Yatra Vrutant-Suresh Goyal-Pratahkal-Rajasthan

वेन्कूवर Vancouver : जहाज से उत्तरे दो-तीन घन्टे होने आये थे मगर अभी एसा ही लग रहा था जैसे जहाज के भीतर ही हों। क्रूज यात्रा की यादें जिन्दगी का एक अहम हिस्सा बन कर रह जायेंगी, पता नहीं फिर कभी एसा अवसर मिले न मिले मगर एक खुशी की बात यह हुई कि क्रूज पर्यटन के इच्छुक भारतवासियों को अब अपनी यह तमन्ना पूरी करने सिंगापुर या सियटल या हॉगकॉग जैसे दूरस्थ स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमारे अपने मुम्बई बन्दरगाह से अन्तर्राष्ट्रीय क्रूज शुरू हो रहे हैं तथा पहला क्रूज इसी 29 अक्तू. 16 को रवाना हो रहा है। सिर्फ क्रूज पकड़ने के लिये सिंगापुर तक की हवाई यात्रा का फिजूल का खर्चा अब बच जायगा ।
भारत की हजारों कि.मी. की तट रेखा और इतने बन्दरगाह होने के बावजूद यहां क्रूज पर्यटन का नहीं होना बहुत बड़ी कमी थी। अब तक तो सुरक्षा के नाम पर किसी सरकार ने यह क्षेत्र खोलने की हिम्मत नहीं की मगर मोदी सरकार के आते ही यह अपेक्षा की गई थी कि भारतवासियों द्वारा महज क्रूज यात्रा के लिये विदेश गमन से विदेशी मुद्रा और राजस्व की हानि हो रही है उस पर रोक लगाई जायगी।
29 अक्तू को मुम्बई के तट से 18 मंजिली विशाल जेन्टींग ड्रीम जहाज अपनी पहली यात्रा पर लहरों पर चल पड़ेगा। देश भर के लगभग 3 हजार यात्री इस जहाज में सैर करेंगे। मुम्बई से यह जहाज कोलम्बो होते हुए सिंगापुर जायगा। बड़ी बड़ी जहाज कम्पनियां जैसे कि नोरवेजियन स्टार, सिल्वर क्लाउड वगैराह के क्रूज मुम्बई से यात्री ले सकेंगे। नोरवेजियन स्टार का एक जहाज तो अलास्का यात्रा में लगातार हमारे साथ था।
2006 में जरूर मुम्बई से सुपर स्टार लिंबरा के 3-3 दिन के क्रूज चलते थे, बाद में वे बन्द कर दिये गये और लोगों को सिंगापुर जाने को मजबूर होना पड़ गया। अब कोस्टा नियो क्लासिका वापस 3-3 दिन के क्रूज शुरू कर रही है। ये एक बार में 1400 यात्री एक साथ ले जायेंगे। इनकी पहली यात्रा 22 दिस. से शुरू होगी। दो रात की यात्रा के ये टूर 30-40 हजार रू. में उपलब्ध हो सकेंगे। जेन्टींग ड्रीम के भी दो दिन के क्रूज 25 से 45 हजार में शुरू हो रहे हैं।
भारत में इस अक्तू. से शुरू होने वाला क्रूज सीजन अगले वर्ष की मई तक जारी रहेगा। नुम्बई से सिंगापुर के अलावा ओमान, इजरायल, जोर्डन, ग्रीस व इटली का 27 दिन का क्रूज, मुम्बई, अदन, स्वेज, ग्रीस का 20 दिन का तथा मुम्बई, मस्कत, दोहा, अबू धाबी, दुबई का 20 दिन का क्रूज भी शुरू होगा। मुम्बई, मंगलोर, कोचीन, माले का 7 दिन का और यही कोलम्बो के साथ 15 दिन का क्रूज भी है।
इसी तरह चेन्नई व कलकत्ता से भी क्रूज उपलब्ध है। चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर, रंगून, फुकेट, जार्ज टाउन, पोर्ट ब्लेग, सिंगापुर का 14 दिन का क्रूज है। कलकत्ता से बंगलादेश, म्यांमार, थाईलेण्ड का 15 दिन का कूज है।
मैं आज दिन तक भारत से क्रूज नहीं मिलने का रोना रोता रहा और अचानक एक साथ जब इतने क्रूज शुरू होने की जानकारी मिली तो यकीन नहीं हुआ। नेट खंगाला तो वाकई इन तमाम क्रूजों की बुकिंग शुरू थी। अब देखना यह है कि ये कितनी अच्छी सेवाएं दे पाते हैं और व्यावसायिक दृष्टि से कितने सफल रहते हैं। वैसे जेन्टींग ड्रीम विश्व स्तरीय जहाज है।
