Pratahkal:DRI sold Jeweler seized gold

मुंबई । जवेरी बाजार में एक जूलरी (Jeweler) शॉप से जब्त किया गोल्ड बेचने के मामले पर मुंबई उच्च न्यायालय (Mumbai High Court) ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के दो वरिष्ठ अधिकारियों से जवाबतलब किया है। अदालत चोकसी अरविंद ज्वेलर्स द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उसने जब्त किये गये गोल्ड से संबंधित सारे जरूरी दस्तावेज पेश कर दिये हैं, लिहाजा उसके जब्ती मेमो को निरस्त कर उसका गोल्ड उसे बेशर्त लौटा दिया जाये। जबकि इस बाबत डीआरआई को कई बार लिखित में निर्देशित करने के बाद भी जूलर को गोल्ड नहीं लौटाया गया था। दरअसल 12 मई को डीआरआई ने याचिकाकर्ता जूलर से 861 ग्राम वजन के 22 कैरेट गोल्ड काइन्स और 741 ग्राम से ज्यादा के 24 कैरेट के गोल्ड बार्स जब्त किये थे। डीआरआई का दावा था कि इस गोल्ड पर विदेशी मार्किंग है और इसकी मार्केट वैल्यू 97 लाख रुपये के आसपास है। वरिष्ठ खुफिया अधिकारी मनीष कुमार ने जब्ती मेमो जारी किया था। अधिकारियों ने जो मामला दर्ज किया था, उसके मुताबिक, एयरपोर्ट पर कुछ सूडानी नागरिकों की जांच की गई थी जिसमें उनसे गोल्ड डस्ट और गोल्ड बार्स के कटे हुए भाग बरामद हुये थे। जांच के क्रम में जूलर के जूलरी शॉप समेत कई ठिकानों पर डीआरआई ने छापेमारी की थी। इसी घटनाक्रम में जूलर के यहां से डीआरआई ने गोल्ड की जब्ती की थी। अधिकारी मनीष कुमार ने 11 अगस्त को जूलर को
लिखित जवाब दिया था कि कस्टम कानून के तहत निश्चित समय के भीतर उन्हें कारण बताओ नोटीस जारी किया जायेगा और उसके पश्चात जब्त माल के मालिक द्वारा दाखिल प्रतिवाद के आधार पर निर्णयन अधिकारी द्वारा मामले का निपटारा किया जायेगा। जूलर को संदेह था कि डीआरआई गोल्ड को बेच देगी। लिहाजा उसने उच्च न्यायालय में 11 सितंबर को याचिका दाखिल कर तत्काल राहत की मांग की थी। जूलर के वकीलों ने अदालत में इसे डीआरआई की मनमानी और निरकुंशता से भरी कार्रवाई होने का आरोप लगाया था। 20 सितंबर को डीआरआई के वकील ने अदालत को बताया कि डीआरआई ने 1 सितंबर को ही जब्त गोल्ड की बिक्री कर दी थी। अदालत ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। अदालत ने डीआरआई से पूछा है कि जब उसकी ओर से 11 अगस्त को लिखित में सूचित किया गया था कि कारण बताओ नोटीस जारी कर पूरी प्रक्रिया का पालन किया जायेगा तो ऐसे में जब्त माल की बगैर सुनवाई के सीधे बिक्री कैसे कर दी गई ? जबकि सुनवाई और निर्णय तक इसे कस्टडी में रखना मुमकिन था। अदालत ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों, खासतौर पर मनीष कुमार और अतिरिक्त महानिदेशक को शपथपत्र दाखिल कर अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

Editorial

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