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गहलोत को जादूगर नहीं मानते पायलट
By EditorialPublished on
राजस्थान (rajasthan) में विधानसभा चुनाव (vidhansabha election) के लिए मतदान से ठीक पहले सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की 'जादूगरी को यह कहकर खारिज किया है कि पूरे ब्रह्मांड में सिर्फ एक जादूगर है वह है नीलीछतरी वाला । पायलट ने यह भी कहा कि उन्हें राज्य में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनने का भरोसा है। पूर्व डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि राजस्थान में अगले मुख्यमंत्री का फैसला जीतकर आए विधायक और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किया जाएगा।

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कार्यालय संवाददाता जयपुर । राजस्थान (rajasthan) में विधानसभा चुनाव (vidhansabha election) के लिए मतदान से ठीक पहले सचिन पायलट (Sachin Pilot) ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) की 'जादूगरी को यह कहकर खारिज किया है कि पूरे ब्रह्मांड में सिर्फ एक जादूगर है वह है नीलीछतरी वाला । पायलट ने यह भी कहा कि उन्हें राज्य में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनने का भरोसा है। पूर्व डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि राजस्थान में अगले मुख्यमंत्री का फैसला जीतकर आए विधायक और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किया जाएगा।
पायलट ने एक इंटरव्यू में कहा कि भाजपा (BJP) का कैंपेन जोर नहीं पकड़ पा रहा है और कांग्रेस पार्टी (Congress Party) को जनता से जो रिस्पांस मिल रहा है उससे भरोसा है कि इस बार बदलाव की परंपरा टूट जाएगी। पायलट ने इस दौरान सीएम पद को लेकर भी कई सवालों के जवाब दिए और बार-बार जोर दिया कि चुनाव बाद ही इसका फैसला होगा, फिलहाल कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ रही है।
पायलट ने मुख्यमंत्री पद को लेकर कहा, 2018 में हम जीते। मैं प्रदेश अध्यक्ष था । हमने एक लाइन का प्रस्ताव पास किया कि जो कांग्रेस अध्यक्ष चाहेंगे वही होगा, किसको क्या काम देना है। यह परंपरा पार्टी में दशकों से हर राज्य में है। पहले बहुमत आएगा। फिर विधायक बैठकर नेतृत्व पर छोडेंगे और फिर वह तय करेंगे। कांग्रेस लीडरशिप तय करेगी, विधायकों से बात करके। पत्रकार की ओर से यह कहे जाने पर कि गहलोत आखिरी वक्त में जादूगरी कर देते हैं, पायलट ने तुरंत आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा, इस ब्रह्मांड में सिर्फ एक जादूगर है नीलीछतरी वाला। बाकी सब जो बातें बोल रहे हैं कोई नहीं है। पार्टी जो फैसला करती है। वह सबको मानना होता है। गौरतलब है कि गहलोत के पिता पेशे से जादूगर थे और खुद मुख्यमंत्री भी बचपन में पिता का साथ देते थे। महीन और बारीक राजनीतिक कदमों को लेकर गहलोत को अक्सर राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है।

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