राहुल वर्मा…..बिहार में जातीय गणना के दांव ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल भी इस मामले में एक दूसरे को घेर रहे हैं। कांग्रेस जहां देश भर में जातिवार जनगणना की मांग कर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस को इस आधार पर घेर रही है कि संप्रग सरकार के दौरान जनगणना के साथ ही जातिगत आधार पर जो आंकड़े जुटाए गए थे, उन्हें सार्वजनिक करने में कांग्रेस ने कोताही क्यों की? इतना ही नहीं, भाजपा इस बात पर भी सवाल उठा रही है कि कर्नाटक में सिद्दरमैया की पिछली सर

Caste-based Politics
राहुल वर्मा…..बिहार में जातीय गणना के दांव ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दल भी इस मामले में एक दूसरे को घेर रहे हैं। कांग्रेस जहां देश भर में जातिवार जनगणना की मांग कर रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस को इस आधार पर घेर रही है कि संप्रग सरकार के दौरान जनगणना के साथ ही जातिगत आधार पर जो आंकड़े जुटाए गए थे, उन्हें सार्वजनिक करने में कांग्रेस ने कोताही क्यों की? इतना ही नहीं, भाजपा इस बात पर भी सवाल उठा रही है कि कर्नाटक में सिद्दरमैया की पिछली सरकार के दौरान भी राज्य में जातिवार गणना हुई थी, लेकिन उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया ? कुछ ऐसा ही कांग्रेस शासित राजस्थान में भी हुआ। खुद कांग्रेस में ही इसे लेकर मत- विभेद दिखता है। ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी' से जुड़े राहुल गांधी के आह्वान पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इससे देश में 'बहुसंख्यकवाद' को बढ़ावा मिलने की बात कही, लेकिन जब पार्टी में उनकी इस बात को लेकर असंतोष बढ़ा तो उन्होंने इसका ठीकरा अपने निजी स्टाफ पर फोड़ दिया और एक्स पर अपनी उस पोस्ट को डिलीट कर दिया । जातीय गणना को लेकर अभी तक तय नहीं कि इसके क्या निहितार्थ होंगे। इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा। क्या इससे देश में नई राजनीतिक क्रांति का सूत्रपात होगा या फिर यह महज राजनीतिक शिगूफा बनकर कुछ समय के बाद फुस्स हो जाएगा ?
ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता में रहने वाला कोई भी दल जातीय गणना के जिन्न को बोतल से बाहर नहीं निकालना चाहता । इस मामले में नीतीश कुमार अपवाद रहे, क्योंकि
Editorial

Editorial

Next Story