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ताराचंद जैन को प्रत्याशी बना अपना कर्ज उतार गए कटारिया
By EditorialPublished on
उदयपुर (प्रा.सं.)। भाजपा (BJP) के शहर विधानसभा प्रत्याशी ताराचंद जैन (Assembly candidate Tarachand Jain) की घोषणा के पीछे असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया (Governor Gulabchand Kataria) का अहम योगदान है। ताराचंद जैन ने अपनी संप, वसुन्धरा राजे और गुलाबचंद कटारिया के बीच अच्छी तालमेल बनाए रखी, जिसका नतीजा है कि कटारिया भी ताराचंद जैन के टिकट के लिए अड़े रहे और ताराचंद जैन को उनकी 45 साल की तपस्या का फल मिला।
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उदयपुर (प्रा.सं.)। भाजपा (BJP) के शहर विधानसभा प्रत्याशी ताराचंद जैन (Assembly candidate Tarachand Jain) की घोषणा के पीछे असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया (Governor Gulabchand Kataria) का अहम योगदान है। ताराचंद जैन ने अपनी संप, वसुन्धरा राजे और गुलाबचंद कटारिया के बीच अच्छी तालमेल बनाए रखी, जिसका नतीजा है कि कटारिया भी ताराचंद जैन के टिकट के लिए अड़े रहे और ताराचंद जैन को उनकी 45 साल की तपस्या का फल मिला।
भाजपा (BJP) के वरिष्ठ नेता ताराचंद जैन असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया का खासमखास रहे है। करीब 45 साल से कटारिया और ताराचंद जैन के बीच में पारिवारिक संबंध है। अपने संघर्ष के समय में जब कटारिया संगठन का काम करते थे तब उनकी अनुपस्थिति में ताराचंद जैन कटारिया के परिवार की हर जरूरत का ध्यान रखते थे। जब कटारिया विधायक बने और बाद में जब मंत्री बने तो कटारिया ने भी ताराचंद का पूरा ध्यान रखा। हर बार ताराचंद जैन कटारिया के लिए एक अच्छे रणनीतिकार साबित हुए और जब भी कटारिया चुनाव लड़ते तो उनके चुनाव की एक बड़ी रणनीति ताराचंद जैन ही बनाते थे और इसका परिणाम यह रहा कि गुलाबचंद कटारिया को कभी हार का सामना नहीं करना पड़ा।
यह ताराचंद जैन की रणनीति का ही परिणाम था कि कटारिया उदयपुर शहर से चुनाव लड़ने के साथ-साथ अन्य सीटों पर जाकर भी प्रचार करते रहे और यहां पर ताराचंद जैन की रणनीति के अनुसार कटारिया चुनाव लड़ते रहे। यदि किसी कारण वश यदि ताराचंद जैन कटारिया से नाराज भी हो तो कटारिया किसी ना किसी रहे थे। तरह से ताराचंद जैन को मना ही लेते। कटारिया असम के राज्यपाल बने तो उदयपुर शहर में ताराचंद जैन का नाम विधायक प्रत्याशी के रूप में सामने आए। ताराचंद जैन लगातार असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया व पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के सम्पर्क में थे ताराचंद जैन की 45 वर्षों की तपस्या का ही परिणाम रहा कि कटारिया ने जाते-जाते ताराचंद जैन को टिकट दिलवाकर अपना कर्जा उतार दिया।
गुलाबबाग में कटारिया ने दिया ताराचंद को संकेत
हाल में ही असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया उदयपुर आए थे और यहां पर उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया था। उदयपुर में प्रवास के दौरान असम के राज्यपाल कटारिया और ताराचंद जैन एक दिन दोनों सुबह-सुबह वॉक करने के लिए गुलाब बाग गए थे। जहां पर कटारिया और ताराचंद के बीच में वॉक के दौरान आपस में चर्चा करते रहे थे। जानकारों के अनुसार ताराचंद और गुलाबचंद संभवतया पहली बार एक साथ गुलाबबाग घूमने के लिए थे, जहां पर दोनों के बीच इसी सीट को लेकर चर्चा हुई थी ।
वसुन्धरा राजे ने भी की थी कटारिया से चर्चा
अपने उदयपुर प्रवास के दौरान पूर्व मुयमंत्री वसुन्धरा राजे सिंघिया गत रविवार को त्रिपुरा सुंदरी जाने से पहले असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के घर पर भी गई थी, जहां कटारिया से करीब 40 मिनट तक एक बंद कमरे में चर्चा हुई थी। इसी दिन शाम को जब पूर्व मुयमंत्री वसुन्धरा राजे त्रिपुरा सुंदरी दर्शन कर उदयपुर आई और होटल ट्राईडेंट में रूकी थी। इस दौरान ताराचंद जैन अपने कुछ समर्थकों के साथ राजे से मिलने के लिए गए थे। 45 साल में एक बार विरोध में रहे थे कटारिया के साथ अपनी 45 साल की तपस्या में एक बार ताराचंद जैन खुलकर गुलाबचंद कटारिया के विरोध में आए थे। इस दौरान कमल मित्र मण्डल का गठन किया था। इसके साथ ही दी अरबन महिला कॉपरेटिव बैंक के चुनाव में ताराचंद जैन ने अपने अलग प्रत्याशी उतारे थे, हालांकि इस चुनाव में कटारिया द्वारा उतारे गए प्रत्याशियों की ही जीत हुई थी। जैन करीब 5 साल तक कटारिया से नाराज रहे थे।
45 साल में एक बार विरोध में रहे थे ।
कटारिया के साथ अपनी 45 साल की तपस्था में एक बार ताराचंद जैन खुलकर गुलाबचंद कटारिया के विरोध में आए इस दौरान कमल मित्र मण्डल का गठन किया वा इसके साथ ही दी अरबन महिला कॉपरेटिव बैंक के चुनाव में ताराचंद जैन ने अपने अलग प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इस चुनाव में कटारिया द्वारा उतारे गए प्रत्याशियों की ही जीत हुई थी। जैन करीब 5 साल तक कटारिया से नाराज रहे थे।
उपमहापौर नहीं बनाया तो हुए थे ।
नाराज वर्ष 2019 में कटारिया ने ताराचंद जैन को निगम में उप महापौर बनाने का आश्वासन देकर पार्षद का चुनाव लड़ाया लेकिन चुनाव के बाद पारस सिंघवी को उप महापौर बना दिया और ताराचंद जैन को निर्माण समिति अध्यक्ष वन दिया. जिससे ताराचंद जैन नाराज हो गए थे, लेकिन कटारिया ने फिर से मना लिया।

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