Pratahkal:Development of knowledge and reasoning power-Acharya Mahashraman
मुंबई । नन्दनवन (Nandanvan) में तीर्थंकर समवसरण में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि 32 आगम जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ (Jain Shwetambar Terapanth Dharm Sangh) में मान्य हैं। हमारे सामने चारित्रात्माएं उपस्थित हैं। इनमें नवदीक्षित साधु-साध्वियां भी हैं। शैक्ष चारित्रात्माएं भी हैं। चारित्रात्माएं मुनि कुमारश्रमणकेशी से प्रेरणा लेकर अपने ज्ञान और तर्कशक्ति का विकास करने का प्रयास करें। तर्क संगत और यथार्थ हो तो तर्क भी गुणवत्तापूर्व हो सकता है। मुख्यमुनि आदि कई साधु-साध्वियां अच्छे प्रस्तुति देने वाले हैं। उन्हें और अधिक विकास करने का प्रयास करना चाहिए। अब यहां के चातुर्मास की सम्पन्नता बहुत निकट है। यहां से सभी सभी चारित्रात्माओं का विहार होना है। सभी साधु-साध्वियां सुखे-सुखे विहार करें, मंगलकामना। आचार्यश्री ने चतुर्दशी के संदर्भ में चारित्रात्माओं को विविध प्रेरणाएं प्रदान कीं। साधु-साध्वियों ने अपने स्थान पर खड़े होकर लेखपत्र का उच्चारण किया। आचार्यश्री के प्रवचन से पूर्व साध्वीप्रमुखा ने जनता को उद्बोधित किया।
इसके पूर्व मुम्बई ज्ञानशाला की संयोजिका अनिता परमार, मुम्बई सभा के कार्याध्यक्ष नवरतनमल गन्ना, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कन्हैयालाल मेहता, निर्मला चण्डालिया, प्रवास व्यवस्था समिति प्रचार मंत्री मांगीलाल छाजेड़, अशोक बरलोटा, भोजनशाला संयोजक महेन्द्र तातेड़, स्वागताध्यक्ष सुरेन्द्र बोरड़ पटावरी, प्रवास व्यवस्था समिति महामंत्री सुरेन्द्र कोठारी, गौतम कोठारी, महिला मण्डल की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष तरूणा बोहरा, मुम्बई सभा मंत्री दीपक डागलिया, प्रवास व्यवस्था समिति के प्रबन्धक मनोहर गोखरू ने अभिव्यक्ति दी। पूर्व विधायक नरेन्द्र मेहता ने मंगलभावना व्यक्त की।
Editorial

Editorial

Next Story