Yatra Vrutant-Suresh Goyal-Pratahkal-Rajasthan
शीघ्र ही मेरी भी बारी आ गई। यहां दो अधिकारी थे, एक कुछ ज्यादा करता नजर आ रहा था जबकि दसरा थोड़ा उदार लग रहा था। में मना रहा था कि मेरा पाला सख्त वाले से नहीं पड़े। मेरे आगे जितने लोग थे उन्हें गिन कर मैंने अन्दाज लगा लिया कि मेरा क्रम उदार वाले के पास ही आयगा । मेरी बारी आने वाली थी तभी उदार वाले को पूछताछ करते ज्यादा समय लग गया तो सख्त वाला खाली हो गया, उसने मेरी तरफ देखते हुए पुकारा- नेक्स्ट। मेरे लाख नहीं चाहते हुए भी मुझे उसी के पास जाना पड़ रहा था।
उसने पासपोर्ट व फार्म लिये पासपोर्ट के पन्ने पलटते एक जगह आकर रुक गया और उस पृष्ठ को गौर से देखने लगा, मैंने सोचा गये काम से। उसने उस पृष्ठ पर ही नजरें गड़ाए हुए कहा कि आप 26 ता को भी कनाडा आये हो, मैं डर गया, क्या इसी कारण यह मुझे रोक देगा मगर मेरा तो मल्टीपल एन्ट्री वीजा है, राजा ने अमेरिका आते ही सबसे पहले यही चेक किया था। मैंने चेहरे पर मुस्कान ला हां कहा तो वो भी मुस्करा दिया और पासपोर्ट टेबल पर रख कर छाप लगाने लगा। यह देखा तो मेरी जान में जान आई। उसने पासपोर्ट लौटाते हुए शुभकामनाएं दी और अगले को बोला नेक्स्ट मैं पासपोर्ट लेकर एसी फुर्ती से बाहर निकला कि कहीं यह वापस नहीं बुला ले। बाहर तीनों मेरी इन्तजार कर रहे थे। मुनीश ने बताया कि जिन 5-7 थाई यात्रियों को वापस लौटाया उनके पास कनाडा का वीजा तो था मगर मल्टीपल एन्ट्री नहीं था, वे एक बार जा चुके थे इसलिये उन्हें वापस नहीं जाने दिया गया।
यहां ढेर सारी बसें, वेनें वगैरा खड़ी थी, सब अपने अपने रिजर्वेशन के वाहन ढूंढ रहे थे। हमारी बस भी पास ही खड़ी थी। यहां इसे बस नहीं कहते वरन को कहते हैं जैसे कि हमारे यहां भी टी.वी. लगी बसों को वीडियो कोच कहते हैं।
विक्टोरिया बहुत सुन्दर शहर है, उच्च अक्षांसों पर अवस्थित होने के बावजूद यहां का तापक्रम उतना कम नहीं रहता जितना इन अक्षांसों पर अवस्थित अन्य शहरों का है, इस कारण ठंड अधिक नहीं पड़ती। झीलों, नदियों व समुद्री किनारे ने इसकी सुन्दरता में अभिवृद्धि कर दी है। विक्टोरिया अरसे से धनी लोगों की शरणस्थली बनी हुई है। लोग रिटायरमेन्ट के बाद यहीं 'बंगले' बनाकर शेष जीवन बीताना चाहते हैं। विक्टोरियाका यह आकर्षण अब कई अमरीकी लोगों को भी अपनी तरफ खींच रहा है। एक बार कोई विक्टोरिया आ जाये, कुछ दिन रह जाये तो अन्यत्र कहीं उसका मन नहीं लगता । उदयपुर के साथ भी एसा ही है, यहां कुछ समय कोई रह जाये तो अपना शेष जीवन यहीं व्यतीत करना चाहता।
विक्टोरिया में पर्यटकों के आकर्षण के भी ढेर सारे स्थान हैं। समुद्र से लगती हुई एक सड़क है, इस पर पर्यटकों की चहल पहल रहती है, यहां बैठ कर समुद्र का नजारा देखने में भी बड़ा आनन्द आता है। इस सड़क पर घोड़ों से चलने वाली बच्चियां बहुत लोकप्रिय हैं पर्यटक इन बच्चियों में बैठकर समुद्र किनारे की सैर करते हैं और प्राचीन समय में जीने का लुत्फ उठाते हैं। विक्टोरिया का संसद भवन भी समुद्र किनारे ही है, प्रतिदिन रात को यह रोशनी से जगमगाया जाता है। समुद्र के जल पर इस रोशनी का प्रतिबिम्ब अद्वितीय दृश्य उपस्थित करता है। हमारे यहां तो सरकारी भवनों पर रोशनी राष्ट्रीय पर्वों पर ही की जाती है, उसमें भी कई बार बिजली की फिजूल खर्ची का रोना रोया जाता है, जबकि यहां के भवनों पर प्रतिदिन रोशनी होती है जिसे देखकर यहां आने वाले पर्यटकों का आनन्द दोबाला हो जाता है।
