Pratahkal:Discipline is necessary for family, organization and nation:Acharya Mahashraman
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के छठे दिन अनुशासन दिवस पर अनुशासन का पाठ पढ़ाया और अनुशासन से जीवन के स्तर को उच्च बनाने की प्रेरणा दी।उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन, समाज आदि में प्रबन्धन, प्रशासन, व्यवस्था तभी अच्छी तरह संचालित हो सकती है, जब अनुशासन अच्छा हो। अनुशासन के अभाव में पूरी व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। अनुशासन है तो प्रशासन, शासन व व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।
अनुशासन के दो प्रकार बताए गए हैं-स्वानुशासन और परानुशासन। आदमी को पहले स्वयं पर अनुशासन करने का प्रयास करना चाहिए। जो आदमी स्वयं पर अनुशासन नहीं कर सकता, उस पर दूसरे अनुशासन कर सकते हैं तथा जो आदमी स्वयं पर अनुशासन कर सकता है तो वह दूसरों पर भी अनुशासन कर सकता है। गुरु और शिष्य को देखें तो जो शिष्य पहले गुरु की मर्यादा, व्यवस्था, सम्मान, समर्पण में रहता है, वह कभी उच्च पद को भी प्राप्त कर सकता है।
तेरापंथ धर्मसंघ (Terapanth Dharm Sangh) की आचार्य परंपरा को देखें तो हमारे आचार्य अपने पूर्वाचार्यों की अनुशासना में रहे तो वे भी कभी संघ के शास्ता, अनुशास्ता बने। आचार्यश्री के प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्या सम्बुद्धयशा ने भी उपस्थित जनता को उद्बोधित किया। तेरापंथ महिला मण्डल के तत्त्वावधान में आयोजित श्रुतोत्सव में राष्ट्रीय अध्यक्ष नीलम सेठिया व सुमतिचंद गोठी ने विचार रखे।
Editorial

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