Telangana BJP Reservation Controversy
हैदराबाद ( एजेंसी ) । तेलंगाना (Telangana) की सत्ता में भाजपा (BJP) के आने पर मुस्लिमों (Muslims) का 4% आरक्षण (Reservation) हटाकर पिछड़ों को देने के अमित शाह (Amit Shah) के वादे ने चुनावी राजनीति (electoral politics) को अचानक गर्म कर दिया है। पुराने हैदराबाद (Hyderabad) की 7 सीटों को छोड़कर पिछले दो बार से बीआरएस के साथ खड़े मुस्लिम वोटरों में इस बार बड़ा असमंजस है।
भाजपा को बढ़ने से रोकने के लिए कांग्रेस के प्रति मुस्लिमों की हमदर्दी तो गली • मोहल्लों में भी है, किंतु केसीआर सरकार की मुस्लिम लाभकारी योजनाएं उन्हें कदम आगे बढ़ाने से रोक रही हैं।
प्रारंभिक सुस्ती के बाद भाजपा के अति सक्रिय होते कांग्रेस के साथ बीआरएस की भी बेचैनी बढ़ गई है। दोनों में मुस्लिम वोटों को हथियाने की होड़ है।
तेलंगाना के आम लोगों की समझ है कि प्रत्यक्ष तौर पर हैदराबाद की 9 सीटों पर चुनाव लड़ रहे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइआइएम का परोक्ष रूप से बीआरएस के साथ समझौता है । इसलिए हैदराबाद के बाहरी क्षेत्र के मुस्लिम वोटर अभी क मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव एवं उनके दल बीआरएस के साथ खड़े नजर आते थे। किंतु मात्र चार महीने पहले पड़ोसी राज्य कर्नाटक की सत्ता से भाजपा को दूर कर तेलंगाना मे जोश के साथ उतरी कांग्रेस के रूप में उन्हें इसबार नया विकल्प भी दिखने लगा है। इस मुद्दे पर प्रभावशाली मुस्लिम संगठनों में भी विमर्श का दौर जारी है। बीआरएस की मुश्किलें यहीं से शुरू हो जाती हैं।
2011 की जनगणना के अनुसार, तेलंगाना में 12.68 प्रतिशत मुसलमान हैं। विधानसभा की कुल सीटों में लगभग एक तिहाई ऐसी हैं, जहां के नतीजे को मुस्लिम सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं । हैदराबाद, रंगा रेड्डी, परिणामों को सीधे करते हैं प्रभावित महबूबनगर, मेडक, नलगोंडा, निजामाबाद एवं करीमनगर जिले में मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है। सबसे अधिक हैदराबाद में कुल आबादी में मुस्लिम एक चौथाई से अधिक है । हैदराबाद की कुल 15 विधानसभा क्षेत्रों में 9 का परिणाम मुस्लिम मतदाता ही तय करते हैं। यही कारण है कि करीब ढाई दशक से एआईएमआईएम पुराने शहर की 7 सीटों पर लगातार जीतती आ रही है। देश भर में मुस्लिम
हितों की बात करने वाले ओवैसी को तेलंगाना में कम से कम 40 सीटों पर प्रत्याशी देना चाहिए था, मगर वह ऐसा नहीं करते हैं। इसका संकेत जाता है कि वह केसीआर को मदद करते हैं। इस बार मजलिस जिन 9 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उनमें जुबली हिल भी शामिल है जहां कांग्रेस के टिकट पर पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरूद्दीन मैदान मैं हैं ।
कांग्रेस इसे भी भुना रही है। और ओवैसी को अजहर के खिलाफ बताकर नीयत पर पोस्टर छापकर सवाल उठा रही है । कांग्रेस मु वोटरों को समझाने का प्रयास कर रही है कि कांग्रेस ही विकल्प है, बीआरएस नहीं । कांग्रेस की कोशिशों का अहसास ओवैसी को भी है, इसीलिए उन्होंने कहा कि आरक्षण हटाने का अर्थ है पिछड़े और पसमांदा को रोजगार के अवसरों से वंचित रखना ।
Editorial

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