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राजस्थान, आंध्र के ये नेता सुर्खियों में क्यों
By EditorialPublished on
राजस्थान (Rajsthan) के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में सांसद दीया कुमारी को टिकट दिए जाने के बाद राजस्थान में उन्हें भाजपा (BJP) का भविष्य का चेहरा बताया जा रहा है। उधर, आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के जेल जाने के बाद फिल्म स्टार से नेता बने पवन कल्याण ने भाजपा का समर्थन न मिलने की शिकायत करते हुए पहले तो एनडीए से अलग होने की धमकी दे डाली, फिर इसका खंडन भी कर दिया ।

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राजस्थान (Rajsthan) के विधानसभा चुनाव (Assembly Election) में सांसद दीया कुमारी को टिकट दिए जाने के बाद राजस्थान में उन्हें भाजपा (BJP) का भविष्य का चेहरा बताया जा रहा है। उधर, आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) में चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के जेल जाने के बाद फिल्म स्टार से नेता बने पवन कल्याण ने भाजपा का समर्थन न मिलने की शिकायत करते हुए पहले तो एनडीए से अलग होने की धमकी दे डाली, फिर इसका खंडन भी कर दिया ।
दीया कुमारी ले पाएंगी राजे की जगह?
भाजपा सांसद दीया कुमारी (Diya Kumari) को पार्टी ने राजस्थान विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया है। इससे जो बातें शुरू हुईं वे विधायकी तक सीमित नहीं रहीं। अब चर्चा यह गरम है कि क्या भाजपा उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विकल्प के तौर पर देख रही है। वसुंधरा की तरह दीया कुमारी भी राजपरिवार से आती हैं। वह जयपुर के अंतिम शासक महाराजा मान सिंह द्वितीय की पोती हैं। दीया कुमारी के पिता भवानी सिंह भारतीय सेना में अधिकारी थे और होटल व्यवसायी भी। सेना के अधिकारी की बेटी होने के नाते दीया का बचपना शाही ठाठबाट से दूर गुजरा।
दीया कुमारी ने खुद अपने एक आर्टिकल में लिखा है, मुझे बेहद अनुशासित रखा गया था । मुझे कभी लगा ही नहीं कि मैं शाही खानदान से हूं या कोई खास हूं।' दीया कुमारी ने दिल्ली मॉडर्न स्कूल, मुंबई के जीडी सोमानी मेमोरियल स्कूल और जयपुर के महारानी गायत्री देवी गर्ल्स पब्लिक . स्कूल से पढ़ाई की है। उन्होंने लंदन के पार्संस आर्ट एंड डिजाइन स्कूल से डिप्लोमा भी किया है। दीया कुमारी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट नरेंद्र सिंह राजावत से शादी की। नरेंद्र सिंह राजावत उनके राजमहल में ही अकाउंट का काम देखते थे । यह शादी खासी चर्चित भी हुई थी। उनके तीन बच्चे हैं। सबसे बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह को दीया कुमारी के पिता भवानी सिंह ने गोद लिया और जयपुर राजशाही साम्राज्य का उत्तराधिकारी घोषित किया। दीया कुमारी दावा करती हैं कि उनका खानदान भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज है। उनका दावा है कि इससे जुड़ी हस्तलिखित वंशावली और दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं। अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत दीया कुमारी ने भाजपा से की। 2013 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस वक्त उनकी और भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह तथा वसुंधरा राजे की मौजूदगी में दीया कुमारी ने भाजपा की सदस्यता ली। 2013 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें सवाई माधोपुर से उम्मीदवार बनाया और दीया कुमारी ने जीत दर्ज की। 2019 में पार्टी ने उन्हें राजसमंद सीट से लोकसभा का टिकट दिया और दीया कुमारी जीतकर संसद पहुंचीं।
दीया कुमारी अब राजस्थान की विद्याधर नगर सीट से भाजपा की विधानसभा उम्मीदवार बनी हैं। राजस्थान में राजपूत वोटरों की तादाद काफी अधिक है। ऐसे में भाजपा इन्हें नए राजपूत चेहरे के रूप में भी प्रॉजेक्ट करना चाहती है। वह तब भी चर्चा में आई थीं जब उन्होंने दावा किया था कि ताजमहल उनके परिवार का था और मुगल बादशाह शाहजहां ने उस पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास इससे जुड़े साक्ष्य और दस्तावेज भी हैं ।
सियासी दुनिया के भी स्टार हैं पवन