राजा खुशी से झूमता हुआ मेरे पास आया। गाड़ी मिल जाने से उसकी बांछें खिल गई थी। मैंने कहा कुछ खा पी लेते हैं, गुजराती परिवार अपना खाना खाकर कब का रवाना हो चुका था, पर अपने अचार की महक छोड़ गया था, इसी ने मेरी भूख जाग्रत कर रखी थी। टर्मिनल में खाने पीने के कई शानदार रेस्टोरेन्ट थे मगर सब नोन वेज ही थे, पिजा, फ्राईज जैसी चीजें भी नहीं थी। राजा ने कहा कि गाड़ी उठाते हैं और रास्ते में कहीं रूक कर कुछ खा लेंगे।
हमे भूमि तल से लेनी थी। हम तीन मंजिल उपर थे। नीचे जाने के लिये मगर सामान के साथ इनसे उतरना मुश्किल था, पास ही बड़े बड़े रोटर्स का बैंक था। एक लिफ्ट रोकी और सामान समेत हम एक दम नीचे के पर आ गये। राजा ने इस बार जी.पी.एस. भी ले लिया था, इसके अलग से 15 १ रोज के 45 डालर देने पड़े जबकि हमारे दोनों के मोबाईल में जी.पी.एस. था. नों के पास नेट भी था, पर हम दोनों इसे चलाने के मामले में भोंगे ही थे। राजा डाक्टर था, अमेरिका में रहता था फिर भी नेट चलाना तो दूर मेल तक नहीं भेज सकता था उपर से मेरे को कोसता कि इतने बड़े पत्रकार बने फिरते हो मगर जी.पी.एस. नहीं चला सकते। मैं यही कहता कि कभी चलाने का काम नहीं पड़ा इसलिये नहीं आता, एक बार पता चल जायगा तो यह भी आजायेगा। ऐसी ही मोक-झोंक चलती रहती।
इस बार भी एकदम नई गाड़ी ही मिली। हजार कि मी. भी नहीं चली होगी। ये कार रेन्टल कम्पनियां ज्यादातर नई गाड़ियां ही रखते हैं शायद। पेट्रोल फुल टेंक भरा था इसलिये हम तुरन्त निकल सकते थे। कार चलाते हुए वापस तीन मंजिल उपर आये और सड़क पकड़ने लगे, वेनकूवर के लिये किधर जाना है कुछ पता नहीं था। मैंने कहा जी.पी.एस. किस काम का, मगर उसे चलाये कौन। तभी कार रेन्टल की एक कर्मचारी नजर आ गई। राजा ने उससे प्रार्थना की कि गाड़ी का जी. पी. एस. सेट कर दें। हम वेनकूवर जा रहे थे, डा. कुलवन्त के घर राजा ने उसे पूरा पता बता दिया। महिला ने सब उस में भर दिया और समझा दिया कि इस वक्त हम यहां खड़े हैं, उसने एक निशान बताया। इस निशान के सहारे आगे बढते रहो आप कुलवन्त के घर पहुँच जाओगे।
हमने उस लड़की को धन्यवाद दिया और निशान के सहारे आगे बढ़ने लगे। शीघ्र ही हम एयरपोर्ट के इलाके से बाहर निकल गये और सीएटल के उत्तर में आगे बढ़ने लगे। सड़क पर भी वेन्कूटर के रोड साइन्स आ रहे थे। राजा की खुशी का पारावार नहीं था अब वो मुझे चिढ़ाने लगा, बस लें लें, ट्रेन ले लें, देखा गाड़ी की बात ही और है मैं चुपचाप उसे मजे लेते देखता रहा और चेतावनी दे दी कि हम वापस कनाडा जा रहे हैं, कनाडा का एक चालान तो अभी भरना बाकी ही है, कहीं एक और न मिल जाये, ध्यान रखना।
धीरे धीरे सीएटल शहर पीछे छूट गया। सड़क के दोनों तरफ घनी वनस्पति और पार्श्व में पहाड़ों की श्रृंखला, एसा लग रहा था जैसे मेवाड़ के ही किसी इलाके में हों। रास्ते में जगह जगह छोटे छोटे उप नगरों के बोर्ड आ रहे थे. इनके साथ ही वहाँ उपलब्ध होटलों, रेस्टोरेन्टों के बोर्ड भी थे। हर जगह पीजा हट बर्गर किंग थे। किसी एक स्थान पर गाड़ी हाईवे से मोड़ कर अन्दर घुसने की सोची। राजा को टेन्शन हो गया कि रास्ता छोड़ देंगे तो जी.पी.एस. तो गड़बड़ नहीं हो जायगा। मैंने कहा कि हो जायगा तो किसी से प्रार्थना कर वापस सेट करा लेंगे। कुछ खाना-पीना तो जरूरी है। आखिरकार राजा के भी बात समझ में आ गई और अगली बार ज्यू ही किसी छोटे नगर के बोर्ड आना शुरू हुए, उसने एक्जीट लेकर गाड़ी उस दिशा में मोड़ दी।
Editorial

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