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वो 'स्पेशल 40' सीटें, जो बढ़ाती है मोदी और गहलोत की धुकधुकी
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राजस्थान (rajasthan) विधानसभा चुनाव (vidhansabha election) को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपने दांव पेच आजमाने शुरू कर दिए हैं। 200 विधानसभा सीटों वाले राज्य में कांग्रेस जहां लगातार दोबारा सरकार बनाने के प्रयास में है तो भाजपा (bjp) किसी की सूरत में सत्ता पाने की जुगत में है। कांग्रेस जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (cm ashok gehlot) के चेहरे को आगे कर चुनाव में उतरी है तो वहीं भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) के नाम पर ही चुनाव में भाग्य आजमा रही है। ऐसे में हम आपको राजस्थान की उन 40 विधानसभा

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जयपुर (कार्यालय संवाददाता)। राजस्थान (rajasthan) विधानसभा चुनाव (vidhansabha election) को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपने दांव पेच आजमाने शुरू कर दिए हैं। 200 विधानसभा सीटों वाले राज्य में कांग्रेस जहां लगातार दोबारा सरकार बनाने के प्रयास में है तो भाजपा (bjp) किसी की सूरत में सत्ता पाने की जुगत में है। कांग्रेस जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (cm ashok gehlot) के चेहरे को आगे कर चुनाव में उतरी है तो वहीं भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (pm narendra modi) के नाम पर ही चुनाव में भाग्य आजमा रही है। ऐसे में हम आपको राजस्थान की उन 40 विधानसभा सीटों के बारे में बता रहे हैं जो ना केवल कांग्रेस बल्कि भाजपा के लिए सिरदर्द बना हुआ है। ये ऐसे विधानसभा सीटें हैं जिस पर 2018 में हुए चुनाव में 3 फीसदी से भी कम वोटों के अंतर से हार जीत का फैसला हुआ था। आइए इन 40 सीटों (Special 40' seats) के बारे में 7 बड़ी बातें बताते हैं:
(1) साल 2018 में इन 40 में से 31 सीटें ऐसी रहीं जिसपर कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला रहा। इस मुकाबलों में भाजपा ने 17 और कांग्रेस ने 15 सीटों महज कुछ वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। बाकी की 8 सीटों पर 4 निर्दलीय, 2 बहुजन समाज पार्टी, एक-एक सीट भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के उम्मीदवार ने मामूली वोटों से जीत दर्ज की थी। हालांकि 2018 के रिजल्ट के एक साल बाद बसपा के सभी विधायक कांग्रेस (congress) में शामिल हो गये।
(2) इन 40 सीटों में 16 जगहों के कैंडिडेट ने महज 2 से 3 फीसदी वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 11 ऐसे थे जिनका अंतर महज 1 से 2 फीसदी वोटों का रहा। वहीं 13 सीटें ऐसी रहीं जहां हार जीत का अंतर महज 1 फीसदी वोटों का रहा। 12 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) को मिले वोटों से भी कम रहा।
(3) आसींद विधानसभा सीट पर भाजपा लगातार 6 चुनावों से जीत रही थी। केवल 2003 में यहां से निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इस आसींद सीट पर 2018 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पार्टी जब्बार सिंह सांखला केवल 154 वोटों यानी 0.08 प्रतिशत अंतर से जीत पाए ।
(4) 2018 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट पीलीबंगा में महज 5 फीसदी वोटों के अंतर से हार जीत हुई। भाजपा के धर्मेंद्र कुमार ने कांग्रेस के विनोद कुमार पर 278 वोट (0.12% वोट) से जीत दर्ज की।
(5) मारवाड़ जंक्शन सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी खुशवीर सिंह केवल 245 वोटों (0.15%) के अंतर से जीते। खुशवीर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से अलग हुए थे ।
(6) विधानसभा की ये 40 सीटें भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनके रिजल्ट से सरकार बनने और विपक्ष में बैठने का रास्ता तय होता है। 2008 में नाथद्वारा सीट पर कांग्रेस के प्रत्याशी सीपी जोशी केवल एक वोट से चुनाव में हार गए थे। यानी इन 40 सीटों पर एक फीसदी वोटों का भी इधर से उधर होना घातक हो सकता है।
(7) 1998 के बाद से राजस्थान में कभी लगातार किसी एक पार्टी की सरकार नहीं बनी। ऐसे में अगर कांग्रेस को इस पैटर्न को ब्रेक करना है तो उसे इन 40 विधानसभा सीटों पर एक-एक वोट का हिसाब लगाना होगा । वहीं भाजपा भी सत्ता में वापसी के लिए इन 40 सीटों पर हरेक वोट का इंतजाम करने की कोशिश करेगी।

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