Professor Amerika Singh Clean Chit
नगर संवाददाता. उदयपुर । मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (Mohanlal Sukhadia University) के पूर्व कुलपति प्रो. अमेरिकासिंह (Former Vice Chancellor Prof. America Singh) के लिए सोमवार को एक बार फिर राहत भरी खबर आई और राज्यपाल कलराज मिश्र ने प्रो. सिंह के कार्यानुभव के मामले में जांच के बाद क्लीनचिट (Clean Chit) देते हुए मामले को नस्तीबद्ध किया है। साथ ही स्पष्ट किया गया कि प्रो. अमेरिका सिंह को प्रोफेसर के पद पर 10 वर्ष से अधिक समय का कार्यानुभव है। ऐसे में उदयपुर (Udaipur) में उनके कार्यकाल के दौरान आरोप लगाने वालों पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं कि उन्होंने बिना किसी तथ्य के आरोप लगा दिए थे या फिर किसी राजनीतिक हवा में बह कर आरोप लगाए थे। सवाल उठाने वालों में राजस्थान की राजनीति के एक बड़े प्रभावशाली राजनेता सहित शहर के कई बड़े नेता और शिक्षा जगत के कई बड़े नाम शामिल थे। सवाल यह भी उठ रहा है कि कुलपति की नियुक्ति के लिए नाम उच्च स्तरीय सर्च कमेटी तय करती है जिसमें नामी शिक्षाविद शामिल होते हैं। उसके लिए आवेदन लिए जाते हैं, आवेदनों की बारीकी से जांच होती है और सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद राज्य सरकार की अनुशंसा को भेजे जाते हैं। वहां से नाम फाइनल होने के बाद राज्यपाल की सहमति द्वारा नियुक्ति आदेश जारी किए जाते हैं। ऐसे में यह गुंजाइश ही नहीं रहती है कि किसी को कम योग्यता के आधार पर नियुक्ति मिल जाए।
अब राज्यपाल के आदेश पर प्रमुख सचिव राज्यपाल, राजस्थान सुबीर कुमार ने एक आदेश जारी किया है जिसमें बताया गया है कि प्रमुख शासन सचिव उच्च शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार के पत्रांक प. 13 (83) शिक्षा - 4 / 2022 पार्ट दिनांक 4 अगस्त 2023 द्वारा प्रो. अमेरिका सिंह पर लगाये आरोपों के संबंध में संभागीय आयुक्त, उदयपुर द्वारा की गई जांच तथा प्रो. नीलिमा सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति की जांच, प्रो. अमेरिका सिंह तत्कालीन कुलपति मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से प्राप्त प्रत्युत्तर 11 सितंबर, 2023 के विवेचन से स्पष्ट है कि प्रो. अमेरिका सिंह द्वारा 20 अगस्त 2007 से सेवानिवृत्ति 31 जनवरी 2020 तक प्रोफेसर के पद के समस्त लाभ प्राप्त किये गए हैं। इस संबंध में अनु सचिव, उत्तर प्रदेश शासन के पत्र 20 फरवरी 2009 के अवलोकन से भी स्पष्ट है कि प्रो. अमेरिका सिंह को प्रोफेसर के पद पर 10 वर्ष से अधिक समय का कार्यानुभव है। अतः प्रमुख शासन सचिव, उच्च शिक्षा, राजस्थान सरकार के पत्रांक प. 13 (83) शिक्षा- 4 / 2022 पार्ट 4 अगस्त 2023 द्वारा प्रो. अमेरिका सिंह के विरूद्ध लगाए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं । तद्नुसार प्रकरण को नस्तीबद्ध किया जाता है। उक्त आदेश राज्यपाल एवं कुलाधिपति महोदय के स्तर से अनुमोदित है ।
चंपा बाग प्रकरण उठाने का भुगतना पड़ा खामियाजा
गौरतलब है कि पूर्व कुलपति ने उदयपुर में चंपाबाग में विश्वविद्यालय की जमीन का मामला जोर-शोर से उठाया था, जमीन पर विवि का बोर्ड लगवा दिया था, जिसके बाद राज्यपाल ने भी जांच के आदेश दिए थे। इस मामले में ऊची पहुंच वाले राजनेताओं में खलबली मच गई थी और उनकी गहरी दिलचस्पी और लाभ के गणित के चलते कुलपति के खिलाफ पार्टी पॉलिटिक्स से ऊपर उठ कर एक ऐसा साझा विरोध गुट खड़ा हो गया जो उन्हें हर हालत में हटाने पर आमादा हो गया। उसके बाद सीकर गुरूकुल मामला उठा जिसमें प्रो. सिंह को निलंबित कर दिया गया। उस मामले में भी राज्यपाल की जांच के बाद निलंबन वापस लिया और प्रो. सिंह को दोषमुक्त कर पूरा वेतन देने के आदेश दिए। मजे की बात ये है कि जिन लोगों ने तब जोर- शोर से मामला उठाया था वे सब प्रो. सिंह को क्लीन चिट मिलने के बाद होठ सिल कर चुपचाप बैठ गए। उनके सभी सवाल दफन हो गए। इस मामले में एक अन्य धड़े का मानना है कि सुविवि में अंदरखाने हुई गुटबाजी का भी खामियाजा प्रो. सिंह का भुगतना पड़ा।
इनका कहना है
मैं पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कह चुका हूं कि यदि मुझ पर लगे आरोप सही पाए गए तो मैं खुद को कानून के हवाले कर दूंगा। आज मुझे आत्मिक संतोष है कि सभी आरोप निराधार साबित हुए हैं। आरोप लगाने वालों के बारे में मैं कुछ भी नहीं कहना चाहता, मैं उनके सुखद जीवन लिए शुभकामनाएं देना चाहता हूं ताकि वे जीवन में किसी और पर इस तरह के आरोप नहीं लगाएं।
- प्रो. अमेरिका सिंह, पूर्व कुलपति, सुविवि
Editorial

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