ram mandir
अयोध्या (एजेंसी)। रामनगरी में तीन तल के राम मंदिर (ram mandir) का निर्माण कार्य जोरों पर है । मंदिर का भूतल तैयार हो गया है। 22 जनवरी को रामलला (ramlala) की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी भी चल रही है। लेकिन, तीसरे तल के साथ मंदिर का 161 फीट ऊंचा शिखर दिसंबर 2024 तक तैयार होगा, जिस पर पताका फहराई जाएगी। मंदिर निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों में अब तक 900 करोड़ रूपये व्यय हो चुके हैं।
प्रत्येक तीन महीने पर होने वाली रामजन्मभूमि (Ramjanmabhoomi) तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक शनिवार को हुई, जिसमें महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने संवाददाताओं को बैठक में उठे विषयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बैठक में 5 अगस्त, 2020 को भूमि पूजन के बाद से 31 मार्च, 2023 तक मंदिर निर्माण के व्यय का हिसाब भी प्रस्तुत किया गया । निधि समर्पण अभियान तथा नियमित दान से प्राप्त होने वाली राशि में से 3000 करोड़ रूपए विभिन्न बैंकों में जमा हैं। इनमें से कुछ रूपये सेविंग अकाउंट में हैं और फिक्स डिपाजिट हैं। चंपतराय ने बताया कि बैठक में मंदिर निर्माण को पूर्णता प्रदान करने की अवधि का विषय प्रमुख रहा। ट्रस्ट और लार्सन एंड टूब्रो के बीच इसी वर्ष अगस्त तक मंदिर के भूतल का निर्माण पूर्ण करने का एग्रीमेंट हुआ था, किंतु आकलन गड़बड़ा गया। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने से करीब एक माह पूर्व यानी दिसंबर तक भूतल का कार्य पूर्ण किया जाएगा। 75 एकड़ के रामजन्म भूमि परिसर को धर्म अध्यात्म के कई प्रकल्पों से युक्त सांस्कृतिक उप नगरी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य दिसंबर 2025 तक पूरा करने का आकलन है। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में रामकथा संग्रहालय की मांग पर विचार किया गया। सोमवार को प्रदेश सरकार संग्रहालय ट्रस्ट को प्रदान कर देगी।
धार्मिक समिति में महंत नृत्यगोपाल, दास, स्वामी गोविंददेव गिरि शामिल बैठक में श्रीरामलला की प्रतिमा की स्थापना और उसके बाद सेवा पूजा का विध विधान पर फैसला लेने के लिए धार्मिक समिति गठित की गई है। इस समिति में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, महासचिव चंपतराय, ट्रस्ट के सदस्य उडुपी के शंकराचार्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ आदि को शामिल किया गया है। बताया गया कि नौ अक्टूबर को प्रदेश सरकार रामकथा संग्रहालय ट्रस्ट को प्रदान कर देगी । तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की योजना राम मंदिर के 500 साल पुराने इतिहास और 50 वर्ष के लीगल डाक्यूमेंट्स को संग्रहालय में प्रदर्शित करने की थी । यद्यपि सुरक्षा संबंधी कारण से इसकी स्थापना रामजन्मभूमि परिसर में संभव नहीं थी और इसी तथ्य को ध्यान में रख कर ट्रस्ट ने राज्य सरकार से राम कथा संग्रहालय की मांग की थी।
देश के 5 लाख गांवों तक जाएंगे पूजित अक्षत
रामलला के पूजित अक्षत देश के पांच लाख गांवों तक जाएंगे। समझा जाता है कि विजयदशमी (Vijayadashami) यानी 23 अक्टूबर के बाद की कोई तारीख तय कर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट विश्व हिंदू परिषद के देशव्यापी 50 केंद्रों के कार्यकर्ताओं को आमंत्रित कर रामलला के दरबार में पूजित अक्षत उनको सौंपेगा और उन पर पूजित अक्षत देश के पांच लाख गांवों तक पहुंचाने की होगी। इन अक्षतों के साथ निवेदन किया जाएगा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का उत्सव अपने अपने क्षेत्र के मंदिरों में भजन पूजन एवं अनुष्ठान के साथ मनाएं। प्रधानमंत्री (PM) की उपस्थिति में प्राण प्रतिष्ठा उत्सव का जीवंत प्रसारण टेलीविजन पर देखें और दिन ढलने के बाद अपने- अपने घर के सामने कम से कम 5 दीप जलाकर दीपोत्सव मनाएं। प्राण प्रतिष्ठा के बाद नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में स्थापित विग्रह का चित्र प्रत्येक दर्शनार्थी को प्रसाद के रूप में दिया जाएगा। इस प्रयास के साथ ट्रस्ट की योजना 10 करोड़ घरों तक रामलला का चित्र पहुंचाने की है।
मिल सकेगा विदेश से दान, एफसीआरए के तहत मिली पात्रता
ट्रस्ट ने विदेशी मुद्रा प्राप्त करने के लिए विधिक औपचारिकता पूर्ण कर ली है। ट्रस्ट की ओर से एफसीआरए के तहत इस दिशा में पात्रता हासिल करने के लिए आनलाइन प्रार्थनापत्र भी प्रेषित कर दिया गया है। राम जन्मभूमि मार्ग के नुक्कड़ पर पुराने बस स्टेशन की जमीन परिवहन निगम की ओर से ट्रस्ट को दे दी गई है। ट्रस्ट इस भूमि का उपयोग रामलला के दर्शनार्थियों को मूलभूत सुविधा प्रदान करने के लिए करेगा । प्राण प्रतिष्ठा के बाद करीब 40 दिनों तक विहिप के संयोजन में प्रतिदिन 25000 कार्यकर्ता रामलला का दर्शन करने अयोध्या पहुंचेंगे। उनके भोजन आवास और मूलभूत सुविधाओं के लिए जिलाधिकारी ने उदया स्कूल चौराहा के पास समुचित भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
Editorial

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