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एम्स जोधपुर द्वारा पित्ताशय कैंसर का रोबोटिक पद्धति से उपचार
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जोधपुर (कासं ) । एम्स (AIIMS) जोधपुर (Jodhpur) में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (Surgical Gastroenterology) विभाग (Department) के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव वार्ष्णेय (Dr. Vaibhav Varshney) ने बताया यदि इस कैंसर के मरीज़ प्रारंभिक स्टेज में होते है तो उनकी उपचारक सर्जरी संभव है। आमतौर पर, पित्ताशय के कैंसर की सर्जरी के लिए पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में 20 सेमी बड़ा चीरा लगाना पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ जाता है, रिकवरी में देरी होती है और लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है। हाल ही में, पित्ताश

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जोधपुर (कासं ) । एम्स (AIIMS) जोधपुर (Jodhpur) में सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी (Surgical Gastroenterology) विभाग (Department) के अतिरिक्त प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. वैभव वार्ष्णेय (Dr. Vaibhav Varshney) ने बताया यदि इस कैंसर के मरीज़ प्रारंभिक स्टेज में होते है तो उनकी उपचारक सर्जरी संभव है। आमतौर पर, पित्ताशय के कैंसर की सर्जरी के लिए पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में 20 सेमी बड़ा चीरा लगाना पड़ता है, जिससे दर्द बढ़ जाता है, रिकवरी में देरी होती है और लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है। हाल ही में, पित्ताशय के कैंसर का इलाज दुनिया भर में मिनिमली इनवेसिव विधि जैसे की लैप्रोस्कोपी और रोबोटिक सर्जरी दोनों द्वारा सफलतापूर्वक किया गया है। विभाग में आए जालौर जिले के निवासी 61 वर्षीय सज्जन की पूर्णरूप से रोबोटिक रेडिकल कोलेसिस्टेक्टोमी सर्जरी की गई। इस सर्जरी में मरीज की पित्ताशय, लिवर का एक हिस्सा हटा दिया गया, 3 घंटे 30 मिनट तक चली इस सर्जरी में केवल चार 8 मिमी छोटे चीरों और न्यूनतम रक्तस्राव के साथ की गई।
मरीज ने अगले दिन से ही बिना किसी परेशानी के मुँह से खाना लेना शुरू कर दिया और दो दिनों के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। राजस्थान में पहली बार रोबोटिक सर्जरी द्वारा पित्ताशय के कैंसर का पूर्ण इलाज किया गया है। एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर माधवानंद कर ने पूरी सर्जिकल टीम को बधाई दी, यह भी कहा कि हेपेटोबिलरी कैंसर के इलाज के लिए मिनिमली इनवेसिव विधि रोगियों के लिए बहुत ही सुरक्षित और फायदेमंद है। रोबोटिक विधि का उपयोग करके सर्जरी छोटे चीरों के माध्यम से की जा सकती है। ऑपरेशन के बाद मरीज को अपेक्षाकृत दर्द कम होता है, जिससे उसकी रिकवरी जल्दी से होती है। उनके पेट पर सर्जरी के छोटे चीरे होने के कारण कुछ ही महीनों के बाद वे चीरे स्पष्ट नहीं दिखते हैं। इस कारण ही रोबोटिक सर्जरी के बाद बिना किसी देरी के कैंसर कीमोथेरेपी भी शुरू की जा सकती है। एम्स जोधपुर सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग नियमित रूप से मिनिमली इनवेसिव विधि ( रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक तकनीक) का उपयोग करके आहार नाल, पेट, लीवर, अग्न्याशय, और बड़ी आंत के कैंसर के लिए सर्जरी कर रहा है। पित्ताशय का कैंसर दुनिया भर में एक बहुत ही घातक और तेजी से फैलने वाली बीमारी है। प्रारंभिक अवस्था में पित्ताशय के कैंसर के लक्षण अस्पष्ट होते हैं, पित्ताशय के कैंसर का एक सामान्य लक्षण पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द होना है।

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