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विजयादशमी पर शहर में तीन स्थानों से निकले पथ संचलन
By EditorialPublished on
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) उदयपुर (udaipur) महानगर की ओर से विजयादशमी (Vijayadashami) पर उदयपुर में तीन स्थानों पर विजयादशमी उत्सव एवं संचलन (Vijayadashami celebration and movement) आयोजित किया गया। तीनों उत्सव में अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन ( weapon worship) किया गया, इसके पश्चात् अवतरण, काव्यगीत हुआ एवं बौद्धिक कर्तता का उद्बोधन हुआ, इसके पश्चात् संघ की प्रार्थना हुयी और पथ संचलन प्रारम्भ हुआ, संचलन मार्ग में जगह-जगह समाज जनों एवं सामाजिक संगठनों की ओर से पुष्प वर्षा कर भारत मा

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उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) उदयपुर (udaipur) महानगर की ओर से विजयादशमी (Vijayadashami) पर उदयपुर में तीन स्थानों पर विजयादशमी उत्सव एवं संचलन (Vijayadashami celebration and movement) आयोजित किया गया। तीनों उत्सव में अतिथियों द्वारा शस्त्र पूजन ( weapon worship) किया गया, इसके पश्चात् अवतरण, काव्यगीत हुआ एवं बौद्धिक कर्तता का उद्बोधन हुआ, इसके पश्चात् संघ की प्रार्थना हुयी और पथ संचलन प्रारम्भ हुआ, संचलन मार्ग में जगह-जगह समाज जनों एवं सामाजिक संगठनों की ओर से पुष्प वर्षा कर भारत माता की जयकारो के साथ पथ संचलन का स्वागत किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उदयपुर विभाग प्रचारक आनंद प्रताप सिंह ने सुखाड़िया विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजित विजयादशमी उत्सव में कहा कि विजयादशमी उत्सव शक्ति का महापर्व है। इस उत्सव का पौराणिक महत्व अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में जाना जाता है। इसी दिन प्रभु श्री राम ने रावण पर विजय प्राप्त की थी, भगवान शिव ने नौ दिनों तक शक्ति की उपासना की थी और उसके बाद शक्ति की स्वरूप मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया, अज्ञातवास के बाद विजयादशमी के दिवस पर ही पांडवों ने अपने अस्त्र बाहर निकाले और उनका पूजन किया था। संघ के संस्थापक डॉ हेडगेवार जी ने समाज को शक्तिसंपन्न बनाने के उद्देश्य से 1925 में विजयादशमी के दिन संघ की स्थापना की। डॉक्टर हेडगेवार (Doctor Hedgewar) ने चरितार्थ किया कि विचारों की क्रांति दूरगामी परिणाम लाती है। सेक्टर 4 स्थित विद्या निकेतन उत्सव में प्रान्त धर्मजागरण प्रमुख महिपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि रही है। इसकी अस्मिता, आत्मविश्वास और संस्कृति को छिन्न भिन्न करने के कई प्रयास हुए। सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose), लोकमान्य बालगंगाधर तिलक (Lokmanya Balgangadhar Tilak), चन्द्र शेखर आजाद और गुरु गोविंद सिंह (Chandra Shekhar Azad and Guru Gobind Singh), डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार (Dr. Keshav Baliram Hedgewar.) जैसे अनेकों महापुरुषों ने भारत भूमि के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। हरिदास जी की मगरी उत्सव में प्रान्त सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख डॉ. भारत भूषण ओझा ने अपने विचार रखें, डॉ. भारत भूषण ने सामाजिक समरसता, सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक सम्बल की बात कही और आव्हान किया की समाज विरोधी ताकतों द्वारा फैलाये जा रहे भ्रामक विमर्श को समाज को समझना होगा और उसका जवाब भी देना होगा, समाज की जागरूकता ही मज़बूत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।

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