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जीवन में हिंसा से बचने का प्रयास करें
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नन्दनवन (Nandanvan) में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दूसरे दिन को अहिंसा दिवस के रूप में आयोजित किया गया। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि अहिंसा (Nonviolence) एक व्यापक तत्त्व है। अहिंसा सर्व व्यापक है। भगवती अहिंसा सभी जीवों के लिए कल्याणकारी होती है। अहिंसा के कई स्तर होते हैं। एक साधु के लिए सर्वोच्च अहिंसा की बात बताई गई है। एक सामान्य गृहस्थ के लिए सामान्य स्तर की अहिंसा की बात बताई गई है।

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मुंबई । नन्दनवन (Nandanvan) में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दूसरे दिन को अहिंसा दिवस के रूप में आयोजित किया गया। मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने कहा कि अहिंसा (Nonviolence) एक व्यापक तत्त्व है। अहिंसा सर्व व्यापक है। भगवती अहिंसा सभी जीवों के लिए कल्याणकारी होती है। अहिंसा के कई स्तर होते हैं। एक साधु के लिए सर्वोच्च अहिंसा की बात बताई गई है। एक सामान्य गृहस्थ के लिए सामान्य स्तर की अहिंसा की बात बताई गई है।
हिंसा के तीन मार्ग बताए गए हैं। गृहस्थ अपने जीवन को चलाने आग का उपयोग करता है। सब्जी, फल, अनाज आदि का प्रयोग करता है। इसमें भी जीव हिंसा होती है, जिसे आरम्भजा हिंसा कहा जाता है। यह गृहस्थ के लिए अनिवार्य कोटि की हिंसा होती है। स्वयं की रक्षा, परिवार, समाज व राष्ट्र व राष्ट्र की रक्षा के लिए की जाने वाली हिंसा प्रतिरक्षात्मिकी हिंसा की श्रेणी में आता है। तीसरी हिंसा होती है-संकल्पजा। मन में आए आक्रोश, द्वेष और लोभ की भावना से की जाने वाली हिंसा त्याज्य है।
आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन के द्वारा यही संदेश दिया कि जितना संभव हो सके, आदमी को अपने जीवन में हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। अहिंसा की चेतना आदमी के भाव और व्यवहार में भी रहे। इससे आदमी की चेतना हिंसा रूपी पाप से बच सकती है। इस प्रकार आदमी अपने जीवन में भगवती अहिंसा की आराधना करे। उन्होंने इस संदर्भ में एक गीत का भी संगान किया।

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