Congress 2024 election strategy
नई दिल्ली (एजेंसी)। जब भाजपा (BJP) के खिलाफ विपक्षी दलों ने गठबंधन इंडिया (alliance india) में हाथ मिलाया तब सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल उठे थे पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव में यह आशंका सही साबित हो रही है। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी की दावेदारी को खारिज कर दिया। 230 सदस्यों वाली मध्यप्रदेश (MP) विधानसभा की पहली लिस्ट मैं कांग्रेस ने उन 5 सीटों पर भी कैंडिडेट उतार दिया, जहां समाजवादी पार्टी दावा कर रही थी कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी की ओर से 2018 में जीती गई सीट बिजावर से भी चरण सिंह यादव को टिकट थमा दिया। 2018 में समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार 67 हजार के अधिक वोटों से बिजावर सीट पर जीत दर्ज की थी। अब सपा मध्यप्रदेश में 9 सीटों पर कैंडिडेट उतारेगी और भाजपा के साथ कांग्रेस से भी मुकाबला करेगी। खुद अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव ने मध्यप्रदेश में चुनाव लड़ने को मंजूरी दी। चर्चा है कि कांग्रेस राजस्थान में भी एकतरफा लिस्ट जारी कर सकती है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय पार्टी बनने की चाह रखने वाली समाजवादी पार्टी भी राजस्थान में जोर आजमाइश करेगी।
राष्ट्रीय पार्टी बनना चाहती है समाजवादी पार्टी
राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सहयोगी दलों की अनदेखी का फैसला कांग्रेस के लिए अच्छा नहीं है। लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन इंडिया का बड़ा फेल्योर साबित हो सकता है। भले ही समाजवादी पार्टी फ्रेंडली फाइट करे, नुकसान कांग्रेस को ही होगा ध्यान रखने की बात यह है कि एक और कांग्रेस अपने जनाधार वाले राज्यों में समाजवादी पार्टी के दावे को ठुकरा रही है, जबकि खुद उत्तरप्रदेश में 2009 में जीती गई 21 सीटों पर चुनाव लड़ने की मंसूबे पाले बैठी है। भाजपा को हराने के लिए त्याग सिर्फ इंडिया के सहयोगी करेंगे या कांग्रेस भी करेगी? यह सवाल आने वाले लोकसभा चुनाव में पंचदा ही जाएगा। कांग्रेस ने पांच राज्यों में राजनीतिक हैसियत के आधार पर कैंडिडेट का फैसला किया है। चर्चा है कि समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में 5 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। अगर कांग्रेस अभी हैसियत वाले फार्मूले पर अड़ी रही तो यूपी में कांग्रेस से अधिक जनाधार रखने के कारण सपा तय करेगी कि वह इंडिया के सहयोगियों को कितनी सीटें देगी ?
यूपी में कांग्रेस किस हक से मांगेगी 21 सीट
कांग्रेस ने सीट बंटवारे की समस्या अभी नहीं सुलझाई तो लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन में सीटों को लेकर मतभेद होना लाजिमी है। सबसे अधिक जनाधार होने का सिद्धांत उसे यूपी के अलावा पश्चिम बंगाल, पंजाब, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और बिहार में झटका दे सकता है। इन राज्यों में 282 लोकसभा सीटें हैं, जहां इंडिया के दूसरे दल कांग्रेस से ज्यादा मजबूत स्थिति में है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी के पास 22 और कांग्रेस के पास महज 2 लोकसभा सीटें हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का वजूद नहीं है। विधानसभा चुनाव में टीएमसी को 48 फीसदी वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 12.25 प्रतिशत वोट मिले थे। यूपी में समाजवादी पार्टी के 5 लोकसभा सदस्य हैं जबकि विधानसभा में 111 सीटों पर कब्जा है। यूपी में कांग्रेस के खाते में एक लोकसभा और दो विधानसभा सीट ही है। उत्तर प्रदेश में सपा के पास 32 प्रतिशत वोट हैं, जबकि कांग्रेस को 2.3 फीसदी वोट मिले थे। मजबूत जनाधार के सिद्धांत से यूपी में इंडिया गठबंधन के पार्टनर के तौर पर चुनिंदा सीट ही मिल सकती है।
बिहार में लालू के सहारे कितनी सीट लेंगी कांग्रेस
बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और कांग्रेस के खाते में एक भी सीट नहीं है। विधानसभा में 19 सीटें हैं, वह भी राजद से गठबंधन के बाद ही मिली है। 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में 9.7 फीसदी वोट ही मिले हैं।
Editorial

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