✕
नन्दनवन में आचार्य महाश्रमण ने प्रदान की एक और दीक्षा
By EditorialPublished on
आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुम्बई (Mumbai) चातुर्मास (Chaturmas) सम्पन्न होने से पूर्व नन्दनवन (Nandanvan) में एक और दीक्षा प्रदान की। सितम्बर के अंत में आचार्य महाश्रमण से दीक्षा की अनुमति मिली 77 वर्षीय धनराज बैद को, जिन्होंने दीक्षा की भावना रखी तो आचार्यश्री ने दीक्षा प्रदान करने की घोषणा कर दी।

x

मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने मुम्बई (Mumbai) चातुर्मास (Chaturmas) सम्पन्न होने से पूर्व नन्दनवन (Nandanvan) में एक और दीक्षा प्रदान की। सितम्बर के अंत में आचार्य महाश्रमण से दीक्षा की अनुमति मिली 77 वर्षीय धनराज बैद को, जिन्होंने दीक्षा की भावना रखी तो आचार्यश्री ने दीक्षा प्रदान करने की घोषणा कर दी।
बुधवार को आचार्य महाश्रमण के महामंत्रोच्चार के साथ दीक्षा समारोह का शुभारम्भ हुआ। मुमुक्षु सुरेन्द्र और मुमुक्षु मुकेश ने मुमुक्षु धनराज बैद का परिचय दिया। बजरंग जैन ने आज्ञा पत्र का वाचन किया। मुमुक्षु के पुत्र अनिल बैद व उनके अन्य परिजनों से दीक्षा का आज्ञा पत्र अर्पित किया। मुमुक्षु धनराज बैद ने विचार रखे। साध्वीप्रमुखा ने जैन भगवती दीक्षा के महत्त्व को वर्णित किया।
आचार्य महाश्रमण ने कहा कि आदमी को धर्म की शरण में जाने का प्रयास करना चाहिए। जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति पाने के लिए मुनि दीक्षा स्वीकार की जाती है। आज भी दीक्षा का प्रसंग है। दीक्षा लेना और दीक्षा देना दोनों ही बड़ी बात होती है। 77 वर्ष की अवस्था में दीक्षा देने का प्रसंग है। कितनी सारी डिग्री हासिल कर और कितनों को सीए बनाने वाले की विरल दीक्षा होने जा रही है। उन्होंने दीक्षा का क्रम प्रारम्भ करने से पूर्व मुमुक्षु के परिजनों से मौखिक स्वीकृति के साथ मुमुक्षु के मनोभाव को भी जांचा। तदुपरान्त उन्होंने आर्षवाणी का उच्चारण करते हुए अपने पूर्वाचार्यों व भगवान महावीर का स्मरण करते हुए 77 वर्षीय मुमुक्षु धनराज बैद को मुनि दीक्षा प्रदान की। केशलोच की प्रक्रिया को सम्पन्न करते हुए रजोहरण व पूजंणी भी प्रदान की।
आचार्य महाश्रमण ने नवदीक्षित मुनि का नाम मुनि ध्यानमूर्ति घोषित किया। इस नाम को सुनते ही पूरा प्रवचन पण्डाल जयघोष से गुंजायमान हो उठा। नवदीक्षित साधु ने आचार्यश्री को वंदन कर आशीर्वाद प्रदान किया तो उपस्थित जनता में नवदीक्षित साधु को वंदन कर उनका अभिनंदन किया। आचार्यश्री ने दीक्षा के क्रम को सम्पन्न करते हुए नवदीक्षित मुनि को साधुचर्या की जागरूकता से पालना करने की भी प्रेरणा प्रदान की। आचार्यश्री ने नवदीक्षित मुनि को सार-संभाल व शिक्षा आदि के लिए मुनि दिनेशकुमार को सौंपा। प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष मदनलाल तातेड़ व अन्य ने मुम्बई मर्यादा महोत्सव 2024 के लोगो को लोकार्पित किया

Editorial
Next Story
Related News
X
