Tarachand Jain
उदयपुर. नगर संवाददाता | भाजपा (bjp) के विधानसभा (vidhansabha) से प्रत्याशी ताराचंद जैन (Tarachand Jain) ने उप महापौर पारस सिंघवी के बार-बार सनातनी विरोधी होने का खंडन करते हुए कहा कि मैं भी सनातनी हूँ और सनातन (sanatan) की रक्षा के लिए संघ से जड़े थे और संघ के निर्देश पर भाजपा में आए। जैन (jain) का कहना है कि मैने कभी भाजपा सिम्बोल का विरोध नहीं किया और ना ही मेरे पर कभी भाजपा के विरोधी होने का आरोप लगा है। खुद गुलाबचंद कटारिया (Gulabchand Kataria) ने कभी मुझे भाजपा का विरोधी नहीं माना है। भाजपा की ओर से शहर विधानसभा से ताराचंद जैन को प्रत्याशी बनाया गया था, इसके बाद से ही उप महापौर पारस सिंघवी लगातार विरोध कर रहे है । पारस सिघंवी खुद का नाम कटने से आहत तो थेही पर ताराचंद जैन को टिकट मिलने से आक्रोशित भी हो गए। शनिवार को टिकट की घोषणा होने के बाद से ही सोमवार तक पारस सिंघवी ने लगातार ताराचंद के विरोध में जमकर कार्यक्रम किए और हर बार पारस सिंघवी
(Paras Singhvi)
ने तारांचंद जैन को सनातन का विरोधी भगवान, देवी-देवताओं व साधु-संतो में विश्वास नहीं है । इस पर मंगलवार को भाजपा प्रत्याशी ताराचंद जैन ने खुलकर जवाब दिया।
ताराचंद जैन ने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं सनातनी हूँ । सनतान की रक्षा के लिए ही पहले संघ से जुडे और शाखाओं में जाना शुरू किया। संघ में सनातन धर्म को लेकर ही काम किया जाता रहा है। जैन ने कहा कि कभी विधायक बनेंगे ऐसा सोचकर संघ में नहीं गए। राजनीति में कार्यकर्ता कम थे तो संघ के आदेश पर भाजपा में आए और भाजपा में भी यह सोचकर काम नहीं किया कि विधायक का टिकट मिलेगा। ताराचंद जैन ने कहा कि सनातन हमारा आधार है।
ताराचंद जैन ने कहा कि यदि मै सनातन विरोधी हूँ तो एक ऐसा काम बता दो सनातन के विरोध में किया हो । हर धार्मिक कार्यक्रम में किसी ना किसी रूप से जुड़ा रहता हूँ। चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से। भाजपा या उदयपुर में कोई यह नहीं कह सकता है कि मैं सनातन विरोधी हूँ। सिघंवी के आरोप पर भाजपा प्रत्याशी ताराचंद जैन ने कहा कि उनसे बात करने की कोशिश की जा रही है।
कभी भाजपा के सिम्बोल विरोधी नहीं रहा
उप महापौर पारस सिंघवी के बार-बार ताराचंद जैन के 12 साल तक भाजपा के विरोध में काम करने पर ताराचंद जैन ने कहा कि एक भी बार भाजपा विरोधी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि रही बैंक चुनाव की बात तो बैंक भाजपा का नहीं था और ना ही प्रदेश नेतृत्व की ओर से इस चुनाव को लेकर कोई दिशा-निर्देश आए थे। ऐसे में कोई भी बैंक चुनाव लड़ सकता था। बैंक चुनाव में भाजपा का सिम्बोल नही आया था। जैन ने कहा कि इसके बाद भी मैने अपना इस्तीफा संगठन को भेज दिया था तो खुद कटारिया ने कहा था कि बैंक चुनाव भाजपा संबंधित नहीं थे और उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। ताराचंद जैन ने कहा फिर भी मैं एक साल तक पार्टी कार्यालय नहीं गया।
Editorial

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