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पूर्वी राजस्थान में पायलट का चल गया जादू?
By EditorialPublished on
पूर्वी राजस्थान (rajasthan) में इस बार बंपर वोटिंग हुई है। मध्य क्षेत्र में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। जबकि पश्चिमी क्षेत्र में सबसे कम वोटिंग हुई है। पूर्वी क्षेत्र ऐसा रहा है, जहां पिछले चुनाव की तुलना में मत प्रतिशत बढ़ा है। पांच हिस्सों में बंटे राजस्थान में सबसे ज्यादा मतदान पूर्वी क्षेत्र में ही हुआ है। इसमें 9 जिलों की 47 सीटें है। जहां 74.61 प्रतिशत मतदान हुआ है। जबकि सबसे कम 68. 13 पश्चिमी क्षेत्र में हुआ है। सियासी जानकार बढ़े हुए मतदान के मायने निकाल रहे हैं। बता दें पूर्वी राजस्थान में राहुल गांधी (
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जयपुर (कार्यालय संवाददाता ) । पूर्वी राजस्थान (rajasthan) में इस बार बंपर वोटिंग हुई है। मध्य क्षेत्र में मतदान प्रतिशत बढ़ा है। जबकि पश्चिमी क्षेत्र में सबसे कम वोटिंग हुई है। पूर्वी क्षेत्र ऐसा रहा है, जहां पिछले चुनाव की तुलना में मत प्रतिशत बढ़ा है। पांच हिस्सों में बंटे राजस्थान में सबसे ज्यादा मतदान पूर्वी क्षेत्र में ही हुआ है। इसमें 9 जिलों की 47 सीटें है। जहां 74.61 प्रतिशत मतदान हुआ है। जबकि सबसे कम 68. 13 पश्चिमी क्षेत्र में हुआ है। सियासी जानकार बढ़े हुए मतदान के मायने निकाल रहे हैं। बता दें पूर्वी राजस्थान में राहुल गांधी (rahul gandhi) की भारत जोड़ो यात्रा (bharat jodo yatra) में सबसे ज्यादा भीड़ शामिल हुई थी। दौसा, करौली (Karauli), धौलपुर (Dholpur), सवाई माधोपुर (Sawai Madhopur), अलवर (Alwar) और भरतपुर (Bharatpur) में गुजर्र (gujarr) वोटर हार-जीत तय करते रहे हैं।
राजस्थान में 0.33 प्रतिशत वोट से भी सत्ता बदल जाती है
सियासी जानकारों का कहना है कि पूर्वी राजस्थान गुर्जर वोटर निर्णायक भूमिका में रहते आए है। हार- जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। पूर्वी राजस्थान की सियासत का केंद्र बिंदु दौसा जिले सचिन पायलट (sachil piolt) के पिता स्वर्गीय राजेश पायलट (Rajesh Pilot) की कर्मस्थली रहा है।
सचिन पायलट का खासा प्रभाव माना जाता है। बता दें राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा भीड़ पूर्वी राजस्थान में ही उमड़ी थी। दौसा जिले में रिकॉर्ड भीड़ से खुद राहुल गांधी हैरान हो गए थे। यहीं नहीं राहुल के सामने सचिन को सीएम बनाने के नारे भी खूब लगे थे। सियासी जानकारों का कहना कि राजस्थान में 0.33 प्रतिशत वोट से भी सत्ता बदल जाती है। ऐसे में पिछली बार की तुलना में बढ़े हुए मतदान प्रतिशत का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। दूसरी तरफ सचिन पायलट के अधिकांश समर्थक विधायक भी पूर्वी राजस्थान से ही आते है। इस बार भी चुनावी मैदान में है। कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट के कहे अनुसार टिकट दिए है। बता दें विधानसभा चुनाव 2018 में 0.54 फीसदी अधिक वोट से कांग्रेस की सरकार बन गई थी।
कांग्रेस को मिली थी बंपर जीत
विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस को पूर्वी राजस्थान में बंपर जीत मिली थी। 39 में से भाजपा को मात्र 2 सीटें मिली थी। बाकि पर निर्दलीय, बसपा और कांग्रेस को विजयी मिली थी। दौसा में भाजपा (BJP) नेता डॉ. किरोड़ीलाल मीणा (Dr. Kirodilal Meena) का किला ढह गया था। दौसा जिले की 4 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया। एक सीट पर भाजपा के बागी व निर्दलीय उम्मीदवार ओमप्रकाश हुड़ला ने किरोड़ीलाल के भतीजे राजेंद्र मीणा को हराया।
कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे दौसा से प्रत्याशी मुरारी शिकस्त दी। लालसोट सीट पर भी पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा ने भाजपा के विधायक शंकर शर्मा को लाल मीणा ने भाजपा के रामबिलास मीणा को कांटे की जी. आर. खटाणा ने पूर्व मंत्री एवं हाल ही भाजपा में टक्कर में हरा दिया। बांदीकुई सीट पर कांग्रेस के शामिल हुए रामकिशोर सैनी को त्रिकोणीय मुकाबले में परास्त कर दिया। सिकराय से कांग्रेस की ममता भूपेश विजयी रही। उन्होंने भाजपा के विक्रम बंसीवाल को करारी शिकस्त दी। इस बार भी वहीं चेहरे आमने- सामने है। इस बार महुवा ओपी हुडला कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे है। पिछली बार निर्दलीय जीते थे।
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