पारम्परिक बच्ची के साथ साथ यहां बड़ी बड़ी घोडा गाहियां भी चलती है जो • अत्यन्त सुन्दरता से सजाई गई होती हैं। इनमें एक साथ 10-12 पर्यटक बैठ कर सैर का तथा आसपास के वातावरण का आनन्द लेते हैं। कई बच्चियों को स्त्रियां भी चलाती हैं। सैर के दौरान ये विक्टोरिया के बारे में किस्से सुनाती रहती हैं जो पर्यटकों के आकर्षण का एक और पहलू बन जाता है।
बस के बाहर ड्राइवर खड़ा सवारियों को चेक करता जा रहा था, राजा कहीं रह गया था, हम बस में बैठ गए और उसकी सीट रोक ली। बस की पूरी सवारिया आ गई मगर राजा का कही अता-पता नहीं था, जरूर वह कहीं अपनी क्लब पूरी करने में लग गया होगा। आखिरकार वह आया तो सब उसकी तरफ घूरने गे। वह हंसता हुआ मेरी बगल में बैठ गया। बस ड्राइवर के लिये तो इस तरह की घटनाएं रोज की बात हैं इसलिये उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और बस चला दी। यह ड्राइवर भी था और गाईड भी। उसने चेहरे पर माईक फिट कर लिया और गाड़ी चलाते चलाते विक्टोरिया के बारे में बताने लगा। उसने बताया कि विक्टोरिया पर ब्रिटेन की छाप इतनी गहरी है कि इसे ब्रिटेन से भी ज्यादा ब्रिटिश निरूपित किया। विक्टोरिया नव दम्पत्तियों के हनीमून की राजधानी है। दुनिया भर से माने दम्पतियां यहां आती है और अपने वैवाहिक जीवन की नींव यही रखती हैं।
उसने बताया कि नवविवाहितों के आकर्षण के केन्द्र के साथ साथ विक्टोरिया नवमृतकों का भी केन्द्र बन गई है। उसकी इस बात पर हंसी का फव्वारा छूट गया। अपनी बात समझाते हुए उसने कहा कि दुनिया भर से लोग मरने भी यहीं आते हैं। रिटायरमेन्ट के बाद का जीवन खुशी खुशी यहां बीताते हैं और यहीं मर जाते हैं। प्रसिद्ध उपन्यासकार और लेखक रुडयार्ड किपलिंग जिनकी लिखी हुई पुस्तक जंगलबुक आज भी बहुत प्रसिद्ध है, जब उदयपुर आये थे तब उन्होंने पीछोला झील की सुन्दरता से अभिभूत होकर कहा था कि वेनिस देखो और भले ही मर जाओ मगर उदयपुर देखो और इसे बार बार देखने के लिये जीते रहो।
विक्टोरिया के चार उपनगर हैं. इन चारों की म्यूनिसिपाल्टीयां अलग अलग हैं। ये कभी किसी बात पर एकमत नहीं होती जिससे आये दिन राजनैतिक झगड़े होते रहते हैं। इनका स्वरूप तो स्थानीय होता है मगर लगता एसे है जैसे देश की संसद यहीं हो।
बस शीघ्र ही एक आलीशान कोलोनी से गुजरी, यहां बड़े बड़े बंगले अपने उत्कृष्ट स्थापत्य व वास्तुकला से सबका मन मोह रहे थे। ये सब भवन धनी मानी लोगों के थे जो अपने जीवन का संध्याकाल पूरा करने विक्टोरिया आ गये थे। विक्टोरिया का चायना टाउन भी बहुत पुराना है। अमेरिका व कनाडा का पश्चिमी तट चूंकि प्रशान्त महासागर पर अवस्थित है इसलिये सदियों से चीनी आव्रजकों का यहां आना लगा हुआ है। पश्चिमी तट पर बसे तमाम शहरों में चायना टाउन होता ही है। अपने विशिष्ठ रहन सहन, खान पीन की वजह से सब एक ही स्थान पर रहते थे, धीरे धीरे इनका कामकाज और व्यवसाय भी बढता रहा, यह भी इन्हीं इलाको तक सीमीत रहता इसलिये जगह जगह चायना टाउन उभरने लगे। यही हाल कई देशों में भारतीय आव्रजकों का भी है। भारतीय उपमहाद्वीप के लोग, चाहे वो भारत के हों, पाकिस्तान के, नेपाल या श्रीलंका के हों, सबकी जरूरते लगभग एक समान ही होती हैं इसलिये जहां जहां इनकी उपस्थिति बढ़ती गई वहां वहां लिटिल इण्डिया बनते गये। कुछ लोगों के सफल होते षडयंत्र के कारण अब इन लोगों को भारतीय उपमहाद्वीप बताने की बजाये साउथ एशियन कहना शुरू कर दिया गया है। इन्हें तो इण्डियन ओशन से भी तकलीफ है, उसे भी ये साउथ एशियन सी का नाम देना चाहते हैं। क्या पता, हमारी मूर्खताओं से जिस तरह भारतीय उपमहाद्वीप साउथ एशिया हो गया, कभी इण्डियन ओशन भी साउथ एशियन सी कहा जाने लगे।
Editorial

Editorial

Next Story