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'कुछ लोग भारत को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहतें' मोहन भागवत बोले- आने वाले चुनावों में होगी बांटने की राजनीति
By EditorialPublished on
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) (RSS) ने नागपुर (Nagpur) में अपना वार्षिक विजयादशमी उत्सव (Vijayadashami festival) आयोजित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan) रहे । सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने पारंपरिक दशहरा सभा को रेशिम बाग मैदान में संबोधित किया। दशहरे का यह प्रोग्राम संघ का एक प्रमुख कार्यक्रम होता है । पथ संचलन सुबह करीब 6.20 बजे सीपी और बरार कॉलेज गेट और रेशिमबाग मैदान (Reshimbagh Ground) से निकाला गया। आरएसएस की स्थापना सितंबर 1925 में दशहरा के दिन

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नागपुर ( एजेंसी )। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) (RSS) ने नागपुर (Nagpur) में अपना वार्षिक विजयादशमी उत्सव (Vijayadashami festival) आयोजित किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध गायक शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan) रहे । सरसंघचालक मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने पारंपरिक दशहरा सभा को रेशिम बाग मैदान में संबोधित किया। दशहरे का यह प्रोग्राम संघ का एक प्रमुख कार्यक्रम होता है । पथ संचलन सुबह करीब 6.20 बजे सीपी और बरार कॉलेज गेट और रेशिमबाग मैदान (Reshimbagh Ground) से निकाला गया। आरएसएस की स्थापना सितंबर 1925 में दशहरा के दिन केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। इस अवसर पर मोहन भागवत ने अयोध्या (Aayodhya) के राम मंदिर (Ram Mandir) से लेकर भारत मे आयोजित जी 20 तक की बात की। मोहन भागवत ने मणिपुर हिंसा और देश में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मणिपुर (Manipur) में हिंसा हो नहीं रहा है, करवाई जा रही है।
'अराजकता और अविवेक फैलाने का षड्यंत्र'
मोहन भागवत ने कहा कि कुछ विनाशकारी ताकतें समाज विरोधी अपने आपको सांस्कृतिक मार्क्सवादी या वोक यानी जगे हुए कहते हैं । परंतु मार्क्स को भी उन्होंने 1920 दशक से ही भुला रखा है। विश्व की सभी सुव्यवस्था, मांगल्य, संस्कार, तथा संयम से उनका विरोध है । मुठ्ठी भर लोगों का नियंत्रण सम्पूर्ण मानवजाति पर हो, इसलिए अराजकता व स्वैराचरण का पुरस्कार, प्रचार व प्रसार करते हैं। माध्यमों तथा अकादमियों को हाथ में लेकर देशों की शिक्षा, संस्कार, राजनीति व सामाजिक वातावरण को भ्रम व भ्रष्टता का शिकार बनाना उनकी कार्यशैली है। ऐसे वातावरण में असत्य, विपर्यस्त तथा अतिरंजित वृत्त के द्वारा भय, भ्रम तथा द्वेष आसानी से फैलता है। आपसी झगड़ों में उलझकर असमंजस व दुर्बलता में फंसा व टूटा हुआ समाज, अनायास ही इन सर्वत्र अपनी ही अधिसत्ता चाहने वाली विध्वंसकारी ताकतों का भक्ष्य बनता है। अपनी परम्परा में इस प्रकार किसी राष्ट्र की जनता में अनास्था, दिग्भ्रम व परस्पर द्वेष उत्पन्न करने वाली कार्यप्रणाली को मंत्र विप्लव कहा जाता है।
सांस्कृतिक मार्क्सवादी पुरस्कार देते हैं, बढ़ावा देते हैं, अराजकता और अविवेक फैलाते हैं। उनके तौर-तरीकों में मीडिया और शिक्षाविदों पर नियंत्रण रखना और शिक्षा, संस्कृति, राजनीति और सामाजिक वातावरण को भ्रम, अराजकता और भ्रष्टाचार में डालना शामिल है।
'अपना उल्लू सीधा करते हैं'
