Rajasthan political dynasties
जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान (Rajasthan) विधानसभा चुनाव (assembly elections) में कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP) एक-दूसरे पर वंशवाद (Dynasty) को बढ़ावा देने के आरोप लगा रही हैं, लेकिन प्रदेश की राजनीति की पड़ताल करने पर पता चलता है कि वंशवाद (Dynasty) दोनों पार्टियों में हमेशा हावी रहा है। दोनों ने वंशवाद (Dynasty) बढ़ावा दिया है। कई ऐसे परिवार हैं, जिनकी दो से तीन पीढ़ियां लगातार चुनाव लड़ती आ रही हैं। इन परिवारों के सदस्य जिन सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, वहां किसी अन्य को चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं मिला। प्रदेश की राजनीति में दो दर्जन से अधिक परिवार ऐसे हैं, चुनाव में जिनके सिर्फ चेहरे बदले हैं। जिस सीट पर कभी दादा और पिता चुनाव लड़ते थे, उन पर अब पौत्र-पौत्री चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज जाट नेता स्व. परसराम मदेरणा लगातार 9 बार विधायक रहे। मदेरणा के निधन के बाद उनके पुत्र महिपाल दो बार विधायक रहे। अब महिपाल की पुत्री दिव्या दूसरी बार सिया सीट से चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने मदेरणा परिवार को 12 बार टिकट दिया है। इसी तरह नागौर की राजनीति में दबदबा रखने वाले मिर्धा परिवार का लंबा चुनावी नाता रहा है। 1952 में नाथूराम मिर्धा पहली बार विधायक बने थे। फिर नाथूराम के भतीजे रामनिवास मिर्धा राजनीति में सक्रिय हुए। इस बार मिर्धा परिवार के चार सदस्य चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें नाथूराम की पौत्री ज्योति मिर्धा भाजपा के टिकट पर नागौर सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने रामनिवास के पुत्र हरेंद्र चुनाव मैदान में हैं। खींवसर सीट से तेजपाल मिर्धा एवं डेगाना से विजयपाल मिर्धा चुनाव लड़ रहे हैं। जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य दीया कुमारी भाजपा प्रत्याशी के रूप में विद्याधर नगर सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनके पिता स्व. भवानी सिंह जयपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी दादी गायत्री देवी स्वतंत्र पार्टी से सांसद रही हैं। बीकानेर के पूर्व महाराजा करणी सिंह दो बार सांसद रहे तो अब उनकी पौत्री सिद्धी कुमारी तीसरी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं दिग्गज नेता देवी सिंह भाटी सात बार विधायक रहे। फिर उनके पुत्र महेंद्र सिंह बीकानेर से सांसद रहे । अब देवी सिंह के पौत्र अंशुमान सिंह कोलायत सीट से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व उप मुख्यमंत्री और टोंक के विधायक सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट दौसा से सांसद रहे हैं।
यहां भी परिवारवाद हावी
राजखेड़ा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रोहित बोहरा के पिता पद्युम्न सिंह, लूणी से कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र बिश्नोई के पिता मलखान विश्नोई और दादा रामसिंह विश्नोई विधायक रहे हैं। दांतारामगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह के पिता नारायण सिंह सात बार विधायक रहे हैं। सरदारशहर से कांग्रेस प्रत्याशी अनिल शर्मा के पिता भंवरलाल शर्मा छह बार, वल्लभनगर से कांग्रेस प्रत्याशी प्रीति शक्तावत के ससुर गुलाब सिंह शक्तावत और पति गजेंद्र सिंह पूर्व में विधायक रह चुके हैं। चूरू से कांग्रेस प्रत्याशी मकबूल मंडेलया के पिता रफीक मंडेलिया एक बार विधायक रहे हैं। मंडावा से कांग्रेस प्रत्याशी रीटा चौधरी के पिता रामनारायण चौधरी छह बार विधायक रहे है।
Editorial

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