पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव (vidhansabha election) बेहद करीब हैं और अगले साल की शुरूआत में लोकसभा चुनाव (loksabha election) होने हैं। इस बीच, तेलंगाना (telangana) विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने विवादित नेता टी राजा सिंह (T Raja Singh) की घर वापसी कराई और उन्हें टिकट दिया। उधर, मध्य प्रदेश (madhya pradesh) में आईएएस अधिकारी निशा बांगरे (Nisha Bangre) वीआरएस लेकर राजनीति में उतर रही हैं।
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टिकट न मिला, क्या करेंगी निशा बांगरे
मध्य प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर की नौकरी छोड़ निशा बांगरे औपचारिक तौर पर राजनेता बन गई हैं। बांगरे ने कांग्रेस (congress) का हाथ थाम लिया है, लेकिन यह भी साफ हो चुका है कि उन्हें कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने जा रहा। इसके बावजूद वह लगातार चर्चा में बनी हुई हैं। मूल रूप से बालाघाट की रहने वाली निशा ने साल 2010 से 2014 के बीच विदिशा के इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी की। लेकिन निशा महत्वाकांक्षी हैं। साल 2016 में वह मध्य प्रदेश पीएससी की परीक्षा में शामिल हुईं और उनका सिलेक्शन भी हो गया। लेकिन वह इतने से संतुष्ट नहीं हुई। छतरपुर के लवकुशनगर की एसडीएम निशा नौकरी छोड़ राजनीति में आना चाहती थीं। कई महीनों से वह इस ख्वाहिश का इजहार भी कर रही थीं । आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया, लेकिन इस बीच एक ट्विस्ट आ गया। प्रदेश की भाजपा सरकार ने उनका इस्तीफा तब मंजूर किया, जब कांग्रेस की ओर बैतूल की आमला सीट के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। दरअसल, कांग्रेस की ओर से उन्हें आमला से टिकट देने की अटकलें जोरों पर थीं। कहा जाता है कि आमला में लोगों के बीच उनका खासा एक्टिव रोल रहा है और निशा ने वहां अच्छा काम किया है। खैर, निशा बांगरे उस वक्त सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर बैंकॉक में सुरेश अग्रवाल के साथ भारतीय संविधान को साक्षी मानते हुए विवाह किया था। सरकार और निशा के बीच पहला विवाद इस साल 25 जून को दिखा, जब आमला में अंतरराष्ट्रीय सर्व धर्म शांति सम्मेलन को लेकर उन्होंने छुट्टी मांगी थी, जो उन्हें नहीं मिली । निशा ने इसे अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताया और रिजाइन कर दिया। सरकार ने ना सिर्फ उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया बल्कि उनके खिलाफ विभागीय जांच भी बिठा दी। खैर, कोर्ट के आदेश के बाद 23 अक्टूबर को निशा का इस्तीफा मंजूर किया गया। हालांकि अब जबकि निशा की चुनाव लड़ने की उम्मीदें कांग्रेस ने खत्म कर दी हैं तो उनकी उस बात को याद करना बेहद जरूरी है जो उन्होंने कुछ दिन पहले कही थी। निशा ने कहा था कि उन्होंने राजनीति में आने का फैसला कर लिया है। कांग्रेस मना करती है तो वह दूसरा ऑप्शन देखेंगी, लेकिन यह भी तय है कि भाजपा
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के साथ नहीं जाएंगी। निशा फटाफट फैसले लेने के लिए जानी जाती हैं। देखना है कि इन बदले हालात में वह क्या फैसला करती हैं।
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उग्र हिंदू नेता की छवि है टी राजा की
भाजपा (bjp) ने तेलंगाना (telangana) से अपने इकलौते विधायक टी. राजा (T Raje) को फिर इस बार उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवार बनाने से ठीक पहले पार्टी ने टी राजा का निलंबन रद्द किया। पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने पर पिछले साल उन्हें पार्टी से निलंबित किया गया था। तेलंगाना के पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा सिर्फ एक सीट पर जीती थी। गोशामहल से वह जीत टी राजा ने ही दिलाई थी। राजा वैसे पहले से ही विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। 2018 विधानसभा चुनाव के वक्त दिए गए हलफनामे के मुताबिक उन पर 43 मुकदमे दर्ज हैं। 2020 में नफरत फैलाने के मामले में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने टी राजा का अकाउंट बैन किया था । पिछले साल टी राजा ने स्टैंडअप कमीडियन मुनव्वर फारूकी के हैदराबाद शो के जवाब में सोशल मीडिया पर एक विडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने पैगंबर साहब पर विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार भी किया। लेकिन टी राजा की राजनीति ऐसी ही रही है । गोशामहल विधानसभा क्षेत्र के धूलपेट गांव में जन्मे इस भाजपा नेता की छवि हिंदूवादी लीडर की रही है। वह अक्सर मुस्लिमों के खिलाफ विवादित बयान देते रहे हैं। टी राजा पहले बजरंग दल के कार्यकर्ता थे। बाद में वह टीडीपी में शामिल हुए और इस पार्टी से नगर पार्षद भी बने। फिर उन्होंने भाजपा जॉइन की। भाजपा में शामिल होने के बाद वह गोशामहल से विधायक बने । लोध समुदाय से आने वाले टी राजा सिंह के समर्थक कहते हैं कि उनके नाम के आगे टी का मतलब टाइगर है, हालांकि उनके दिवंगत पिता नवल सिंह भी अपने नाम के आगे टी लगाते थे, जिसका मतलब ठाकुर से है। टी राजा सिंह का परिवार मूर्तियां बनाने का काम करता था और टी राजा भी राजनीति में आने से पहले यह काम कर चुके हैं। वह एक वक्त में ऑडियो-विडियो कैसेट भी बेचते थे । राजनीति में उनकी एंट्री 2009 में हुई। भाजपा में आने के बाद से टी राजा ने अलग छवि बनाई। इसी साल एक कार्यक्रम में उन्होंने ओल्ड हैदराबाद को मिनी पाकिस्तान बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर यहां के घरों की जांच की जाए तो हर घर में बम मिलेंगे। 2018 में जब रोहिंग्याओं को लेकर विवाद हो रहा था, तब टी राजा सिंह ने कहा था कि अगर रोहिंग्या भारत नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें गोली मार देनी चाहिए। उनके उस बयान को लेकर भी काफी चर्चा हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े बिना आप सच्चे हिंदू नहीं बन सकते ।
Editorial

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