आरएसएस चीफ ने कहा कि भारत के उदय का उद्देश्य हमेशा से विश्व कल्याण रहा है। लेकिन, अपने सांप्रदायिक हितों की मांग करने वाली स्वार्थी, भेदभावपूर्ण और धोखेबाज ताकतें भी सामाजिक एकता को बाधित करने और संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए अपने स्वयं के प्रयास कर रही हैं। वे विभिन्न प्रकार के कपड़े पहनते हैं। दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो नहीं चाहते हैं कि भारत आगे बढ़े। वे भारत में अलगाव पैदा करने का प्रयास करते हैं। हम भी कभी-कभी उनके षडयंत्र में फंस जाते हैं। भारत (India) का उत्थान होगा तो दुख जाएगा, शोषण जाएगा, कलह खत्म होगी। किसी विचारधारा का आवरण ओढ़ लेते हैं। मन लुभावन उद्देश्य घोषित करते हैं लेकिन अपना उल्लू सीधा करते हैं ।
'मणिपुर में जो हो रहा है, करवाया जा रहा है'
हम इधर-उधर की घटनाएं देखते हैं, मणिपुर के हालात देखें, वहां यह सब कैसे हुआ ? इतने साल से मैतेई और कुकी साथ में रहते हैं। अचानक अलगाव की बातें कैसे हुईं ? इससे किसे फायदा है? मजबूत सरकार है और तत्पर भी है। शांति का प्रयास देखते ही कोई हादसा करवा दो तो दूरी बढ़ती है। हिंसा भड़कती है। हिंसा कौन भड़का रहा है ? यह देखें तो साफ है कि यह हो नहीं रहा है, करवाया जा रहा है। यह शांति का प्रश्न नहीं जोड़न के प्रश्न है।
'जुबान पर लगाम लगाना जरूरी' : हमें जुबान पर लगाम लगाना होगा। मेरा इशारा एक की तरफ नहीं है, हर किसी के लिए हैं। गुंडागर्दी होगी तो उसका इलाज एक ही है। शासन-प्रशासन का सहयोगी बनकर चलें। सावधान रहना है। आने वाले दिनों चुनाव होना है। गालियां चलेंगी। हथकंडे बढ़ेंगे। जहां उद्देश्य नहीं वहां भी उद्देश्य चिपाकर अपना काम बनाएंगे। खूब राजनीति होगी लेकिन उकसावे में नहीं आना है। भड़कना नहीं है। सबका अनुभव भारत की जनता के पास है। मतदान प्रचार के समय हथकंडों के चक्कर में हमें नहीं पड़ना है।
बस्ती का जिक्र और प्र.म. मोदी को दे गए संदेश : आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने सरकार की तारीफ करने के साथ ही यह भी कहा कि ठंडे दिमाग से यह सोचकर वोट दें कि किसने अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि ये नहीं मानना कि लड़ाई चल रही थी और अब सीजफायर हो गया। दरअसल उनका इशारा संघ के मुस्लिमों के बीच पहुंच बढ़ाने की तरफ था। संघ की तरफ से लगातार मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात हो रही है और इसे लेकर संघ के स्वयंसेवकों की तरफ से ही कई सवाल उठ रहे थे। भागवत ने कहा कि अविवेक, असंतुलन नहीं होना चाहिए। अपना दिमाग ठंडा रखकर सबको अपना मानकर चलना पड़ेगा। संघ प्रमुख ने कहा कि यह मानिसकता सही नहीं है कि उनकी वजह से हमें नहीं मिल रहा है या उनकी वजह से हम पर अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि विक्टिम हुड की मानसिकता से काम नहीं चलेगा। कोई विक्टिम नहीं है, उन्होंने कहा, वे कहते हैं मुझे किसी बस्ती में घर नहीं मिलता, इसलिए अपनी बस्ती में ही रहना होता है। एक ही देश में रहने वाले लोग इतने पराए हो गए? माना जा रहा है कि इस बयान के जरिए भागवत ने पीएम मोदी के मुसलमानों के बीच पहुंच बढ़ाने के कार्यक्रम को हरी झंडी दे दी है।
राम मंदिर से भी दे दिया बड़ा संदेश : भावगत ने कहा कि हमारे संविधान की मूल प्रति के एक पृष्ठ पर जिनका चित्र अंकित है, ऐसे धर्म के मूर्तिमान प्रतीक श्रीराम के बालक रूप का मंदिर अयोध्या जी में बन रहा है। अगले साल 22 जनवरी को मंदिर के गर्भगृह में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। व्यवस्थागत कठिनाइयों के तथा सुरक्षाओं की सावधानियों के चलते उस पावन अवसर पर अयोध्या में बहुत बड़ी संख्या में लोग नहीं रह पाएंगे। श्रीराम अपने देश के आचरण की मर्यादा के प्रतीक हैं, कर्तव्य पालन के प्रतीक हैं, स्नेह और करूणा के प्रतीक हैं। अपने-अपने स्थान पर ही ऐसा वातावरण बने राम मंदिर में श्रीरामलला के प्रवेश से प्रत्येक ह्रदय में अपने मन के राम को जागृत करते हुए मन की अयोध्या सजे और सर्वत्र स्नेह, पुरूषार्थ तथा सद्भावना का वातावरण उत्पन्न हो ऐसे, अनेक स्थानों पर परन्तु छोटे-छोटे आयोजन करने चाहिए।

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