये, उसी से कमा खा रहे। एसा नहीं कि इसे आधुनिक रूप दें, यहां तक केबल कार चलाएं। सज्जनगढ़ की बगल में उसके समानान्तर ही एक पहाड़ी है, चाहें तो उसको जेन्टिंग जैसे विकसित कर सकते हैं। जनगढ़ से इस पहाड़ी के बीच रोप वे भी चल सकती है मगर इन सबके लिये दृष्टि होनी चाहिये जिसका वर्तमान शासकों में नितान्त अभाव है।

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