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नई दिल्ली (एजेंसी)। अपनी सरकारी योजनाओं में 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' (Everyone's support, everyone's development and everyone's trust) की नीति पर चल रही भाजपा चुनावी रणनीति में भी 'सबका साथ और सबका विश्वास' को लेकर चल पड़ी है। इसी प्रयास में भगवा खेमा मुस्लिम वर्ग के निकट जाने का भी लगातार प्रयास कर रहा है। यही वजह है कि पहले सिर्फ 65 संसदीय सीटों पर 'मोदी मित्र' बनाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन अब पार्टी ने देश की सभी 543 लोकसभा सीटों पर मुस्लिम वर्ग से 'मोदी मित्र' बनाने का निर्णय किया है।
2024 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव (loksabha election) के महामुकाबले के लिए सभी राजनीतिक दल कमर कसकर तैयार हैं। अधिकतर विपक्षी दलों ने मिलकर इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस बनाया है। भाजपा
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के विरूद्ध साझा उम्मीदवार उतारने की तैयारी है। विपक्ष अपनी इस रणनीति में उन सीटों को लेकर खास तौर पर आश्वस्त है, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। इनका मानना है कि ज्यादातर विपक्षी दल साथ होंगे तो भाजपा के विरूद्ध इन वोटों का बंटवारा नहीं होगा। वहीं, भाजपा भी इस वोटबैंक में सेंध लगाने के लिए पूरे जतन कर रही है। इस रणनीति की शुरूआत देश की उन चुनिंदा 65 सीटों से की गई थी, जहां मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक है। भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे को इस कार्यक्रम की कमान सौंपते हुए लक्ष्य दिया गया था कि हर विधानसभा क्षेत्र में 800 से एक हजार और लोकसभा क्षेत्र में पांच हजार मोदी मित्र मुस्लिम वर्ग से बनाने हैं। इसके लिए इन सभी संसदीय सीटों पर एक-एक केंद्रीय प्रभारी, एक-एक राज्य प्रभारी बनाए गए। विधानसभा
(vidhansabha)
क्षेत्रों में भी एक-एक प्रभारी और 30-30 सह- प्रभारी बनाए गए। प्रत्येक सह प्रभारी को 30 मोदी मित्र बनाने का जिम्मा सौंपा गया। प्रत्येक मोदी मित्र से 40 वोट भाजपा को दिलाने की अपेक्षा की जाएगी।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने बताया कि मुस्लिम वर्ग के उन लोगों को मोदी मित्र बनाकर प्रमाण पत्र दिया जा रहा है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) की नीतियों से प्रभावित हैं। 65 लोकसभा सीटों में प्रत्येक पर औसतन ढाई-तीन हजार मोदी मित्र बन चुके हैं। इसे देखते हुए ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (JP Nadda) ने अब सभी 543 लोकसभा सीटों पर मोदी मित्र बनाने का निर्देश दिया है। पार्टी का मानना है कि ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां योजनाओं के लाभ से कोई वर्ग वंचित रहा हो।
Editorial

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