Israel-Hamas Conflict
नई दिल्ली (एजेंसी)। इजरायल (Israel) और हमास (Hamas) के बीच जंग (War) में भले ही फॉस्फोरस बम (phosphorus bomb) चल रहे हों लेकिन भारत (India) में इसे लेकर सियासत बंट गई है। प्र.म. मोदी (P.M. Modi) के नेतृत्व (Leadership) वाली सरकार (Government) ने हमास (Hamas) की आलोचना करते हुए इजरायल (Israel) का पक्ष लिया तो वहीं कांग्रेस (Congress) अब फिलिस्तीनी नागरिकों (Palestinian citizens) के अधिकारों की बात कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ट्वीट कर कहा कि भारत (India) आतंकवाद के हर रूप की निंदा करता है। इस मुश्किल घड़ी में भारत (India) के लोग इजरायल के साथ मजबूती से खड़े हैं। सरकार के इस रुख के बाद भारत में अब सियासी जंग छिड़ गई है। इजरायल और हमास की लड़ाई ने देश में भारतीय जनता पार्टी बनाम कांग्रेस (Congress) का रूप ले लिया है। भाजपा (BJP) जहां खुलकर इजरायल का समर्थन कर रही है तो वहीं कांग्रेस फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों की बात कर रही है। भाजपा (BJP) ने कांग्रेस (Congress) को निशाने पर ले लिया है तो वहीं कांग्रेस (Congress) पिछली सरकारों के रुख और पुराने नेताओं के बयान याद दिला रही है।
इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध पर क्या है कांग्रेस का स्टैंड
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इसे लेकर संतुलित प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। रमेश ने इजरायल पर हमास के हमले की निंदा तो की लेकिन साथ ही फिलिस्तीनी नागरिकों के अधिकारों की बात भी की। कांग्रेस के इस रुख का पार्टी के भीतर ही विरोध शुरू हो गया। पार्टी ने बाद में सीडब्ल्यूसी की बैठक में प्रस्ताव पारित कर तत्काल संघर्ष विराम का आह्वान किया और ये कहा कि हम फिलिस्तीनी नागरिकों के जमीन, स्वशासन और आत्म-सम्मान के साथ जीने के अधिकार के लिए अपना दीर्घकालिक समर्थन दोहराते हैं।
सीडब्ल्यूसी से प्रस्ताव पारित होने के बाद कांग्रेस, भाजपा नेताओं के निशाने पर आ गई। तेजस्वी सूर्या से लेकर मनोज तिवारी तक, भाजपा के नेता कांग्रेस पर आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप लगाने लगे। सूर्या ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले भारत की विदेश नीति किस तरह से अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति की बंधक थी, सीडब्ल्यूसी में पारित प्रस्ताव इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण है।
कांग्रेस याद दिला रही वाजपेयी कारुख
भाजपा के नेता जिस तरह से कांग्रेस प्रस्ताव को अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति और आतंकवाद के समर्थन से जोड़ रहे हैं, कहा जा रहा है कि कांग्रेस इसका ध्यान रखते हुए शुरू से ही संतुलित रूख अपनाए हुए थी। कांग्रेस के जयराम रमेश ने बयान में जहां हमास के हमले को निंदा की वहीं, पार्टी ने सीडब्ल्यूसी से पारित प्रस्ताव में हमास या इजरायल का जिक्र करने से परहेज किया। भाजपा के हमलों के जवाब में कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का रुख याद दिलाया और कहा कि उन्होंने भी कई मौकों पर फिलिस्तीनी नागरिकों के हितों का समर्थन किया था। कांग्रेस अब भाजपा को वाजपेयी का वो भाषण भी याद दिला रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि इजरायल ने अरबों की जिस जमीन पर कब्जा कर रखा है, उसे खाली करना होगा। भारत ने साल 1947 में इजरायल को अलग देश बनाए जाने का भी संयुक्त राष्ट्र में विरोध किया था। आजादी के बाद से लेकर अब तक भारत की छवि फिलिस्तीन के मित्र देश की रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफात को राखी बांधती थीं और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार भी फिलिस्तीन के नागरिक हितों की बात करने में नहीं हिचकी ।
Editorial

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