पवन कल्याण (Pawan Kalyan) आंध्र प्रदेश के एक प्रभावशाली फिल्म परिवार से आते हैं। समाज में उनकी पहचान एक अभिनेता, राजनीतिज्ञ, फिल्म मेकर, मार्शल आर्ट के जानकार और समाजसेवी के रूप में होती है। पिछले दिनों खबर आई थी कि उनकी पार्टी जनसेना एनडीए से अपना गठबंधन तोड़ने वाली है, लेकिन हाल ही में पवन ने सफाई दी कि ऐसा कुछ नहीं है, वह आज भी एनडीए के साथ हैं। टीडीपी नेता चंद्रबाबू नायडू की गिरफ्तारी का विरोध करने और नायडू के प्रति समर्थन जताने जा रहे कल्याण को एहतियातन गिरफ्तार भी किया गया था। जनसेना पार्टी का दावा है कि 2024 के आंध्र प्रदेश असेंबली चुनाव में वह टीडीपी के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी और वायएसआर कांग्रेस सरकार का सफाया करेगी।
मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी (Chief Minister Jaganmohan Reddy) ने कहा कि पवन कल्याण पत्नी बदलते रहते हैं। बता दें कि कल्याण ने कुल तीन शादियां की हैं। पवन कल्याण फिल्मों में अलग तरह की एक्टिंग और खास मैनरिज्म के लिए जाने जाते हैं। अभिनय के लिए उन्हें तमाम प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। पवन कल्याण भाजपा के सहयोगी हैं, उन्होंने राजामुंदरी सेंट्रल जेल में टीडीपी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात के बाद गठबंधन की घोषणा की थी। उन्हें उम्मीद है कि भाजपा भी उनके साथ आएगी। वाईएसआरसीपी के सभी 175 विधानसभा सीटें जीतने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए जनसेना पार्टी नेता ने कहा कि वह 15 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी। उन्होंने कहा कि यह राज्य के हित में है कि वह वाईएसआरसीपी विरोधी वोटों के विभाजन से बचने की कोशिश कर रहे हैं। अभिनेता- राजनेता ने कहा कि उन्हें कभी भी पैसे और जमीन में दिलचस्पी नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि नैतिक साहस के साथ वह अधिक शक्तिशाली जगन मोहन रेड्डी से लड़ रहे हैं। यह कहते हुए कि उनकी पार्टी को पिछले 10 वर्षों में कई झटके लगे, पवन कल्याण ने कहा कि वह मूल्यों के लिए पार्टी चला रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री का पद या इससे भी बड़ा पद मिलता है। तो वह इसे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह सत्ता के लिए बेचैन नहीं हैं, बल्कि लोगों की भलाई और राज्य के अच्छे भविष्य के लिए काम करना चाहते हैं। पवन कल्याण ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी अच्छे शासक हैं, तो उन्हें सड़कों पर उतरने की कोई जरूरत नहीं है। बेरोजगारों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जगन सरकार शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित करने में विफल रही है। उन्होंने वादा किया कि वह उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे। तेलुगू सिनेमा के सुपरस्टार चिरंजीवी और एक्टर, फिल्म मेकर नागेंद्र बाबू पवन के सगे बड़े भाई हैं। कहा जाता है कि चिरंजीवी से प्रभावित होकर ही पवन कल्याण ने फिल्मों में आने का फैसला किया। कराटे में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुके पवन कई मार्शल आर्ट विधाओं के जानकार हैं। पवन का जन्म 1971 में आंध्र प्रदेश के बापट्ला जिले में हुआ था। बड़े भाई चिरंजीवी ने प्रजा राज्यम नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई तो पवन 2008 में उनके साथ हो लिए। वह पार्टी की युवा शाखा राज्य युवाराज्यम के अध्यक्ष बने । उसके बाद वह लगातार पार्टी की मजबूती के लिए काम करते रहे। 2011 में जब चिरंजीवी ने कांग्रेस में अपनी पार्टी का विलय किया तो कल्याण ने खुद को राजनीति से दूर कर लिया। 2014 में उन्होंने अपनी पार्टी जनसेना का गठन किया और तबसे वह आंध्र प्रदेश सरकार की नीतियों का खुलकर विरोध कर रहे हैं। 2014 में उनकी पार्टी एनडीए का हिस्सा बनी। 2019 के आम और असेंबली चुनाव में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उन्होंने टीडीपी और एनडीए गठबंधन के पक्ष में प्रचार किया। उस चुनाव में उन्होंने गाजूवाका और भीमावरम विधानसभा सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ही जगह हार का सामना करना पड़ा। उस असेंबली चुनाव में उनकी पार्टी को एक सीट जरूर मिली।
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