Pratahkal:Acharya Mahashraman in Nandanvan
मुम्बई । नन्दनवन में आचार्य महाश्रमण के सानिध्य में शनिवार को अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का अंतिम दिन जीवन विज्ञान दिवस के रूप में आयोजित हुआ। उन्होंने मुख्य प्रवचन में कहा कि मानव शरीर स्थूल व अस्थाई है, उसके भीतर व्याप्त आत्मा मूल है और वह स्थाई होती है। आत्मा और शरीर का समिश्रण ही जीवन है। आत्मा और शरीर के योग से अनेक प्रक्रिया भी होती है। आदमी कोई काम करता है, कभी विचार करता है, खाना खाता है, पढ़ता है, आदि अनेक कार्य करता है। आदमी में बुद्धि का होना अच्छी बात है। बुद्धि होनी अच्छी बात है तो बुद्धि की शुद्धि होना परम आवश्यक होता है। शुद्ध बुद्धि कामधेनु के समान होती है। आज जीवन विज्ञान दिवस है। जीवन विज्ञान आदमी को बुद्धि और ज्ञान के विकास के साथ ही भावात्मक विकास की प्रेरणा देने वाला है। शारीरिक विकास, बौद्धिक विकास के साथ भावात्मक विकास भी होता है तो वह विकास पूर्ण होता है। क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, भय, राग, द्वेष यह सभी भावात्मक विकृतियां हैं। इन विकृतियों को दूर कर अभय और विनय के भाव का विकास करने का प्रयास करना चाहिए। जीवन विज्ञान विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को शुद्ध बनाने की प्रेरणा देता है। विद्यार्थी अपने जीवन में केवल अंक पाने की अभिलाषा नहीं, ज्ञानात्मक विकास की अभिलाषा करे। ज्ञान के साथ-साथ चरित्र का विकास हो तो बहुमुखी विकास हो सकता है। अच्छे विद्यार्थियों का निर्माण होगा तो परिवार, समाज, राष्ट्र और कभी विश्व के लिए भी उपयोग हो सकते हैं।
अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के सहमंत्री मनोज सिंघी व मुम्बई अणुव्रत समिति के अध्यक्ष रोशनलाल मेहता ने प्रस्तुति दी। साथ ही तेरापंथ महिला मण्डल के अधिवेशन ‘क्षितिज’ का शुभारम्भ हुआ। मण्डल अध्यक्ष नीलम सेठिया ने संचालन किया।
Editorial

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