✕
सबसे उत्कृष्ट दान है अभयदान
By EditorialPublished on
आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद् (Terapanth Yuvak Parishad) के अधिवेशन का समापन हुआ। इसी के साथ 2023–2025 के लिए नवगठित कार्यकारिणी ने शपथ ली। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने भी इस अवसर पर प्रेरणा पाथेय प्रदान किया।

x

मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद् (Terapanth Yuvak Parishad) के अधिवेशन का समापन हुआ। इसी के साथ 2023–2025 के लिए नवगठित कार्यकारिणी ने शपथ ली। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने भी इस अवसर पर प्रेरणा पाथेय प्रदान किया।
अपने प्रवचन में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि सुंदरता अनेक संदर्भों में होती है और हर व्यक्ति सुंदर दिखाई देने का प्रयास भी करता है। शरीर को सजाने के लिए आभूषण का भी प्रयोग करता है। आभूषण से शरीरिक सौंदर्य तो बढ़ सकता है लेकिन गुणात्मकता नहीं। हम देखे संतों के पास कौनसा आभूषण है ? आभूषण बाहर का सौन्दर्य तो बढ़ा सकता है, पर भीतर का नहीं। चेहरे की सुन्दरता का कुछ तो महत्व हो सकता है, पर ज्यादा नहीं, यह तो मात्र चमड़ी है। मूलतः हमारी चेतना सुंदर होनी चाहिए। कंगन से हाथ सुंदर नहीं होता, हाथ सुंदर होता है दान देने से व दूसरों का दुःख दूर कर उन्हें चित्त समाधि पहुंचाने से। संयमी साधु को दान देना, शुद्ध दान देना आध्यात्मिक दान होता है। ज्ञान दान भी एक बड़ा दान है, लेकिन इस संसार में सबसे बड़ा व उत्कृष्ट दान है 'अभय दान'। यह सर्वश्रेष्ठ दान है। सिर का आभूषण होता है सद् गुरु के चरणों में शीश झुका देना व नम जाना। स्वाभिमानी हर किसी के सामने सिर नहीं झुकाता, पर त्यागी के सामने तो देवता भी शीश नवाते हैं।
अभातेयुप के निवर्तमान अध्यक्ष पंकज डागा ने नव निर्वाचित अध्यक्ष रमेश डागा को शपथ दिलाई। रमेश डागा ने नवगठित टीम की घोषणा कर सभी को शपथ दिलाई।

Editorial
Next Story
Related News
X
