Damodar Agarwal
उदयपुर. नगर संवाददाता | भाजपा (bjp) नेता और उप महापौर पारस सिंघवी (Paras Singhvi) ने भाजपा प्रदेश महामंत्री दामोदर अग्रवाल (Damodar Agarwal) के सिंघवी के चुनाव नहीं लड़ने के दावे को खारिज करते हुए कहा कि अग्रवाल से मात्र शिष्टाचार भेंट हुई थी। सिंघवी ने कहा कि भाजपा नेता से इस तरह का कोई वायदा नहीं किया गया था। सिंघवी की सोमवार को अपने कार्यकर्ताओं की बैठक का आयोजन किया जाएगा और इसके बाद ही कोई निर्णया लिया जाएगा।
उप महापौर पारस सिंघवी ने रविवार को विज्ञप्ति जारी कर चुनाव नहीं लड़ने की चल रही अफवाह पर विराम लगाते हुए कहा कि भाजपा के प्रदेश महामंत्री दामोदर अग्रवाल से शनिवार को केवल शिष्टाचार मुलाकात हुई थी। इस दौरान उन्होंने अपने पक्ष से उन्हे अवगत करवाया ।। सिंघवी ने भाजपा नेता दामोदर अग्रवाल से ताराचंद जैन को दिए गए टिकट को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भावनाओ एवं सामूहिक निर्णय के अनुसार ही अग्रिम कार्यवाई करने का कहा था । उपमहापौर ने कहा कि मेरे द्वारा अभी तक ऐसा कोई भी वादा नहीं किया गया है। मैं स्वयं किसी भी प्रकार से कोई भी निर्णय लेने में असक्षम हूं। सिंघवी ने कहा कि मेरा संपूर्ण निर्णय समर्थकों के अनुसार ही होगा। सिंघवी ने कहा मैं कभी भी चुनाव लड़ना है या नहीं लड़ना इसका कोई भी निर्णय नहीं ले सकता हूं। जो भी निर्णय होगा वह सामूहिक निर्णय होगा, जो मुझे स्वीकार करना होगा।
भाजपा उम्मीदवार ताराचंद जैन (Tarachand Jain) को लेकर पारस सिंघवी ने स्पष्ट किया कि पिछले 4 वर्षों में ताराचंद जैन ने उन्हें व्यक्तिगत परेशान किया गयाए कई तरह के पर आरोप लगाए गए। कई फर्जी पत्र लिखकर नगर निगम को भी साथ में बदनाम किया गया। सिंघवी ने कहा कि जबकि अब भाजपा के कुछ नेताओं ने मेरे से व्यक्तिगत द्वेषता रखते हुए पार्टी विरोधी रहे को प्रत्याशी बनाया गया। सिंघवी ने कहा कि एक बार फिर से संगठन अपने निर्णय पर विचार करें। ऐसे व्यक्ति को अपना उम्मीदवार बनाएं जिससे पार्टी को टूटने एवं खंडित होने से बचाया जा सके। सिंघवी ने कहा कि सोमवार को समर्थकों के साथ बैठक कर के निर्णय लिया जाएगा।
सिंघवी का फाईनल निर्णय आज
उप महापौर पारस सिंघवी निर्दलीय रूप से मैदान में उतरेंगे या नहीं इसका निर्णय सोमवार को होगा। उप महापौर सिंघवी अपने समर्थकों के साथ सोमवार को एक बैठक करेंगे। इस बैठक में वे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ चर्चा करेंगे और इसके बाद ही वे अपना निर्णय करेंगे।
Editorial

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